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पुलिस को मिली सफलता:14 चोरियों को अंजाम देने वाले कच्छा बनियान गिरोह के 10 लाेग गिरफ्तार, 6 फरार, 5 राज्यों में की वारदात

सूरत9 दिन पहले
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  • गैंग के सदस्य दिन में गुब्बारे बेचते, शाम को रेकी करते और रात में तय जगह पर जाकर करते थे चोरी

सूरत क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय चोरी करने वाले कच्छा बनियान पहने वाले पारधी गैंग के 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से 4 लाख रुपए का सामान बरामद किया गया। इसके अलावा चोरी में उपयोग किए जाने वाले हथियार भी जब्त किए। छह आरोपी अभी भी फरार हैं। पिछले कई दिनों से शहर में गैंग सक्रिय था और रात के समय चोरियां की घटनाओं को अंजाम देता था। जिन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने अलग-अलग टीमें बनाकर वर्कआउट कर रही थी।

इसी बीच क्राइम ब्रांच की घरफोड़ स्क्वाड टीम को टेक्निकल तथा ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर गैंग की जानकारी मिली, गैंग सोमवार को अपने गांव के लिए रवाना होने वाला हैं। जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने कई टीमें बनाई और जिस जगह की जानकारी मिली थी वहां पर छापा मारा। पुलिस ने मोटा वराछा गांव लेक गार्डन के पास कांबिंग कर रहे थे।

तभी चड्डी बनियान गैंग के आरोपियों को सोने चांदी के गहने तथा नगदी के साथ गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए सभी आराेपियों पर शहर के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में इनके खिलाफ 14 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा इस गैंग ने गुजरात राज्य के कुल 8 शहरों के अलावा पांच राज्यों में भी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है।

ये हैं पकड़े गए आरोपी

1. नंदू कन्हैया पारधी (45) रतलाम 2. दिनेश बन्नेसिंह पारधी (42) रतलाम 3. बापू शाहूसिंह फूलमाली (60) उज्जैन 4. बल्ला कन्हैयालाल भील (55) रतलाम 5. कालू बाला बामणी (22) रतलाम 6. राजकुमार चुन्नीलाल पवार, रतलाम 7. राजू बाला सोलंकी (20) रतलाम 8. विकास बाबला सोलंकी (18) ग्वालियर 9. अर्जुन प्रेमसिंह सोलंकी (18) रतलाम 10. सिंबा दुर्गा पवार (18) रतलाम

आरोपियों से जब्त सामान | आरोपियों के पास से 1 लाख 48 हजार 498 के सोने चांदी के गहने, 36 हजार नगद, 1 लाख 48 हजार की 8 घड़ियां और 34600 के आठ मोबाइल फोन कुल मिलाकर 3.67 लाख रुपए का माल पुलिस ने बरामद किया। इसके अलावा दो पेंचकस, चार गुलेल, हैंड ड्रिल मशीन समेत कुल आठ चोरी करने के औजार जब्त किए हैं।

सूरत में 14, पांच राज्यों में भी केस

इस गैंग के खिलाफ सूरत शहर में कुल 14 मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें जहांगीरपुरा, उमरा, सरथाणा, अमरोली, सिंगनपोर में 2-2 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा कापोदरा, कतारगाम, खटोदरा और चौकबाजार पुलिस स्टेशन में 11 मामले दर्ज को हैं। इसके अलावा आरोपियों ने गुजरात में सूरत शहर के अलावा अहमदाबाद, आनंद, खेड़ा, डीसा, वलसाड, बड़ौदा और नवसारी में भी चोरियां की हैं। गुजरात राज्य के अलावा महाराष्ट्र के मुंबई, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब में भी चोरियों के मामले इस गैंग के खिलाफ दर्ज हैं।

ये मोडस ऑपरेंडी

गैंग के लोग रात को 1:30 बजे से सुबह 4:00 बजे के बीच बंगलों की खिड़की का ग्रिल तोड़कर अंदर घुसते और रसोई से खाने पीने की चीजें खा लेते थे और फिर अगर कोई व्यक्ति जाग जाए तो उस पर गुलेल से हमला करते और फरार हो जाते थे।

शहर में ऐसे और भी चोर घूम रहे
इस गैंग में छोटी उम्र से लेकर बड़े उम्र के लोग शामिल हैं। यह सभी एक ही जगह से आते हैं और सभी आपस में रिश्तेदार है इसीलिए सभी संपर्क में आए हुए थे। सूरत शहर में ऐसे और भी कई लोग हैं जो दिन में गुब्बारा बेचते है और रात में चोरी की वारदातों को अंजाम देने की योजना बनाते रहते हैं। शहर में उन्होंने काफी चोरियां कर ली थी इसीलिए अब यहां से जाने का प्लान बना रहे थे।

-ललित वागड़िया, जांच अधिकारी, क्राइम ब्रांच

चोरी के काम के लिए शाम को 4 से 5 के बीच ऑटो रिक्शा में बैठकर शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमकर खुली जगहों के पास वीआईपी बंगलों को टारगेट करते थे। इसके बाद शाम 7 बजे ऑटो से वापस आ जाते थे। जिस जगह पर आरोपियों को चोरी करना होता था, उस जगह नाम ऑटो चालक से पूछकर कागज में लिख लेते थे।

5 लोग बनाते थे चोरी का प्लान, हथियार लुंगी में बांधकर ले जाते थे

यह गैंग पिछले 4 महीने से सूरत में एक्टिव हैं। रात में चोरी और दिन में गुब्बारे बेचने का काम करते हैं। अपने गांव के आसपास के लड़कों को इकट्ठा कर और शहर के इलाकों में रेकी कर रात के दौरान चोरी करने का प्लान बनाते थे। चोरी में काम आने वाला हथियार जैसे पाना, स्क्रुड्राइवर, ड्रिल मशीन, तार कटिंग करने वाला पक्कड समेत कुल 7 औजार एक थैली में रखकर चोरी करने जाने से पहले अपनी लुंगी में बांधकर कमर पर बांध लेते थे।

नाइट कर्फ्यू लगने से पहले ही निर्धारित जगह पर पहुंच जाते थे

रेकी करने के बाद आरोपियों यह तय किए गए जगह पर एक या दो दिन बाद रात को नाइट कर्फ्यू लगने से पहले ही ऑटो रिक्शा में बैठकर घटनास्थल पर पहुंच जाते थे। उस जगह पर रात में ही रुक जाते और करीब 1:30 से 2 बजे के बीच राजकुमार, रुकेश, सचिन, कालू और देवा कैमरा में पहचान ना हो इसलिए सभी अपने कपड़े उतारकर कच्छा बनियान पहन लेते थे और कपड़ा लूंगी में बांधकर अपने कमर पर बांध लेते थे। चप्पल बनियान के पीछे डाल लेते थे।

हिस्सा बराबर बांटते | चोरी करने के बाद सचिन, देवा, गजराज चोरी के माल को थैली में भरकर बाहर ले आते और प्लान के तहत सुबह होने तक प्लान की हुई जगह पर छुप जाते थे। इसके बाद ऑटो रिक्शा में बैठकर अमरोली ब्रिज के पास आ जाते थे और चोरी किए गए पैसों व समान को आपस में बराबर बांट लेते थे।

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