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दिल्ली दंगा:हेड कांस्टेबल रतनलाल की हत्या में महिला की जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली16 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • कोर्ट ने कहा- कई सह-आरोपियों के संपर्क में थी तबस्सुम

दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पिछले साल सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुई दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतनलाल की हत्या के मामले में आरोपी एक महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने दिल्ली के चांद बाग निवासी तबस्सुम की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसके मोबाइल फोन की सीडीआर से खुलासा हुआ है कि वह कई सह-आरोपियों के लगातार संपर्क में थी। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

उन्होंने कहा कि अपराध की गंभीरता के साथ मामले के समूचे तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए मैं इसे आवेदक को जमानत देने का सही मामला नहीं मानता और जमानत आवेदन खारिज किया जाता है। न्यायाधीश ने उल्लेख किया कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि प्रदर्शनकारियों और आयोजकों ने भीड़ में शामिल लोगों को उकसाया तथा कुछ शरारती तत्वों ने घटनास्थल को घेर लिया और वे पत्थरों, छड़ों, धारदार हथियारों और अन्य तरह के हथियारों के साथ पूरी तरह लैस प्रतीत दिखे थे।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि एक बुर्कानशीं महिला भी पुलिस दल पर छड़ों जैसी चीजों से हमला करती स्पष्ट रूप से दिखी। पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि तबस्सुम ने प्रदर्शनकारियों के साथ मंच साझा किया और लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काया था।

इसका परिणाम उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को दंगे भड़कने के रूप में निकला जिनमें कांस्टेबल रतनलाल सहित 50 से अधिक लोग मारे गए। अभियोजन के अनुसार घटना के दौरान पुलिस उपायुक्त (शहादरा) अमित शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त (गोकलपुरी) अनुज कुमार तथा अन्य 51 पुलिसकर्मियों को भी दंगाइयों ने घायल कर दिया था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: साजिश रचने वाले का खुलासा होना जरूरी है

नई दिल्ली | उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पिछले साल फरवरी में भड़के साम्प्रदायिक दंगों के एक मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी के बचाव में उसकी कम उम्र का हवाला देने पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस दंगे के दौरान देश की राजधानी ने आजादी के 74 साल बाद बंटवारे के समय के हालात और दर्द को दोबारा महसूस किया। इसकी साजिश रचने वालों का खुलासा होना बेहद जरूरी है और इसके लिए प्रत्येक आरोपी से गहन पूछताछ होनी चाहिए।

कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव की अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए पुलिस की उस दलील को मंजूर कर लिया। जिसमें कहा गया था कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।

फरार था आरोपी
न्यू उस्मानपुर निवासी आरोपी ने अदालत से अग्रिम जमानत का निवेदन किया था। आरोपी ने कहा था कि वह महज 19 साल का है। दंगों के बाद वह पहले अपनी रिश्तेदार की शादी में मुंबई चला गया था फिर इलाहाबाद के पास गांव चला गया, जहां लॉकडाउन की वजह से वहीं फंस गया था। जबकि पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ 5 मार्च 2020 को ही एफआईआर दर्ज हो गई थी। इसके बाद गैर जमानती वारंट और फिर कुर्की की कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन आरोपी हाजिर नहीं हुआ।

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