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दूतावास से भारतीयों को वापस बुलाने की तैयारी:तालिबान अफगानिस्तान के 421 जिलों में से एक तिहाई जिलों पर कब्जा जमा चुका, एक-दो महीने में काबुल तक पहुंच सकता है

नई दिल्ली2 महीने पहले
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अफगानिस्तान के चौथे सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ में तुर्की और रूस के वाणिज्यिक दूतावास बंद हो चुके हैं। - Dainik Bhaskar
अफगानिस्तान के चौथे सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ में तुर्की और रूस के वाणिज्यिक दूतावास बंद हो चुके हैं।

अफगानिस्तान से पूरी तरह सेनाएं हटाने के अमेरिकी फैसले और तालिबान के बढ़ते कब्जे ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में भारत युद्ध ग्रस्त पड़ोसी देश के विभिन्न स्थानों पर तैनात नागरिकों और अफसरों को निकालने पर विचार कर रहा है।

2001 में अमेरिकी सेना की आमद और तालिबान के पतन के बाद से अफगानिस्तान में भारत की बड़ी मौजूदगी रही है। वहां की लोकतांत्रिक सरकार बनवाने में भारत मददगार रहा है। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, बातचीत चल रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी लोगों को वापस बुला लिया जाए या कुछ महत्वपूर्ण स्टाफ को वहीं छोड़कर बाकी को बुलाया जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान के शहरों के अलावा भीतरी इलाकों में स्थिति काफी खराब हो चुकी है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दूतावासों और भारत सरकार के वाणिज्यिक दफ्तरों का संचालन काफी मुश्किल हो गया है। तालिबान अफगानिस्तान के 421 जिलों में से एक तिहाई जिलों पर कब्जा कर चुका है। एक से दो माह में वह राजधानी काबुल पर कब्जा कर सकता है।

दूसरे देश भी बंद करने लगे वाणिज्यिक दूतावास

अफगानिस्तान के बढ़ते कब्जे के खौफ से दूसरे कई देश अपने वाणिज्यिक दूतावास बंद करने लगे हैं। उत्तरी बल्ख प्रांत की राजधानी और अफगानिस्तान के चौथे सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ में तुर्की और रूस के वाणिज्यिक दूतावास बंद हो चुके हैं। उनके कूटनीतिज्ञ शहर छोड़कर चले गए हैं।

ईरान ने कहा कि उसने अपने वाणिज्यिक दूतावास में गतिविधियों को सीमित कर दिया है। बल्ख प्रांत के प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता मुनीर फरहाद ने मंगलवार को कहा कि उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, भारत और पाकिस्तान के वाणिज्यिक दूतावासों ने सेवाएं कम कर दी हैं।

भारत के चार दूतावास, एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र

पिछले 10 सालों में भारत ने अफगानिस्तान में 2 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश किए हैं। काबुल में भारत के दूतावास के अतिरिक्त चार वाणिज्यिक दूतावास भी हैं। एक सैन्य कार्यालय भी है, जो सैनिकों और पुलिसबलों को ट्रेनिंग देता था। जलालाबाद और हेरात के वािणज्यिक दूतावास बंद हो चुके हैं, जबकि कंधार और मजार शरीफ में दो वाणिज्यिक दफ्तर काम कर रहे हैं। दोनों दूतावास मिलाकर 500 लोगों का स्टाफ है।

अब काबुल का दूतावास अमेरिका की बड़ी चिंता

अफगानिस्तान में अमेरिका की अब सबसे बड़ी चिंता उसका दूतावास और अन्य कूटनीतिक मिशन हैं। दूतावास में 1400 अमेरिकी नागरिक हैं। वहीं 4000 लोगों का स्टाफ भी है, जो एक छोटे गांव की तरह है। हालांकि इसके खुद के सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। वहीं यह काबुल के ग्रीन जोन में आता है। इसके बाहरी इलाके में बड़ी दीवारें बनी हैं। अफगानी सैनिक पहरा देते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा का खतरा है।

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