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अपना काम छोड़कर सुनवाई के लिए आना व्यवस्था के खिलाफ:सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली कोर्ट के जज को देख खफा जस्टिस राव बोले-आप यहां क्यों आए? अपनी कोर्ट में सुनवाई करें

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: पवन कुमार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अपना काम छोड़कर सुनवाई के लिए आना व्यवस्था के लिए गलत। - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अपना काम छोड़कर सुनवाई के लिए आना व्यवस्था के लिए गलत।

मुकदमों के बोझ तले दबी निचली अदालतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर कई आदेश जारी किए हैं। जजों को काम को गंभीरता से लेने संबंधी निर्देश भी सुप्रीम कोर्ट कई बार जारी कर चुका है। लेकिन जब दिल्ली की कोर्ट के एक जज अपना काम छोड़ कर निजी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो सुप्रीम कोर्ट नाराज हो गया।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कोर्ट में जज को मौजूद देखकर गहरी नाराजगी व्यक्त की। जस्टिस राव ने कहा, ‘आप यहां क्यों आए? जब आपने अपने लिए काबिल वकील पीएस पटावालिया को खड़ा किया है तो आपको कोर्ट आने की जरूरत ही नहीं थी। आपको अपनी कोर्ट में होना चाहिए था। यह न्यायिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। यह खेदजनक है कि आप अपना काम छोड़कर यहां आए।’ दिल्ली की कोर्ट के ये जज याचिका लगाने वाले आवदेकों में से एक हैं।

राव ने जज से पूछा आपकी कोर्ट सुबह 10 बजे शुरू होती है। अभी 10 बजकर 50 मिनट हो रहे हैं। आपको अपनी कोर्ट रूम में केसों की सुनवाई करनी चाहिए। जज ने कहा, ‘मैंने अपने केस में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए जिला जज से शाॅर्ट लीव ली है। यह सुनकर जस्टिस राव ने पूछा कि ये शाॅर्ट लीव क्या होती है, हमें भी बताइए?

इस पर दिल्ली कोर्ट के जज ने झेंपते हुए कहा, ‘मैं सुनवाई से जा रहा हूं।’ वरिष्ठ वकील पीएस पटवालिया ने कोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ भटनागर को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया और कहा कि वे जानना चाहते हैं कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या कह रहे हैं।

जूनियर जजों ने कार्य अनुभव संबंधी याचिका लगाई है

अखिल भारतीय न्यायधीश संघ के एक आदेश में संशोधन की मांग को लेकर लोअर कोर्ट के कुछ जजों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की हुई है। इसमें उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यह शर्त तय की गई है कि जिला जज के लिए प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के लिए सीिनयर जज सिविल डिवीजन में पांच साल का अनुभव जरूरी है। याचिका में कहा है, जूनियर- सीनियर डिवीजन के जजों का कार्य एकसमान है।