ह्यूमन ट्रैफिकिंग:पश्चिम बंगाल की 18 साल की लड़की को दिल्ली में बेचा, फिर सूरत पहुंचाया

सूरतएक वर्ष पहले
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सूरत के व्यापारी के घर से लड़की को रेस्क्यू किया - Dainik Bhaskar
सूरत के व्यापारी के घर से लड़की को रेस्क्यू किया
  • सूरत के व्यापारी के घर से लड़की को रेस्क्यू किया गया

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग स्क्वाड ने पश्चिम बंगाल से अपहृत की गई 18 साल की लड़की को सूरत से रेस्क्यू कराया। दिल्ली की मिशन मुक्ति फाउंडेशन एनजीओ ने प. बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के मेटली पुलिस स्टेशन में दर्ज अपहरण के मामले में दिल्ली के चौहान ब्रदर्स प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा सूरत घोड़दौड़ रोड के मेघरथ अपार्टमेंट में पहुंचाई गई 18 वर्षीय लड़की का रेस्क्यू कराया।

17 जनवरी को जलपाईगुड़ी जिले के समसिंग टीजी की मयूरी मुंडा युवती को अपने साथ ट्रेन से दिल्ली घुमाने के बहाने ले आई। मयूरी ने 18 जनवरी को उसे दिल्ली के चौहान ब्रदर्स प्लेसमेंट एजेंसी, जिसके मालिक गोविंद और अर्जुन हैं, को बेच दिया। 21 जनवरी को उसी प्लेसमेंट एजेंसी ने लड़की को सूरत के टेक्सटाइल व्यापारी सत्यनारायण राठी के पास पहुंचा दिया।

1 फरवरी को वीरेंद्र कुमार सिंह अाैर पल्लवी घोष ने सूरत पुलिस के साथ मेघरथ अपार्टमेंट बिल्डिंग नंबर-4 के फ्लैट नंबर बी-6 से ही लड़की का रेस्क्यू कराया। प्लेसमेंट एजेंसी के मालिक गोविंद के भाई अर्जुन ने लड़की के साथ दुष्कर्म का प्रयास भी किया था।

आईडेंटिटी प्रूफ के नाम पर लड़की का आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड बनवाया था, जिसमें उसकी उम्र 21 साल लिखवाई गई थी। इसी प्लेसमेंट एजेंसी ने सूरत शहर में केवल 200 लड़कियों का प्लेसमेंट किया है। ये सभी लड़कियां झारखंड और प. बंगाल से हैं।

तोड़ दिया था सिम, वीडियो से युवती ने दी थी जानकारी

युवती ने 25 जनवरी की रात को एक वीडियो एनजीओ के डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार सिंह को भेजा था और मदद मांगी। युवती ने उसने कहा था कि उसे एक महिला ने एक कमरे में उसे बंद कर दिया है। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि युवती उन तक कैसे पहुंची। वह स्कूल ड्रॉपआउट है, हो सकता है नेट पर नंबर ढूंढ कर उसने मदद मांगी हो।

आरोपी महिला मयूरी मुंडा ने दिल्ली घुमाने के बहाने युवती से उसका मोबाइल ले लिया था। इसके बाद जैसे ही दिल्ली पहुंचे उसका सिम कार्ड तोड़ कर फेंक दिया और मोबाइल युवती को सौंप दिया। युवती को किसी का मोबाइल नंबर भी याद नहीं था जिसके बाद वह बुरी तरह चंगुल में फंस चुकी थी।

व्यापारी ने उसे 9 हजार रु. तनख्वाह पर रखा था
एनजीओ डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि युवती को सूरत में भी खरीदा ही गया है। ऐसे मामलों में करीब 40 से 50 हजार रुपए का टोकन अमाउंट दिया जाता है। युवती की तनख्वाह 9 हजार रुपए तय की गई थी जो प्लेसमेंट एजेंसी को ही जाती। इसके लिए 3 हजार रुपए सत्यनारायण राठी ने एडवांस भी चुकाए थे। आरोपी गोविंद छेत्री पिछले 3 साल से प्लेसमेंट एजेंसी चला रहा है। इससे पहले वह एक प्लेसमेंट एजेंसी में बतौर एजेंट काम करता था।

सर्विलांस के आधार पर टीम लड़की तक पहुंची
लड़की द्वारा वीडियो में जलपाईगुड़ी सुनने के बाद सुबह के एसपी से संपर्क किया गया । इसके बाद उसके माता-पिता का पता लगाकर लोकल पुलिस स्टेशन से कनेक्ट किया गया। 30 जनवरी को प. बंगाल सर्विलांस की टीम की मदद लेकर सूरत पुलिस आयुक्त के ऑफिस से संपर्क किया गया। फिर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के पुलिस इंस्पेक्टर एजे चौधरी से संपर्क किया गया। सोमवार की सुबह सूरत आकर युवती को रेस्क्यू करा लिया गया।

सर्विलांस के आधार पर टीम लड़की तक पहुंची
लड़की द्वारा वीडियो में जलपाईगुड़ी सुनने के बाद सुबह के एसपी से संपर्क किया गया । इसके बाद उसके माता-पिता का पता लगाकर लोकल पुलिस स्टेशन से कनेक्ट किया गया। 30 जनवरी को प. बंगाल सर्विलांस की टीम की मदद लेकर सूरत पुलिस आयुक्त के ऑफिस से संपर्क किया गया। फिर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के पुलिस इंस्पेक्टर एजे चौधरी से संपर्क किया गया। सोमवार की सुबह सूरत आकर युवती को रेस्क्यू करा लिया गया।

लड़की ने वीडियो में कहा- मुझे यहां टॉर्चर करते हैं
नमस्ते मेरा नाम ......
है, मैं... की रहने वाली हूं, मुझे यहां बहला-फुसलाकर लाया गया है। मैं बर्थडे में गई थी जहां एक दीदी मिली थी, उन्होंने बोला था कि हम बर्थडे में जा रहे हैं। लेकिन उन्होंने यहां गुजरात में लाकर रख दिया। मुझे यहां नहीं रहना है। उनको फोन करती हूं तो नहीं उठाती हैं। मुझे बहुत ज्यादा टॉर्चर करते हैं। इसलिए प्लीज मुझे यहां से निकाल दीजिए। मुझे कैद कर रखा है।

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