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दिल्ली में सांसों पर आपातकाल:कोहरा नहीं...प्रदूषण की मोटी परत, हवा अब भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में; अधिकतर इलाकों में एक्यूआई 450 के करीब

नई दिल्ली21 दिन पहले
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गुड़गांव| धुएं के गुबार के कारण गुड़गांव में विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम रह गई। - Dainik Bhaskar
गुड़गांव| धुएं के गुबार के कारण गुड़गांव में विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम रह गई।

दिल्ली की हवा की गुणवत्ता अभी भी गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। शनिवार सुबह दिल्ली में एक्यूआई 533दर्ज की गई है। शनिवार को दिल्ली में हवा की गुणवत्ता ‘ बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। दिल्ली के अधिकतर इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 450 के करीब बना हुआ है। एनसीआर के गाजियाबाद लोनी में एक्यूआई 516 और नोएडा के सेक्टर 62 में 538 दर्ज किया गया है। शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में यह 999 दर्ज किया गया था, जो कि हवा की गुणवत्ता मापने का उच्चतम पैमाना है।

पर्यावरण विशेषज्ञ सचिन पवार के अनुसार आज कई जगह पर हवा चली है जिस कारण दिल्ली में हवा की गुणवत्ता आज भी कई क्षेत्रों में कुछ सुधार हुआ है। पवार ने बताया कि रविवार और सोमवार को तेज हवा चलने की उम्मीद है जिससे हैजार्ड से दिल्ली की प्रदूषण की स्तर पुअर तक आएगी।

मंगलवार के बाद से प्रदूषण के स्तर में पराली के जलने और हवा की गति के अनुसार लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। दिल्ली की हवा में प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने रखने वाली संस्था सफर के अनुसार दिवाली के एक दिन बाद भी सुबह से ही दिल्ली में घना कोहरा नहीं बल्कि प्रदूषण की मोटी परत है जो कोहरा दिख रहा है और जिसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार नें सड़कों पर स्मॉग गन मशीनों से छिड़काव शुरू किया
प्रदूषण को नियंत्रित करने को लेकर पानी के छिड़काव के लिए दिल्ली सचिवालय के बाहर टैंकरों को हरी झंडी दिखाई। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। जिसे काबू करने के लिए दिल्ली सरकार सड़कों पर पानी का छिड़काव करा रही है। राय ने कहा कि प्रदूषण को काबू करने के लिए दिल्ली में कई जगहों पर बड़े स्मॉग गन लगाए गए हैं और 114 टैंकर लगाकर पूरे दिल्ली में सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही, मानदंडों का उल्लंघन पाए जाने पर 92 निर्माण साइट्स को सील करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की कल करीब 3500 और आज करीब 4 हजार घटनाएं सामने आई हैं। अगर पराली जलाने की घटनाएं बढ़ती हैं, तो इसका असर दिल्ली में दिखेगा।

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