खट्टर सरकार ने ली राहत की सांस:आखिर काम आई दुष्यंत चौटाला की डिनर डिप्लोमैसी, विधानसभा में सरकार के साथ खड़े रहे विधायक

नई दिल्ली10 महीने पहलेलेखक: रवि यादव
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भाजपा और जजपा के प्रयास रंग लाए और खट्‌टर सरकार बच गई। हालांकि कांग्रेस भी इसमें अपनी कामयाबी देख रही है । - Dainik Bhaskar
भाजपा और जजपा के प्रयास रंग लाए और खट्‌टर सरकार बच गई। हालांकि कांग्रेस भी इसमें अपनी कामयाबी देख रही है ।

मनोहर लाल खट्‌टर बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव से बचने के बाद खुश तो बहुत होंगे, लेकिन ये सब इतनी आसानी से नहीं हुआ। विधायकों की जिस संख्या का बंटवारा होना था, उसके गणित का अनुमान पहले ही लग चुका था, लेकिन राजनीति में ऐन वक्त पर कुछ भी हो सकता है और कुछ हुआ भी ऐसा ही। भाजपा व जजपा के प्रयास रंग लाए। हालांकि कांग्रेस इसे अपनी कामयाबी के रूप में देख रही है।

विधायकों की नाराजगी दूर करने में सफल रहे दुष्यंत

मंगलवर शाम को सदन खत्म होने के बाद ही जजपा के विधायकों का विरोधी सुर सामने आ गया था। जिसको जल्द भांपते हुए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने पार्टी के सभी विधायकों को अपने आवास पर रात्रि भोज के लिए बुलाया ओर नाराजगी दूर करने की कोशिश की। दुष्यंत के कई विधायक आर-पार के मूड में नजर आए और उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं हैं और उनके कोई काम सरकार में होते नहीं हैं, वो सरकार का हिस्सा होते हुए भी अपने आप को विपक्ष में बैठा महसूस कर रहे हैं।

इस मामले को देर रात तक सुलझाने में दुष्यंत कामयाब इसलिए हो गए क्योंकि उन्होंने अपने विधायकों को दो भरोसे दिए। सूत्रों की मानें तो पहला ये कि आगे से सभी विधायकों की सरकार में पूरी सुनवाई होगी। दूसरी बात ये कही कि यदि जजपा, भाजपा से गठबंधन खत्म करती है तो उससे कोई लाभ नहीं होने वाला है, उल्टा सत्ता उनके हाथ से चली जाएगी।

सरकार को बचाने में केंद्र की भी अहम भूमिका

जो विधायक अपनी सुनवाई न होने की शिकायत हमेशा मुख्यमंत्री खट्‌टर के सामने करते रहते थे, ऐसे विधायकों का डर मुख्यमंत्री को सताने लगा था और इनके नामों की सूची पार्टी हाई कमान को भेजी गई थी। संगठन प्रभारी से लेकर अध्यक्ष तक को इस काम को मैनेज करने की जिम्मेदारी दी गई थी। चंद दिनों पहले ही प्रभारी विनोद तावड़े भी चंडीगढ़ पहुंचे थे और सभी विधायकों के साथ बैठक भी की थी। जब से कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही थी, तभी से भाजपा सरकार और संगठन ने सरकार को बचाने के प्रयास तेज कर दिए थे।

आंकड़ों को ऐसे किया पक्ष में

बात भाजपा के विधायकों की करें तो मौजूदा समय में मनोहर लाल के पास 40 विधायकों की संख्या है। इसके अलावा 10 विधायक जजपा के। 5 विधायक निर्दलीय वो भी हैं जो चुनाव से पहले भाजपा से टिकट मांग रहे थे और टिकट कटने पर आजाद उम्मीदवार के रूप में चुन कर आए, लेकिन समर्थन भाजपा को दे दिया। अब हरियाणा विधानसभा में विधायकों की संख्या 88 है। भाजपा को बहुमत के लिए 45 विधायक चाहिए थे, लेकिन इससे ज्यादा संख्या जुटाने में वो कामयाब हो गई।

क्या थी कांग्रेस की मंशा?

कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार को घेरने का प्लान तैयार किया था। विपक्ष ने जो तैयारी की थी, उसके मुताबिक यदि किसानों के समर्थन में जजपा के बागी विधायक आ गए तो खट्‌टर सरकार खतरे में पड़ जाएगी और यदि सरकार के खिलाफ वोट नहीं हुआ तो जो विधायक अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करेंगे, उनको किसानों की नजरों में विरोधी साबित किया जाएगा। ऐसे में कांग्रेस को एक फायदा तो मिलना तय था। और वही हुआ।

किसानों और कृषि बिलों से कांग्रेस को कोई लेना-देना नहीं : अनिल विज

खट्‌टर सरकार में मंत्री अनिल विज का कहना है कि कांग्रेस को किसानों और कृषि बिलों से कोई लेना-देना नहीं है। विपक्ष राजनीतिक कारणों से अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया। हुड्डा ने खुद सदन में कहा कि वो किसान बिलों पर चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि वो मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

भाजपा सरकार अहंकारी : किरण चौधरी
कांग्रेस की नेता किरण चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार अहंकारी है, वह लाखों लोगों की अनदेखी कर रही है। इस सरकार के पतन का रास्ता साफ नजर आ रहा है ।

देवीलाल की विरासत को संभालने का सही वक्त : देवेंद्र बबली

जजपा के विधायक देवेंद्र बबली ने कहा, 'मेरा मानना है कि अब देवीलाल की विरासत को संभालने का सही वक्त आ गया है। हमें गठबंधन से अलग होकर विपक्ष में बैठना चाहिए। उपमुख्यमंत्री हम से कोई सलाह-मशविरा नहीं करते, वो खुद ही बहुत स्मार्ट हैं।'

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