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कोरोना पीड़ित पति-पत्नी की आपबीती:नागपुर में 198 अस्पतालों ने भर्ती नहीं किया, 65 हजार रुपए देकर एंबुलेंस से सूरत पहुंचे; 10 दिन में दोनों ठीक हुए

सूरत (गुजरात)9 महीने पहलेलेखक: धीरेंद्र पाटिल
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नागपुर में कोरोना पॉजिटिव पति-पत्नी ने इलाज के लिए 198 अस्पतालों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया। मजबूरी में उन्हें 65 हजार रुपए खर्च कर एंबुलेंस से सूरत पहुंचना पड़ा। यहां के एक आइसोलेशन सेंटर में 10 दिन के इलाज के बाद वे पूरी तरह ठीक हो गए।

मूल रूप से यूपी के प्रयागराज निवासी और फिलहाल नागपुर में रहने वाले बृजेश कुमार त्रिपाठी (53) कॉन्ट्रैक्टर हैं। बृजेश और उनकी पत्नी अनुपमा (47) की दो हफ्ते पहले तबीयत खराब हो गई थी। 17 अप्रैल को दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अनुपमा का ऑक्सीजन लेवल लगातार कम हो रहा था। फेफड़ों में 60% तक कोरोना का असर था। नागपुर के किसी भी अस्पताल में दंपती को बेड नहीं दिया।

दोनों ने 198 अस्पतालों के चक्कर लगाए, पर कहीं इलाज नहीं मिला। कई अस्पताल तो फाइल देखकर ही निकाल देते थे। उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था। तो सूरत में रहने वाले बहनोई ने बृजेश से बात की। उसके बाद बहनोई ने परवत गांव में नमो कोविड आइसोलेशन सेंटर चलाने वालों में से एक दिनेश पुरोहित से बात की तो उन्होंने सूरत लाने के लिए कहा। फिर बृजेश अपनी पत्नी के साथ एंबुलेंस में ऑक्सीजन के साथ नागपुर से सूरत आए।

अनुपमा की इच्छा है कि अब दूसरे मरीजों की सेवा करें
स्वस्थ होने के बाद अनुपमा त्रिपाठी ने कहा कि अब वे इस आइसोलेशन सेंटर में दूसरे मरीजों की सेवा करना चाहती हैं। वहीं बृजेश ने बताया कि वे 13 घंटे में 750 किलोमीटर की दूरी तय कर 18 अप्रैल को सूरत आए थे। अनुपमा का ऑक्सीजन लेवल घटकर 82 पर आ गया था। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं होता तो लेवल और नीचे आ जाता। नमो आईसोलेशन सेंटर में उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन भी दिया गया।

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