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एडहॉक जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट संकट की स्थिति में, आधी ताकत से काम कर रहे, हाईकोर्ट जज रिटायर्ड जजों को बतौर एडहॉक जज नियुक्त कर सकेंगे

नई दिल्लीएक महीने पहले
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हाईकोर्ट के जज रिटायर्ड जजों को बतौर एडहॉक जज नियुक्त कर सकते हैं। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट के जज रिटायर्ड जजों को बतौर एडहॉक जज नियुक्त कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने देश की विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित केसों का निपटारा करने के लिए रिटायर्ड जजों को एडहॉक जजों के रूप में नियुक्ति देने का रास्ता साफ कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने एडहॉक जजों की नियुक्ति के लिए गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के जज रिटायर्ड जजों को बतौर एडहॉक जज नियुक्त कर सकते हैं। ऐसे जजों का वेतन व भत्ते का खर्च सरकार वहन करेगी।

पीठ ने अपने आदेश में लिखा है कि हाईकोर्ट एक संकट की स्थिति में हैं।

हाईकोर्ट में लगभग 40% रिक्तियां हैं, जिनमें से कई बड़े हाईकोर्ट अपनी स्वीकृत शक्ति के 50% के साथ काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य रूप से हमने यह माना है कि यह प्रक्रिया बेहद आवश्यक है और यह एक संवैधानिक प्रावधान है। केंद्रीय कानून मंत्रालय और हाईकोर्ट एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर उनके समक्ष एक रिपोर्ट दायर करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एडहॉक जजों को नियमित जजों का विकल्प नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्होंने अभी इस मामले का निपटारा नहीं किया है। यह एक अंतरिम आदेश है।

कोर्ट इस मामले में अब चार महीने बाद सुनवाई करेगा। ज्ञात हो कि लोक प्रहरी नामक संस्था ने देशभर मे हाईकोर्ट में लंबित केसों का निपटारा करने के लिए एडहॉक जजों की नियुक्ति की मांग को लेकर एक याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। देश की सभी हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को राय मांगी थी। इस पर सभी हाईकोर्ट से जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला 15 अप्रैल को सुरक्षित रख लिया था।

हाईकोर्ट बनाएगी रिटायर्ड जजों का पैनल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि किसी भी हाईकोर्ट में लंबित केसों की संख्या एक उचित सीमा से अधिक बढ़ जाने पर रिटायर्ड जजों को एडहॉक जजों के रूप में नियुक्त कर उन्हें अंतरिम तौर पर काम सौंपा जा सकेगा। हर हाईकोर्ट रिटायर्ड जजों का एक पैनल बनाएगी। उस पैनल से ही हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा जरूरत पड़ने पर एडहॉक जजों की नियुक्ति की जाएगी।

तीन बिंदुओं में समयसीमा तय

1.इंटेलिजेंस ब्यूरो को उच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश की तारीख से 4 से 6 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट/इनपुट केंद्र सरकार को सौंपनी चाहिए।

2.यह जरूरी होगा कि केंद्र राज्य सरकार से मत मिलने की तारीख और आईबी से रिपोर्ट/ इनपुट से 8 से 12 सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में फाइल/सिफारिश भेजे।

3.इसके बाद सरकार इन पर तुरंत नियुक्ति करने के लिए आगे बढ़े और अगर सरकार के पास सार्वजनिक हित में कोई आपत्ति है, तो विशिष्ट कारणों के साथ कॉलेजियम को वापस भेजा जा सकता है।

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