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भास्कर एक्सप्लेनर:वैक्सीन टेस्ट बिना साइड इफेक्ट के नहीं होता; कठिन परीक्षणों से गुजर कर आती है, इसलिए सुरक्षित

नई दिल्ली2 महीने पहले
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चेन्नई के 40 वर्षीय व्यक्ति ने कोरोना की संभावित वैक्सीन से गंभीर रूप से तबीयत बिगड़ने की बात कही है। इसके लिए सीरम इंस्टीट्यूट को 5 करोड़ रुपए के मुआवजे के लिए कानूनी नोटिस भी भेजा है। हालांकि, कंपनी ने इन आरोपों को गलत बताते हुए इसे कंपनी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की कोशिश बताया है और उस व्यक्ति को नोटिस भेजने की बात कही है। लेकिन यह जानना जरूरी है कि जब भी किसी टीके या वैक्सीन का परीक्षण किया जाता है, तो उसमें क्या जोखिम या साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

वैक्सीन की टेस्टिंग से जुड़े सभी मुद्दों पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और बर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज में कम्युनिटी मेडिसिन के प्रमुख डॉ. प्रो. जुगल किशोर ने अपनी बात रखी।

सवाल: संभावित वैक्सीन को लगाना कितना जोखिम भरा होता है?
जवाब:
एस्पिरिन से लेकर जिंक तक दुनिया की कोई भी दवा या वैक्सीन बिना साइड इफेक्ट के नहीं होती। टीकाकरण के बाद कई प्रतिकूल प्रभाव होते हैं, जिन्हें पहले से जानना चाहिए। WHO ने भी कहा है कि परफेक्ट वैक्सीन जैसी कोई चीज नहीं है, जो सभी को सुरक्षा दे। लेकिन हर वैक्सीन मार्केट में आने से पहले कठिन परीक्षणों से पास हो कर आती है। इसलिए सुरक्षित होती है।

सवाल: नई वैक्सीन लगाने पर क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं?
जवाब:
सभी लोगों के साथ ऐसा हो, जरूरी नहीं। वैक्सीन के इंजेक्शन को लगाने या टीकाकरण के बाद व्यक्ति को दर्द, लालिमा और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो सामान्य हैं। हालांकि शारीरिक स्थिति और क्षमता के आधार पर कभी-कभी दौरा पड़ने, जलन और गंभीर एलर्जी भी हो सकती है। हालांकि ऐसी परेशानी की दर बहुत कम होती है और यह आसानी से ठीक हो जाती है।

सवाल: प्रतिभागी गंभीर बीमार हो जाए तो क्या होता है?
जवाब:
सबसे पहले उसकी सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है। उसकी देखभाल की सभी जरूरी व्यवस्था की जाती है। वैक्सीन के जांचकर्ता उसके लक्षणों के बारे में इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी को जानकारी देते हैं। इसमें बताया जाता है कि बीमारी वैक्सीन से जुड़ी है या नहीं। साथ ही वैक्सीन और परीक्षण का पूरा डेटा प्रायोजक को भेजा जाता है। प्रायोजक इसे स्वतंत्र डेटा सुरक्षा निगरानी बोर्ड (DSMB) को देता है। इसके बाद वैक्सीन कंपनी या प्रायोजक सरकारी अथॉरिटी जैसे, भारत के मामले में ड्रग कंट्रोलर जनरल को रिपोर्ट देती हैं।

सवाल: यानी किसी नई वैक्सीन को लगाना खतरनाक हो सकता है?
जवाब:
दरअसल, कोई भी संभावित वैक्सीन पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति को ही लगाई जाती है। इसकी सुरक्षा के मानक बेहद उच्च स्तर के होते हैं, जिनमें वैक्सीन के सभी तरह के प्रभावों का अनुमान और तैयारी की जाती है। इसके अलावा हर चरण पर इसका कड़ा परीक्षण या ट्रायल होता है।

सवाल: तो फिर पहले ही सावधानी या सुरक्षा क्यों नहीं रखी जाती?
जवाब:
ट्रायल के हर चरण में लोगों की संख्या बढ़ाते हैं, जिससे पता लगेे कि वैक्सीन कितनी सुरक्षित या प्रभावी है। पहले चरण में 10-100, दूसरे में 100-1000 लोगों पर टेस्ट होता है। तीसरे में 1000-10000 लोगों पर असर देखा जाता है। लाइसेंस मिलने के बाद भी वैक्सीन के नतीजों की मॉनिटरिंग की जाती है।

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