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संसदीय समिति का ट्विटर इंडिया से सवाल:समिति ने पूछा- आपकी नीति महत्वपूर्ण या देश का कानून; ट्विटर का जवाब- हम अपनी पॉलिसी का पालन करते हैं

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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अधिकारियों ने कहा कि वे ट्विटर की पॉलिसी का पालन करते हैं। - Dainik Bhaskar
अधिकारियों ने कहा कि वे ट्विटर की पॉलिसी का पालन करते हैं।
  • समिति की दो टूक- आपकी नीति नहीं देश का कानून सर्वोपरि है

केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच जारी तकरार के बीच शुक्रवार को कंपनी के प्रतिनिधियों की सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) मामलों की संसदीय समिति के समक्ष पेशी हुई। ट्विटर इंडिया की ओर से पेश पब्लिक पॉलिसी मैनेजर शगुफ्ता कामरान और कानूनी सलाहकार आयुषी कपूर ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर बयान दर्ज कराया।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों अधिकारियों से करीब 130 मिनट चली गवाही में करीब 40 सवाल पूछे। शुरुआत ट्विटर में उनकी हैसियत से हुई, पूछा गया कि कंपनी में उनका दर्जा क्या है? भारत में नियुक्ति का आधार क्या है?

सवाल-जवाब के दौरान अधिकारियों ने कहा कि वे ट्विटर की पॉलिसी का पालन करते हैं। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए समिति ने कहा, ‘आपकी पॉलिसी नहीं, देश का कानून का सर्वोपरि है।’ समिति ने कहा, कानून का ‘उल्लंघन’ करने पर आपके खिलाफ जुर्माना क्यों न लगाएं?

समिति ने कहा- आप दूध के धुले नहीं, आपने देश के कानून का उल्लंघन किया, क्यों न जुर्माना लगाया जाए

भारत का कानून सर्वोपरि है या आपकी नीति?

हम जिस देश में ऑपरेट करते हैं, वहां के कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन व्यापक हित में अपनी पॉलिसी पर चलते हैं।

आप कंटेंट को कैसे प्रभावित करते हैं?

हम हेल्दी ट्वीट्स को बढ़ावा देते हैं।

हेल्दी ट्वीट तय करने का मानक क्या है?

यह ट्विटर के एल्गोरिदम से तय होता है।

कंटेंट की प्राथमिकता तय करने से आप इंटरमीडिएटरी नहीं रहते, पब्लिशर हो जाते हैं?

इस पर ट्विटर के प्रतिनिधि सकपकाए और कहा, हम इसका जवाब बाद में देंगे।

आप इतनी बड़ी कंपनी हैं, पहले नहीं सोचा कि शिकायतों के समाधान के लिए अफसर होना चाहिए? सरकार ने कहा, तब भी विरोध किया?

हमने भारत में अंतरिम शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त कर दिया है।

पूर्णकालिक अधिकारी क्यों नहीं नियुक्त किया, क्या यह निर्देशों का उल्लंघन नहीं है?

हम निर्देशों का पालन करने की प्रक्रिया में हैं और इसे पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।

यूरोप में आप पर साढ़े चार लाख यूरो का जुर्माना हुआ, नाइजीरिया में आप बैन हैं, यानी दूध के धुले नहीं हैं। भारत में भी नियमों का उल्लंघन करने पर क्यों न दंड लगाया जाए?

हम समिति को इसका लिखित जवाब देंगे।

अमेरिका में एक पीड़ित के चुनौती देने के बाद कंपनी ने चाइल्ड पोर्न कन्टेंट हटाया। भारत में आप पॉस्को कानून का पालन करते हैं?

हम अमेरिकी एजेंसी को इस बारे में अपना रुख बता देते हैं।

अगर आप भारतीय एजेंसियों को इस बारे में जवाब नहीं देते तो आप गुनहगार हैं?

हम इसका लिखित जवाब देंगे।

कैपिटल हिल्स के प्रदर्शन को कानून का उल्लंघन बताकर हटा दिया, पर लाल किले के प्रदर्शन को अभिव्यक्ति की आजादी कहा, क्यों?

प्रतिनिधियों ने इस का जवाब नहीं दिया।

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