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भास्कर खुलासा:जिस डॉक्टर को यूपीएससी ने टर्मिनेट करने की अनुशंसा की, उसे सफदरजंग का एमएस बनाया, शिकायत के बाद पद से हटाने की मांग उठी, लेकिन राजनीतिक संरक्षण में मामला टाल दिया गया

नई दिल्ली7 महीने पहले
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  • 3 साल तक बिना बताए गायब रहे, वरिष्ठता नियम को दरकिनार किया, बिना क्लियरेंस हो गई नियुक्ति

(तोषी शर्मा) केंद्र सरकार भ्रष्टाचार और विवादित अफसरों को लेकर सख्त है। लेकिन कुछ मंत्रालयों को शायद दागदार अफसर पसंद है। ऐसा ही मामला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से की गई नियुक्ति में सामने आया है। ये नियुक्ति है दिल्ली सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिडेंट डॉ. बलविंदर सिंह अरोरा की। वे करीब तीन साल तक नौकरी से बिना बताए गायब रहे, अनुशासनहीनता के चलते चार्जशीट दी गई। यहां तक कि संघ लोक सेवा आयोग ने उनकी सेवाएं समाप्त करने की सिफारिश की। इसके बावजूद अस्पताल के एमएस के पद पर नियुक्ति की गई है।

ये नियुक्ति करीब पांच माह पहले 9 जनवरी 2020 को की गई है। यहां तक कि डॉ. अरोरा की नियुक्ति में वरिष्ठता और डीओपीटी के सीसी रूल्स को भी दरकिनार किया गया है। विश्वसनीय सूत्रों की माने तो डॉ. अरोरा की नियुक्ति को लेकर विवाद होने और शिकायत मंत्रालय तक पहुंचने के बाद हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई थी। लेकिन किसी राजनीतिक संरक्षण के चलते इसे बीच में ही रोक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 

अनदेखी: न्यूज पेपरों में नोटिस के बावजूद कार्रवाई नहीं  की गई
डॉ. बलविंदर सिंह की नियुक्ति को लेकर विवाद से जुड़े कुछ कागजात भास्कर टीम को विश्वसनीय सूत्रों के जरिए मिले हैं‌। ये कागजात बाकायदा आरटीआई के जरिए मिलने के साथ ही अस्पताल प्रबंधन की ओर से सत्यापित हैं। जिसमें डॉ. अरोरा के नौकरी से गायब रहने, चार्जशीट, इंक्रीमेंट रोकने, यूपीएससी की ओर से टर्मिनेशन की अनुशंषा और उनके गायब रहने के दौरान अखबारों में अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रकाशित करवाए गए नोटिस समेत अहम रिकॉर्ड हैं।

इसमें डॉ. बलविंदर सिंह के 8 अप्रैल 2004 से लेकर 1 मार्च 2007 तक वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से बिना बताए गायब रहे। जिसके चलते अस्पताल प्रबंधन ने डॉ. बलविंदर सिंह को 7 दिन में ज्वाइन करने के लिए 23 और 25 मार्च 2006 को लगातार दो दिन दो समाचारों पत्रों में नोटिस प्रकाशित करवाए गए।

कभी विभाग हेड नहीं रहे डॉ. को एमएस की कुर्सी 

केंद्र सरकार के सबसे बड़े अस्पतालों में गिने जाने aवाले सफदरजंग अस्पताल के एमएस बनाए गए डॉ. बलविंदर सिंह अरोरा इसी अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में बतौर आचार्य कार्यरत थे। वे विभाग हेड डॉ. रजनी गेंद के सुपरविजन में काम कर रहे थे। वे एमएस बनने से पहले कभी विभाग के हेड तक नहीं रहे। 
कैडर का भी कर दिया घालमेल 
सफदरजंग अस्पताल के एमएस की पोस्ट नॉन टीचिंग कैडर की है। लेकिन हाल ही में एमएस बनाए गए डॉ. बलविंदर सिंह अरोरा टीचिंग कैडर के हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति के लिए नियमों को ताक पर रखते हुए कैडर में ही घालमेल कर दिया गया। डॉ. अरोरा से पहले मेडिकल सुपरिडेंट रहे डॉ. राजेंद्र शर्मा, डॉ. एके राय और डॉ सुनिल गुप्ता तीनों नॉन टीचिंग कैडर से थे।
जानिए क्या कहते हैं अधिकारी

^अस्पताल के एमएस की नियुक्ति का मामला मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है, ऐसे में इस बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूं। 
-दिनेश नारायण, पीआरओ, सफदरजंग अस्पताल

^डॉ. बलविंदर सिंह अरोरा की आज की तारीख में विजिलेंस क्लियर है, उनकी वरिष्ठता को लेकर मैं कुछ नहीं कहना चाहती हूं। 
-गायत्री मिश्रा, ज्वाइंट सेक्रेटरी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

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