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दिल्ली में कोरोना के कारण हाहाकार:सीमापुरी श्मशान घाट में जगह पड़ी कम, परिजनों को खुले में करना पड़ रहा अंतिम संस्कार

नई दिल्ली2 महीने पहले
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  • संक्रमण के कारण सैकड़ों लोगों की रोजाना हो रही है मौत

दिल्ली में कोरोना के कारण हाहाकार मचा हुआ है। कोरोना के कारण सैकड़ों लोगों की रोजाना मौत हो रही है। कोरोना के कारण हो रही मौत के कारण लकड़ियों के कमी के बाद अब श्मशान घाटों में जगह कम पड़ गई है। परिजनों को अब खुले में संस्कार करना पड़ रहा है। ऐसा ही मामला पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी श्मशान घाट में श्मशान के बगल में खुले में कोरोना से मृत लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि प्रतिदिन 100 से ज्यादा शव यहां आ रहे हैं

पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी श्मशान घाट का संचालन शहीद भगत सिंह सेवा दल के प्रमुख जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि प्रतिदिन 100 से ज्यादा शव यहां आ रहे हैं। जगह की कमी को देखते हुए श्मशान घाट की दीवार को तोड़कर अतिरिक्त जगह की व्यवस्था की गई है। जिससे किसी तरह लोगों का संस्कार किया जा सके।

शंटी ने बताया कि कोरोना के दौरान एक साथ यहां कई लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है क्योंकि एक चिता को बुझने में समय लगता है। इसलिए एक साथ कई चिताओं में आग लगाई जा रही है। जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि सीमापुरी श्मशान घाट पर अपने परिजनों का दाह संस्कार करने के लिए आ रहे लोगों को कोई दिक्कत ना हो इसका भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

भीषण गर्मी को देखते हुए परिजनों के लिए शरबत, जूस और खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई है। शंटी ने बताया कि अतिरिक्त अस्थाई शव दाह गृह का निर्माण किया गया है ताकि मृतकों के परिजनों को ज्यादा इंतजार ना करना पड़े। उन्‍होंने बताया कि इस श्मशान घाट पर अभी लोगों को शव जलाने के लिए एक से 2 घंटे का इंतजार करना पड़ता है। हमारी कोशिश है कि इस समय को भी कम किया जाए।

अंतिम संस्कार के लिए 3450 रुपए का शुल्क श्मशान समिति द्वारा लिया जाता है

सीमापुरी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए 3450 रुपए का शुल्क श्मशान समिति द्वारा लिया जाता है। जिसमें लकड़ी, पंडित की संस्कार सेवा, लकड़ी सेवा, अस्थि क्रिया, ठेली सेवा शामिल है। इस शुल्क में एंबुलेंस और पीपीई किट के दाम शामिल नहीं है।

जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि प्रतिदिन 10 से 15 लोगों का अंतिम संस्कार यहां निशुल्क किया जा रहा है क्योंकि मृतक के परिजन भुगतान करने में असमर्थ होते हैं जिसका पूरा इंतजाम शहीद भगत सिंह सेवा दल द्वारा किया जाता है।

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