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किसानों के लिए अच्छी खबर:मध्य प्रदेश में 60% गेहूं फसल कट चुकी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिम यूपी में अब शुरू होगी कटाई

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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तस्वीर रतलाम के गेहूं खरीद केंद्र की है। बुधवार से प्रदेश में गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश में हार्वेस्टर और श्रमिकाें की दिक्कत के बीच अब तक करीब 60 फीसदी कटाई हो चुकी है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर रतलाम के गेहूं खरीद केंद्र की है। बुधवार से प्रदेश में गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश में हार्वेस्टर और श्रमिकाें की दिक्कत के बीच अब तक करीब 60 फीसदी कटाई हो चुकी है।
  • 5 राज्यों में गेहूं की बंपर आवक होने की उम्मीद बढ़ गई, किसानों के लिए इसे सहेजना बड़ी चुनौती
  • लॉकडाउन से फसल कटाई प्रभावित की आशंका थी, मगर ऐसा नहीं हुआ, अब मंडियों के गेट खुलने का इंतजार

देश में कुल गेहूं उत्पादन का 83% हिस्सा उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्यप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान का होता है। शेष राज्यों का योगदान केवल 17% ही है। इस बार रबी सीजन में मौसम ने साथ दिया। गेहूं की फसल इन पांचों बड़े उत्पादक राज्यों समेत अधिकांश राज्यों में बंपर होने के आसार हैं। आशंका जताई जा रही थी कि लॉकडाउन से फसल कटने में देरी होगी, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। मप्र में 60% फसल कट चुकी है जबकि पंजाब, हरियाणा और पश्चिम यूपी में अभी फसल कटना बाकी है। इंतजार अब बस मंडियों के गेट खुलने का है। किसानों के सामने दिक्कतें फसल कटाई की नहीं, बल्कि उसे संभालने की है।

मध्यप्रदेश: 60% कटाई हो चुकी, स्कूलों, धर्मशालाओं में रखा जा रहा, खरीदी टली

मप्र देश में गेहूं के कुल उत्पादन में हर साल करीब 17% योगदान देता है। इस बार रिकॉर्ड 190 लाख टन का उत्पादन होने की उम्मीद है। यानी पिछले बार के मुकाबले 25 लाख टन ज्यादा। मालवा- निमाड़, भाेपाल संभाग में रायसेन छाेड़कर ज्यादातर इलाकाें में कटाई हाे चुकी है। महाकाैशल, विंध्य, बुंदेलखंड के ज्यादातर हिस्से में 15 अप्रैल से कटाई शुरू हाेगी, क्योंकि ज्यादा बारिश के कारण इन क्षेत्राें में गेहूं की बाेनी देर से हुई थी। हार्वेस्टर एवं श्रमिकाें की दिक्कत के बीच राज्य में अब तक करीब 60 फीसदी कटाई हो चुकी है। बुधवार से राज्य के 4 हजार केंद्रों पर होने वाली खरीदी शुरू हो गई है। तीन जिलों को छोड़ दिया गया है। यहां काम करने वाले करीब 60% श्रमिक बिहार, उप्र समेत अन्य राज्याें से अाते हैं। खरीदी करने वाली समितियां इनसे बाकायदा अनुबंध करती हैं। संक्रमण के संभावित खतरे से डर एवं लाॅकडाउन के कारण ये हम्माल एवं श्रमिक उपलब्ध नहीं हाे सकेंगे।

पंजाब: दूसरे राज्यों में फसल काटने गई मशीनें लौटी नहीं, लेबर का भी संकट

तस्वीर पंजाब के होशियारपुर की है। यहां गेहूं की फसल तेजी से काटी जा रही है।
तस्वीर पंजाब के होशियारपुर की है। यहां गेहूं की फसल तेजी से काटी जा रही है।

पंजाब में गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार है। लॉकडाउन के कारण पहली बार पंजाब में गेहूं का सीजन लंबा हो सकता है। सरकार ने खरीद के लिए राज्य में पिछले साल से दोगुने खरीद केंद्र बनाए हैं। राज्य में 1918 अनाज मंडी है। इस बार 2000 राइस मिल को जोड़कर कुल 3,800 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। मुश्किल यह है कि पंजाब की गेहूं कटाई के लिए दूसरे राज्यों में गई 18 हजार कंंबाइनें अभी तक बहुत कम संख्या में लौट पाई हैं। लॉकडाउन के कारण उनको पंजाब आने के लिए दूसरे राज्यों से पास नही मिल रहे हैं। बिहार, यूपी से लेबर भी नही आई। पंजाब में हर साल 4 लाख लेबर दूसरे राज्यों से आती हैं। उनका काम अनाज मंडियों और गेहूं कटाई में लिया जाता है। पंजाब की लोकल लेबर घरों में है। मगर वह इस काम में आगे नहीं आ रही हैं। पंजाब में हर साल 300 लाख टन अनाज पैदा होता है। बारिश से पैदावार में नुकसान हो सकता है, पर आगे हालात ठीक रहे तो रिकॉर्ड उत्पादन भी संभव है।

उत्तर प्रदेश: गेहूं तो बंपर होगा, बारिश की मार से दलहन-तिलहन की पैदावार कम

तस्वीर उत्तर प्रदेश के रायबरेली से है। यहां किसान खेतों में गेहूं की फसल काट रहे हैं। खेतों में सोशल डिस्टेंसिंग भी देखी जा रही है।
तस्वीर उत्तर प्रदेश के रायबरेली से है। यहां किसान खेतों में गेहूं की फसल काट रहे हैं। खेतों में सोशल डिस्टेंसिंग भी देखी जा रही है।

यूपी में लगभग 65% जनसंख्या कृषि पर आधारित है। राज्य में रबी व खरीफ की फसलों से राज्य में 550 लाख टन से अधिक सालाना उत्पादन होता है। तिलहनी फसलों का लगभग 10 लाख टन उत्पादन होता है। राज्य में गेहूं की 30% कटाई हो चुकी है, जबकि मशीनों की कमी के कारण राज्य के सबसे बड़े पश्चिमी हिस्से में कटाई होनी अभी शुरू हुई है। छोटे किसान और जिन्हें भूसा चाहिए वे खुद व मजदूरों से फसल कटवा रहे हैं, जबकि कटाई श्रमिक रोजाना 300 रुपए ले रहें है। इस बार बारिश के कारण रबी की दलहन व तिलहन के उत्पादन में कमी की आशंका है। मार्च के महीने में हुई बारिश और ओलावृष्टि से 75 में 74 जिलों में गेहूं, आलू, सरसों, सब्जियों और फलों को नुकसान हुआ था। लॉकडाउन के चलते सरकार मंडी की व्यवस्था को दुरुस्त कर गांव पहुंच कर खरीद के विकल्प पर भी विचार कर रही है। सर्दियों में बारिश से गेहूं की फसल को पकने में ज्यादा समय लगा।

हरियाणा: खराब मौसम के बावजूद गेहूं को पकने के लिए अच्छा समय मिल गया

तस्वीर हरियाणा के करनाल से है। यहां किसानों काे पूरा समय खेतों में बीत रहा है। गेहूं की तेजी से कटाई चल रही है।
तस्वीर हरियाणा के करनाल से है। यहां किसानों काे पूरा समय खेतों में बीत रहा है। गेहूं की तेजी से कटाई चल रही है।

हरियाणा में 23.87 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल पक चुकी है। 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद भी शुरू हो जाएगी। सरकार ने गेहूं खरीद का 95 लाख टन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पिछले साल से करीब दो लाख टन अधिक है। जबकि गेहूं का एरिया पिछले साल से 1.36 लाख हेक्टेयर कम है। कुल उत्पादन 115 लाख टन से अधिक होने की उम्मीद है। जबकि पिछले साल हरियाणा में उत्पादन 128 लाख टन हुआ था। इस बार गेहूं के सीजन में ठंडक लगातार बनी रही है और लगातार पश्चिम विक्षोभ आते रहे हैं, इससे उत्पादन बंपर होने में मदद मिलेगी। सबसे बड़ी दिक्कत अबकी बार प्रवासी मजदूरों की कमी रहेगी। इससे गेहूं कटाई में समय लग सकता है। फसल कटाई में यदि देरी हुई तो पकी फसल झड़ सकती है, इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अबकी बार 9 लाख टन सरसों उत्पादन की उम्मीद है। फिलहाल सरसों की खरीद 163 केंद्रों से शुरू की गई है।

राजस्थान: ओलावृष्टि से 20% नुकसान के बावजूद बंपर फसल का अनुमान, कटाई अब शुरू होगी

तस्वीर अजमेर की है। अधिकांश खेतों में गेहूं की कटाई के बाद थ्रेसिंग चल रही है।
तस्वीर अजमेर की है। अधिकांश खेतों में गेहूं की कटाई के बाद थ्रेसिंग चल रही है।

फसल खरीदने के लिए प्रदेश में 16 अप्रैल से मंडियां खुल रही हैं। कुल 93 लाख हेक्टेयर में रबी की बुआई की गई। इसमें से 33 लाख 14 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया गया। पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि से इस फसल को करीब 20% का नुकसान पहुंचने का अनुमान है। विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 1 करोड़ टन गेहूं की फसल बाजार में आएगी। राजस्थान में थ्रेसर मशीनें देर से आने के कारण कटाई में देरी की वजह से प्रदेश में गेहूं का सीजन एक महीने आगे चला गया है। फसल के बाजार में देरी से पहुंचने सेे मंडियो में किसानों को भाव सही नहीं मिलने की आशंका है।

छत्तीसगढ़: चने की फसल खेत में छोड़ी, लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं

छत्तीसगढ़ में इस साल 1.87 लाख हेक्टेयर रकबे में गेहूं की फसल ली गई है। 3 लाख 20 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। पहले बेमौसम बारिश, फिर ओलावृष्टि और अब लॉकडाउन के कारण चने की फसल लगभग बर्बाद हो चुकी है। गेहूं पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञ संकेत ठाकुर के मुताबिक चने का दाना सख्त हो गया है, इसलिए फसल कटवाते समय दाना खेत में गिर जाएगा यह सोचकर किसान उसे कटवा भी नहीं रहे हैं। मजदूरों को जितना पैसा चने काे कटवाने के लिए देना पड़ेगा उतनी लागत भी नहीं मिलेगी इसलिए फसल को खेत में ही छोड़ दिया गया है।

गुजरात: लॉकडाउन में भी श्रमिक मिले तो कटाई रुकी नहीं, मंडी बंद होने से निराशा

गुजरात में इस वर्ष गेहूं की बुआई में 72% वृद्धि दर्ज की गई। गेहूं की पैदावार इस वर्ष 42-45 लाख टन के बीच रह सकती है। बीते वर्ष के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा पैदावार होने का अनुमान है। लॉकडाउन में सिर्फ कृषि क्षेत्र को रियायत दिए जाने से राज्य में गेहूं की कटाई अब पूरी होने को है। अभी गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन मंडी बंद होने से किसान निराश हैं। समर्थन मूल्य 1925 रुपए है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर खरीददारी नहीं के बराबर हुई थी, क्योंकि खुले बाजार में ही भाव ज्यादा था। इस साल समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीददारी बढ़ने की उम्मीद है।

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