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डिजिटल मोड में भी पुराना फॉर्मूला:एक साथ दो अदालतों में दलील दे रहा था वकील; टोका तो बोला- मुझे कुछ कह रहे हैं, सीजेआई बोले- नहीं दीवार से

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: पवन कुमार
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एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट में जिरह के लिए जाने का फॉर्मूला ऑनलाइन में फेल। - Dainik Bhaskar
एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट में जिरह के लिए जाने का फॉर्मूला ऑनलाइन में फेल।

अक्सर वकील एक कोर्ट में केस निपटाकर दूसरी कोर्ट में जिरह करने जाते हैं। लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान ऐसा करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इसमें अक्सर एक ही समय में अलग-अलग कोर्ट में एक साथ सुनवाई चलती है। ऐसा ही एक वाक्या गुरुवार को हुआ। एक वकील ने डिजिटल मोड में भी पुराना फार्मुला अपनाया, पर विफल रहा।

एक वकील को दो अलग-अलग मामलों में पेश होना था। एक केस सीजेआई एनवी रमना की कोर्ट में, दूसरा अन्य बेंच में था। वकील ने सामने दो कम्प्यूटर लगा रखे थे, जिनके जरिए वह दोनों कोर्ट से जुड़ा था। जैसे ही सीजेआई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो वकील उस समय दूसरी बेंच के सामने दलीलें दे रहे था।

वकील ने सीजेआई बेंच के सामने खुद को म्यूट नहीं किया इसलिए दूसरी बेंच में दी जा रही दलीलें सीजेआई की बेंच में भी सुनाई दे रही थीं। जबकि सीजेआई की बेंच के सामने मामले से जुड़ा वकील दलीलें पहले से ही दे रहा था। इससे एक साथ सीजेआई को दोनों वकीलों की दलीलें सुनाई देने लगीं। फिर सीजेआई बोले- अगर आप दोनों एक साथ दलीलें देकर आपस में चर्चा करना चाहते हैं, तो कोर्ट से बाहर हो जाएं। फिर भी एक वकील ने दलीलें जारी रखीं।

सीजेआई नाराज होकर बोले- आप हमारे सामने अन्य मामले में दलीलें दे रहे हैं। यह अनुशासनहीनता है। तभी वकील का ध्यान सीजेआई की ओर गया और उन्होंने पूछा- माई लॉर्ड आप मुझे कुछ कह रहे हैं? सीजेआई ने गुस्से में कहा- नहीं, हम तो दीवार से बात कर रहे हैं।

निचली कोर्ट्स में ट्रायल तेजी से करने को नहीं कह सकते

सीजेआई रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरूवार को दो अलग-अलग मामलों में आदेश जारी करने से मना कर दिया। दोनों मामलों में निचली अदालत को केस का ट्रायल जल्द निपटाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। सीजेआई ने कहा कि मौजूदा कोराना महामारी के समय में जिस प्रकार के हालात हैं, उनमें हम निचली अदालतों को इस प्रकार के आदेश जारी नहीं कर सकते। राष्ट्र संकट का काल चल रहा है। न्यायपालिका भी चुनौतियों से जूझ रही है। जब हालात सामान्य हो जाएं तो आप इसकी मांग हाईकोर्ट में कर सकते हैं।