पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Local
  • Delhi ncr
  • The Disease Took Hidden Insurance, The Mother Got The Claim After Death, The Company Won In The Supreme Court, But The Judge Said There Will Be No Recovery From The Old Mother

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

केस हारकर भी बरी हुई बुजुर्ग महिला:बीमारी छिपा बीमा लिया, मौत के बाद मां को मिला क्लेम, सुप्रीम कोर्ट में कंपनी जीती, मगर जज बोले- बूढ़ी मां से रिकवरी नहीं होगी

नई दिल्लीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
प्रतीकात्मक फोटो।
  • सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता फोरम का फैसला पलटा, विशेषाधिकार से दी महिला को राहत
  • कोर्ट ने कहा- बीमा धारक को बीमारी का खुलासा करना जरूरी, वरना क्लेम अमान्य साबित होगा

(पवन कुमार) बीमा क्लेम को लेकर पंजाब के तरनतारन में एक अजब मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया। कुलवंत सिंह ने जीवन बीमा लेते समय बीमारी छिपाई। पॉलिसी लेने के एक महीने बाद ही उसकी मौत हो गई। कुलवंत की मां दलबीर कौर ने क्लेम किया। बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत की और जीत गई।

बीमा कंपनी राज्य उपभोक्ता फोरम और नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रेडरेसल कमीशन से भी हार गई। मगर, सुप्रीम कोर्ट में बीमा कंपनी सही साबित हुई और उसे जीत भी मिल गई। मगर तब तक पीड़िता की मां को 17 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका था।

सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाने के साथ यह भी कहा कि वह क्लेम लेने वाली महिला से रकम की वसूली नहीं करेगी। ऐसे में बीमा कंपनी को सुप्रीम कोर्ट से जीत मिलने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में अहम टिप्पणी भी की है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बीमा के लिए अनुबंध एक बेहद भरोसे पर आधारित होता है। इसलिए बीमा धारक की जिम्मेदारी है कि वह सभी तथ्यों का खुलासा कंपनी के समक्ष करे। बीमा कंपनी की जांच में खुलासा हुआ है कि कुलवंत द्वारा पॉलिसी लेने से एक महीने पहले उसे खून की उल्टी हुई थी और उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया था।

उसकी बीमारी का कारण शराब का अत्यधिक सेवन करना था। मगर उसने इस तथ्य को छुपाया। इस अहम तथ्य को नेशनल कंज्यूमर फोरम ने अनदेखा किया है, इसलिए उनका आदेश रद्द किया जाता है। चूंकि कुलवंत की मां दलबीर की देखरेख करने वाला कोई नहीं है, इसलिए कोर्ट संविधान के आर्टिकल 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का मानवता के आधार पर प्रयोग करते हुए बीमा कंपनी को आदेश देती है कि वह उन्हें दी गई रकम की वसूली नहीं करेगी।

शराब का आदी था कुलवंत सिंह, इलाज की बात कंपनी से छिपाई थी

कुलवंत सिंह ने 5 अगस्त 2014 को बजाज एलियांस लाइफ इंश्योरेंस से बीमा करवाया। मां दलबीर कौर को नॉमिनी बनाया। उसने बीमा कंपनी से छिपाया कि उसे पूर्व में कोई बीमारी नहीं है। कंपनी ने 12 अगस्त 2014 को बीमा पॉलिसी जारी कर दी।

पॉलिसी जारी होने के एक महीने बाद उसकी मौत हो गई। 12 सितंबर 2014 को दलबीर कौर ने दावा किया। बीमा कंपनी ने जांच में पाया कि कुलवंत का तरनतारन के चैरिटेबल अस्पताल में पहले से ही इलाज चल रहा था। वह अत्यधिक शराब का सेवन करता था।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आपका कोई भी काम प्लानिंग से करना तथा सकारात्मक सोच आपको नई दिशा प्रदान करेंगे। आध्यात्मिक कार्यों के प्रति भी आपका रुझान रहेगा। युवा वर्ग अपने भविष्य को लेकर गंभीर रहेंगे। दूसरों की अपेक्षा अ...

और पढ़ें