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देश में कोरोना मरीज नहीं सिर्फ टेस्ट घटे:केरल में मरीज इसलिए घटे, क्योंकि 5 दिन में ही 33% टेस्ट घटाए; महाराष्ट्र भी इसी राह पर

नई दिल्ली4 महीने पहले
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देश में रोज मिलने वाले मरीज 43 हजार से घटकर 36 हजार हो गए क्योंकि राज्यों ने टेस्ट घटा दिए हैं। - Dainik Bhaskar
देश में रोज मिलने वाले मरीज 43 हजार से घटकर 36 हजार हो गए क्योंकि राज्यों ने टेस्ट घटा दिए हैं।
  • इन दोनों राज्यों में एक हफ्ते पहले तक कुल 31 हजार से ज्यादा मरीज मिल रहे थे, अब 24 हजार मिल रहे

देश में रोज मिलने वाले कोरोना मरीजों की संख्या कुछ दिनों से लगातार घट रही है। केस 43 हजार से घटकर 36 हजार पर आ गए हैं। लेकिन, यह गिरावट सिर्फ केरल और महाराष्ट्र में केस घटने की वजह से है। यानी, देश में संक्रमण की जो स्थिति एक हफ्ते पहले थी, वही अब भी है।

हैरानी की बात यह है कि केरल में मरीज घटने की असल वजह संक्रमण घटना नहीं, बल्कि टेस्ट कम होना है। केरल में 3 अगस्त के बाद रोज होने वाले कोरोना टेस्ट 33% तक घटा दिए गए हैं, इसी वजह से रोजाना केस भी 24% तक कम मिलने लगे हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र में भी 5 अगस्त के बाद टेस्ट 10% तक घट चुके हैं।

केरल में संक्रमण की दर बढ़कर 14% हुई, यह देश की औसत से 7 गुना ज्यादा

केरल में टेस्ट घटाने की वजह से सिर्फ 6 दिन में संक्रमण की दर (टेस्ट पॉजिटिविटी रेट) 12% से बढ़कर 14% हो गई है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, संक्रमण की दर 5% से ज्यादा हो तो महामारी नियंत्रण से बाहर मानी जाती है, ऐसी स्थिति में टेस्ट बढ़ाने बेहद जरूरी हैं। महाराष्ट्र में नए केस बेशक घटे हैं, लेकिन संक्रमण की दर 3% से कम नहीं हुई है।

इधर, केंद्र सरकार को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- टीके के क्लीनिकल ट्रायल डेटा का खुलासा करें
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वैक्सीन के ट्रायल से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस भेजा है। याचिका में टीकों के क्लीनिकल ट्रायल का डेटा सार्वजनिक करने की मांग की गई है। कोर्ट ने वैक्सीन लगवाने की झिझक का जिक्र करते हुए याची से पूछा- ‘याचिका पर विचार करने से टीकों को लेकर लोगों के मन में संदेह तो पैदा नहीं होगा?’ इस पर याची ने कहा- ‘हम टीकाकरण रोकने की मांग नहीं कर रहे। पारदर्शिता जरूरी है। डेटा सामने आने से संदेह दूर होंगे। यह अनिवार्य है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार डेटा प्रकाशित करे।’

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