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लो हो गई फीस माफी:146 स्कूल 30 करोड़ रु. माफ कर भी चुके, दूसरे स्कूलों से अपील- हम कर रहे हैं, तो आप भी करो

सूरत13 दिन पहले
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  • ऐसा पहली बार: राष्ट्रीय स्वनिर्भर शाला संचालक महासंघ अब अभिभावकों के साथ

फीस में राहत के लिए संघर्षरत अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी राहत तो खुद निजी स्कूलों से ही मिल गई है। शहर के कई स्कूल कोरोना काल के दौरान फीस माफी को तैयार हो गए हैं। यह बहुप्रतीक्षित राहत इसी महीने वजूद में आए नए संगठन राष्ट्रीय स्वनिर्भर शाला संचालक महा संघ की बदौलत मिल पाई है। संगठन ने बुधवार को ऐसे 20 स्कूलों द्वारा फीस माफी की जानकारी सार्वजनिक करते हुए कहा कि अभी तक 146 निजी स्कूलों ने करीब 30 करोड़ माफ भी कर दिए हैं।

इन स्कूलों ने 20 से 100 फीसदी तक फीस माफी का दावा किया है। यह राहत उस हालात में मिली है जब अभिभावक लंबे समय से संघर्ष कर हताश हो चुके थे, राज्य सरकार की कोशिशें भी नाकाम हो गई थीं और मामला अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है। हालांकि दूसरे संगठन स्वनिर्भर शाला संचालक मंडल के प्रवक्ता दीपक राजगुरु ने तो नए संगठन पर सवाल उठाते हुए स्कूलों से कहा है कि इनके झांसे में ना आएं।

मोनोपोली खत्म, खेमेबाजी शुरू: इसी माह वजूद में आए नए संगठन में 170 स्कूल

अब तक: शहर में अब तक स्वनिर्भर शाला संचालक मंडल सहित ज्यादातर निजी स्कूल फीस वसूली को जायज बताते हुए अड़े हुए थे। छह महीने से संघर्षरत अभिभावकों का कहना है कि अब तक राज्य सरकार कई आदेश जारी कर चुकी है और मामला हाईकोर्ट में होने के बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं मिल पाया था।

अब दो सुर: अब तक शहर में निजी स्कूलों के दो संगठन होने के बावजूद फीस लेने मुद्दे पर दो राय नहीं थी। तभी तो राज्य सरकार के निर्देश भी बेमाने साबित हो गए। हाईकोर्ट का फैसला आने तक अभिभावकों को भी राहत की उम्मीद नहीं थी, लेकिन राष्ट्रीय स्वनिर्भर शाला संचालक महासंघ ने हालात बदल गए हैं।

खेमेबाजी भी: निजी स्कूलों के बीच अब खेमेबाजी शुरू हो चुकी है। नए संगठन की तरफ से बकायदा अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा स्कूलों को अपने पाले में करने की कोशिश की जा रही है। संचालकों के साथ मीटिंग की जा रही है। नया संगठन दावा कर रहा है कि दूसरे संगठन के 10 स्कूल उनके साथ आ चुके हैं।

अभिभावक खुश: नए संगठन के इस फैसले से अभिभावकों में नई उम्मीद जग गई है। अभिभावकों का कहना है कि हमारे संघर्ष से अभी तक तो खास राहत नहीं मिल पाई। ऐसे में एक स्कूल संगठन का अभिभावकों के लिए आगे आना स्वागत योग्य है। फीस माफी की शुरुआत से उम्मीद है कि बाकी स्कूल भी फीस में राहत दे दें।

स्वनिर्भर शाला संचालक VS राष्ट्रीय स्वनिर्भर शाला संचालक

स्वनिर्भर शाला संचालक : इनके झांसे में ना आएं स्कूल

स्वनिर्भर शाला संचालक मंडल के प्रवक्ता दीपक राजगुरु का आरोप है कि नया संगठन बरसाती मेंढ़क है। बिना पूछे स्कूलों को साथ जोड़ने पर राष्ट्रीय स्वनिर्भर स्कूल महासंघ को नोटिस भी भेजा है। संगठन रजिस्टर्ड है या नहीं, इस पर भी सवाल हैं।

राष्ट्रीय स्वनिर्भर शाला संचालक : हमने जनहित में फैसला किया है

राष्ट्रीय स्वनिर्भर शाला संचालक महासंघ के प्रमुख जगदीश चावड़ा ने बताया कि स्वनिर्भर शाला संचालक मंडल अभिभावकों को परेशान कर रहा। रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही प्रोसेस में हैं। हमारे जनहित के फैसले के साथ 170 स्कूल सहर्ष आ चुके हैं।

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