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  • Women Fought The Case For 30 Years, Now After 11 Years Of Death, Children Got Property Right From Supreme Court

41 साल पुराना प्रॉपर्टी विवाद:महिला 30 साल तक केस लड़ी, अब मौत के 11 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से बच्चों को मिला प्रॉपर्टी का हक

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: पवन कुमार
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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘किसी को अपना व्यापार सौंपना अलग बात है। वहीं, व्यापार करने के लिए जगह देना अलग। व्यापार सौंपने की एवज में प्रतिमाह रायल्टी लेने को किराया नहीं माना जा सकता। - Dainik Bhaskar
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘किसी को अपना व्यापार सौंपना अलग बात है। वहीं, व्यापार करने के लिए जगह देना अलग। व्यापार सौंपने की एवज में प्रतिमाह रायल्टी लेने को किराया नहीं माना जा सकता।
  • पति की मौत के बाद परिचित को चलाने के लिए दी थी दुकान

पुणे की एक महिला ने पति के काराेबार व दुकान को वापस पाने के लिए एक व्यक्ति के खिलाफ 30 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और आखिरकार उसके हक में फैसला आया, लेकिन उसकी मौत के 11 साल बाद। सुप्रीम कोर्ट ने महिला के बच्चों को उनकी जायदाद का मालिकाना हक सौंपे जाने का फैसला सुनाया है।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना तथा जस्टिस सूर्यकांत और अनिरूद्ध बोस की बेंच ने 41 साल पुराना प्रॉपर्टी विवाद सुलझाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘किसी को अपना व्यापार सौंपना अलग बात है। वहीं, व्यापार करने के लिए जगह देना अलग। व्यापार सौंपने की एवज में प्रतिमाह रायल्टी लेने को किराया नहीं माना जा सकता।

व्यापारी अक्सर समझौते की बारीकियों को नहीं देखते। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली भाषा के एक से अधिक अर्थ हो सकते हैं। अदालतों की जिम्मेदारी है कि वह समझौते में इस्तेमाल की गई भाषा का सही अर्थ पहचानें।’ बेंच ने कहा, ‘इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने समझौते के सही अर्थ को समझने में भूल की। इसलिए हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर हम निचली अदालत के फैसलेे को बहाल कर रहे हैं।

41 साल पुराना विवाद सुलझा, यह था पूरा मामला

वामन करंदीकर की पुणे में स्टेशनरी की दुकान थी। 1962 में उनके निधन के बाद पत्नी मंगला ने लिखित समझौता कर परिचित प्रकाश रानाडे को दुकान चलाने के लिए दी थी। 1980 में मंगला ने दुकान वापस मांगी, तो प्रकाश ने मना कर दिया। कोर्ट ने 30 अगस्त 1988 को मंगला के पक्ष में फैसला सुनाया।

इसे प्रकाश ने एडीजे कोर्ट में चुनौती दी। वहां 1991 में फैसला मंगला के पक्ष में आया। फिर प्रकाश बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा, तो 2009 में उसके हक में फैसला आया। इसी बीच मंगला का निधन हो गया। अब बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में केस जीता है।

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