दो शादी करने पर मिला वारंट / गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम काेर्ट पहुंचा तो जज बाेले: आपकी दो-दो बीवियां, आपके मामले में दखल नहीं देंगे

फाइल फोटो फाइल फोटो
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  • एक पत्नी के रहते धोखाधड़ी से दूसरी महिला से ब्याह रचाने के मामला
  • जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उसे राहत देने से इंकार कर दिया

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 08:32 AM IST

नई दिल्ली. पवन कुमार, एक पत्नी के रहते धोखाधड़ी से दूसरी महिला से ब्याह रचाने के मामले में आरोपी व्यक्ति राहत पाने के लिए शुक्रवार काे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उसे राहत देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आपकी दो-दो बीवियां हैं, हम दखल नहीं देंगे। दरअसल, तमिलनाडु के व्यक्ति पर धोखे से दूसरा विवाह रचाने का आरोप है। वह खुद के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट पर रोक लगाने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
 दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है। इस पर जस्टिस रमना ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुुए कहा कि आप धारा 494 के तहत आपराधिक कार्यवाही के अधीन हैं। फिर हम दखल क्यों दें। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि मेरा केस से लेना-देना नहीं है।  इस पर कोर्ट ने कहा कि आप बहस क्याें कर रहे हैं? आप चार हफ्ते में सरेंडर करें। हम याचिका खारिज कर रहे हैं।

...तो पीड़ित को चोट किसने मारी?

मारपीट के एक मामले में दोषी व्यक्ति की ओर से वकील विक्रम हेगड़े ने दलील दी कि मी लार्ड, मेरे मुवक्किल ने कुछ नहीं किया। उसे आपराधिक मामले में फंसाया गया है। इस पर जस्टिस रमना ने कहा कि तो फिर पीड़ित को चोट किसने मारी? क्या भगवान आकर मार गए? हाई कोर्ट ने सजा 7 साल से घटाकर 2 साल किस आधार पर की? उन्होंने फटकार लगाते हुए याचिका खारिज कर दी। 

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