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सीनियर सिटीजंस के लिए अच्छी खबर:दामाद, बहू, गोद ली संतान और रिश्तेदारों भी संतान के दायरे में आएंगी, देना होगा गुजारा भत्ता; बिल को संसदीय समिति की मंजूरी

नई दिल्ली5 दिन पहले
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बड़ी सिफारिश: वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुलिस में विशेष अधिकारी हो - Dainik Bhaskar
बड़ी सिफारिश: वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुलिस में विशेष अधिकारी हो

माता-पिता या सास-ससुर की अनदेखी करना या पुश्तैनी संपत्ति हड़पना संतानों को महंगा पड़ सकता है। 8 मार्च से शुरू होने वाले संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इससे जुड़ा संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। इसमें बुजुर्गों के गुजारा भत्ते और गरिमापूर्ण ढंग से जीवन निश्चित करने के कड़े प्रावधान हैं।

दो साल पहले लोकसभा में पेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) बिल, 2019 को संसद की स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है। इस पर ठोस अमल के लिए सिफारिशें भी दी हैं। समिति ने संतान की कैटेगरी में दामाद, बहू और सम्पत्ति में हक रखने वाले दत्तक या सौतेली संतान या रिश्तेदार को भी शामिल करने की व्यवस्था को अच्छा कदम बताया है।

गुजारे भत्ते की सीमा तय नहीं, जरूरतों और आय के हिसाब से तय होगी

समिति ने माना कि कोख से जन्मी औलाद के अभाव में बुजुर्ग इन संतानों से अपने गुजारे का दावा कर सकेंगे। पोते-पोती और नाबालिग बच्चे के कानूनी अभिभावकों को भी संतान मानने और ससुर, सास और दादा-दादी को भी अभिभावक की श्रेणी में रखने की भी सिफारिश दी गई है।

अब संतानहीन बुजुर्ग का ऐसा कोई भी कानूनी उत्तराधिकारी संतान के दायरे में होगा जो उनकी सम्पत्ति पर हक रखता है या बुजुर्ग मृत्यु के बाद ऐसा कर सकता है। अगर कोई नाबालिग है तो उसके अभिभावक को रिश्तेदार मानते हुए गुजारे के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

वरिष्ठ नागरिकों के वेल्फेयर में कपड़े, आवास, सुरक्षा, मेडिकल सहायक, उपचार और मानसिक स्वास्थ्य भी जोड़ा जा रहा है। गुजारा-भत्ते के लिए 10 हजार रु. महीने की सीमा खत्म की जा रही है। भत्ता अभिभावकों की जरूरतों और संतान की आय के हिसाब से तय होगा। इस पर कैपिंग नहीं होगी।

17 करोड़ सीनियर सिटीजन की जिंदगी बेहतर होगी

अभी 12 करोड़ सीनियर सिटीजन हैं। अगले पांच साल में 5 करोड़ और बढ़ जाएंगे। ऐसे में इस बड़ी आबादी के लिए गरिमापूर्ण जीवन सरकार की प्राथमिकता है। समिति ने सिफारिश की है कि बुजुर्गों को डिजिटल, वित्तीय साक्षरता से जोड़ें। अभिभावकों की इकलौती संतान वाले वर्कर्स को स्पेशल लीव मिले। हर थाने में सहायक सब इंस्पेक्टर या बड़ी रैंक का एक नोडल अधिकारी बुजुर्गों के लिए हो। अलग हेल्थकेयर सेंटर बनें, काउंसिलिंग की व्यवस्था भी हो।

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