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  • On The Very Next Day Of Diwali, Delhi NCR Became A Gas Chamber, AQI 999 In Noida, Reached 655 In Delhi's Janpath, 10 19 Times More Than Normal

दिल्ली में सांसों का आपातकाल:दिवाली के अगले ही दिन दिल्ली-एनसीआर बना गैस चैंबर, नोएडा में एक्यूआई 999, जनपथ में 655 पहुंचा, सामान्य से 10-19 गुना ज्यादा

नई दिल्ली23 दिन पहले
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शुक्रवार को दिल्ली में घने कोहरे की मोटी परत छाई रही और हालात गैस चैंबर जैसे बन गए। - Dainik Bhaskar
शुक्रवार को दिल्ली में घने कोहरे की मोटी परत छाई रही और हालात गैस चैंबर जैसे बन गए।

प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में जमकर पटाखे चलाने और पड़ोसी राज्यों में पराली जलने का असर शुक्रवार सुबह ही दिख गया। पूरे क्षेत्र में घने कोहरे की मोटी परत छाई रही और हालात गैस चैंबर जैसे बन गए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले महीन कण यानी पीएम2.5 की 24 घंटे की औसत सांद्रता शुक्रवार शाम 430 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गई। यह 60 की सुरक्षित दर से सात गुना ज्यादा है।

वहीं, पीएम10 का स्तर शाम पांच बजे 558 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। अगर 48 घंटे लगातार पीएम2.5 का स्तर 300 और पीएम10 का स्तर 500 से उफर हाेता है तो “आपात’ स्थिति होती है। नोएडा नॉलेज पार्क-1 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 999 और दिल्ली के जनपथ में 655 रहा।

जहरीली हवा के चलते दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में लोगों को गले में जलन और आंखों में पानी आने की दिक्कतों से जूझना पड़ा। प्रदूषण की निगरानी करने वाले पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की संस्था “सफर’ के मुताबिक, पूरी दिल्ली में औसत एक्यूआई 500 के साथ गंभीर श्रेणी में है।

स्मॉग टॉवर के करीब भी हवा हुई जहरीली
दिल्ली के सभी 33 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में एक्यूआई गंभीर श्रेणी में दर्ज हुआ। आनंद बिहार में एक्यृूआई 463 रहा, जबकि यहां स्मॉग टावर लगा है। दरअसल, 0 से 50 के बीच का एक्यूआई अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 को मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच को गंभीर श्रेणी में माना जाता है।

दृश्यता 200 मी., पैदल यात्रियों को भी मुश्किल
मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जीनामणि ने कहा, शुक्रवार सुबह घने कोहरे के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सफदरजंग हवाई अड्डे पर दृश्यता 200 से 500 मीटर रही। शहर के कई हिस्सों में तो दृश्यता 200 मीटर रही। इससे पैदल यात्रियों को मुश्किल का सामना करना पड़ा।

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