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पटाखा कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा:शोर वाले पटाखे नहीं, फुलझड़ी से भी खुशी मना सकते हैं; कंपनियों का तर्क- प्रतिबंध से लोग बेरोजगार हो जाएंगे

नई दिल्ली15 दिन पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, देश में मुख्य समस्या प्रतिबंधों को लागू करने की है, कोई भी व्यक्ति किसी एक वर्ग को नाखुश नहीं करना चाहता। - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, देश में मुख्य समस्या प्रतिबंधों को लागू करने की है, कोई भी व्यक्ति किसी एक वर्ग को नाखुश नहीं करना चाहता।

सुप्रीम काेर्ट ने कहा है कि जश्न मनाने का मतलब सिर्फ जाेरदार आवाज वाले धमाकेदार पटाखे चलाना नहीं है। फुलझड़ी जैसे छोटे पटाखाें से भी खुशियां मनाई जा सकती हैं। काेर्ट ने पटाखाें पर रोक से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, ‘देश में मुख्य समस्या प्रतिबंधों को लागू करने की है। कोई भी व्यक्ति किसी एक वर्ग को नाखुश नहीं करना चाहता।’

जस्टिस एमआर शाह और एएस बाेपन्ना की बेंच ने बुधवार काे कहा, ‘ग्रीन पटाखाें की आड़ में पटाखा निर्माता प्रतिबंधित सामग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रतिबंधित पटाखाें के संबंध में हमारे आदेश का सभी राज्याें काे पालन करना चाहिए, लेकिन किसी भी राज्य, शहर में जाने पर खुलेआम प्रतिबंधित पटाखाें की बिक्री देखी जा सकती है। जश्न मनाने में इस तरह के पटाखाें का इस्तेमाल हाे रहा है। हम जानना चाहते हैं कि इन पर प्रतिबंध है ताे ये बाजार में उपलब्ध कैसे हैं?’

कोर्ट रूम लाइव: दूसरों की जान की कीमत पर हम जश्न नहीं मनाते

याची की ओर से वकील गोपाल शंकरनारायण: सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त हलफनामा पेश किया है। देश में जो हो रहा है, वो व्यथित करने वाला है। जस्टिस एमआर शाह: हमने खास तौर पर पटाखों की लड़ियों पर रोक लगाई थी। मगर हर उत्सव, समारोह और चुनावी जीत पर सबसे अधिक इन्हें ही जलाया जा रहा है। आखिर ये लड़ियां आती कहां से हैं? पटाखा कंपनी की तरफ से वकील दुष्यंत दवे: कोर्ट ने केंद्र को कहा था कि वह ग्रीन पटाखों के मामलों में नहीं जाएंगे। उसके बावजूद केंद्र ने प्रोटोकॉल जारी किया है। जस्टिस शाह: कंपनियां प्रतिबंधित बेरियम साल्ट का प्रयोग पटाखे बनाने में कर रही हैं। पकड़े जाने पर कहते हैं कि इसे गोदाम में रखा है। प्रतिबंधित साल्ट गोदाम में क्यों रखते हैं? शंकरनारायण : सीबीआई रिपोर्ट में जिन आधा दर्जन कंपनियों को साल्ट के प्रयोग का आरोपी पाया गया है। उनमें से किसी के पास पीसीएसओ का प्रमाणपत्र नहीं है। दवे: लोग त्योहारों व खुशी के मौकों पर जश्न मनाने के लिए पटाखे जलाकर खुशी का इजहार करते हैं। पटाखों पर रोक से हर जश्न फीका होगा। कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे। जस्टिस शाह: हम किसी भी जश्न के खिलाफ नहीं हैं। हम भी त्योहारों व खुशी के मौकों पर जश्न मनाना चाहते हैं। मगर हमें यह भी देखना चाहिए कि दूसरों की जान की कीमत पर जश्न नहीं मना सकते। जश्न बिना शोर व प्रदूषण वाले पटाखों व फुलझड़ी से भी मनाया जा सकता है। शोर वाले पटाखों को बिक्री की अनुमति नहीं दे सकते।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से जवाब मांगा है, सुनवाई को 26 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया।

यह है मामला : कोर्ट ने सीबीआई जांच करवाई थी
2018 में सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी थी। बीते वर्ष आदेश के अवहेलना की बात आई तो कोर्ट ने सीबीआई जांच करवाई। इसमें 6 कंपनियों द्वारा बेरियम साल्ट का प्रयोग करने की बात सामने आई। इस पर कोर्ट ने कंपनियों से जवाब मांगा था।

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