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न परीक्षा न ड्राइविंग टेस्ट, फिर भी बने ड्राइवर:आरटीओ के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर निकाले 34 ड्राइविंग लाइसेंस, साइबर क्राइम ने शुरू की जांच

सूरत16 दिन पहले
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सूरत के पाल आरटीओ में इन दिनों लाइसेंस मामले को लेकर हलचल मची हुई है। इसमें अब साइबर क्राइम ने जांच शुरू कर दी है। पिछले महीने सूरत आरटीओ में लगभग 34 लाइसेंस ऐसे इश्यू हुए थे जिन्हें एजेंटों ने बिना एग्जाम और टेस्ट के इश्यू करवा लिया। इसमें एजेंटो ने शातिराना तरीके से सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कर लाइसेंस बनवा लिया। इनके पास आए आवेदकों को किसी प्रकार का टेस्ट भी नहीं देना पड़ा।

लेकिन किसी ने इसकी शिकायत राज्य के परिवहन आयुक्त के साथ ही राज्य के कैबिनेट में मंत्री पूर्णेश मोदी से भी इसकी शिकायत की। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया और इसको लेकर लंबी जांच बैठी है। लेकिन अब तक इसमें आरटीओ हुई लापरवाही उजागर नहीं हो सकी है। इसको लेकर परिवहन कमिश्नर के निर्देश पर जांच शुरू की गई है। इस मामले में अब एफआईआर करने का भी निर्देश दिया गया है, जिसके पहले प्राथमिक जांच शुरू की गई है। इसमें परिवहर विभाग की कर्मचारियों की मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।

कम्प्यूटर और ड्राइविंग टेस्ट के बाद इश्यू हाेता है लाइसेंस
इन दिनों आरटीओ में लाइसेंस के लिए तमाम प्रक्रियाएं आईटीआई कॉलेजों में पूरी की जाती हैं। इसमें कम्प्यूटर टेस्ट लेकर लोगों को लर्निंग लाइसेंस जारी किया जाता है। फिर आरटीओ में इसका लगभग डेढ़ महीने बाद ड्राइविंग टेस्ट होता है। इसके बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू किया जाता है। लेकिन इन सब नियमों को ताक पर रखकर लाइसेंस निकाल लेने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

परिवहन विभाग के कर्मियों की मिलीभगत की भी जांच
परिवहन कमिश्नर के आदेश के बाद मामले जांच आगे बढ़ी है और अब आदेश दिया गया है कि इसमें साइबर क्राइम एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच आगे बढ़ाए। इसके बाद अब सूरत शहर साइबर क्राइम हरकत में आ गई और इस मामले की जांच में लगी हुई है। इसमें यह देखा जा रहा है कि आखिर सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कैसे की गई। इसमें आरटीओ के कर्मचारियों मिलीभगत का भी पता लगाया जा रहा है।

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