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ब्लैक फंगस का कहर:386 की हो चुकी सर्जरी, 100 मरीजों के आंख-जबड़े का होगा दोबारा ऑपरेशन

सूरतएक महीने पहले
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  • जो मरीज लाइनअप हुए उनका अलग-अलग समय ऑपरेशन

ब्लैक फंगस के मामले बढ़ते जा रहे हैं आए दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं। इसी बीच एक और समस्या की खबर सामने आई है। सिविल और स्मीमेर अस्पताल में 386 मरीजों का ऑपरेशन हो चुका है। इनमें अब 100 से अधिक मरीजों का दोबारा ऑपरेशन होगा। पहली बार मरीजों के साइनस का ऑपरेशन हुआ था, जबकि दूसरी बार उसके जबड़े, दांत और आंख का ऑपरेशन होना है।

ऑपरेशन में अब या तो आंख गंवानी पड़ेगी या फिर दांत के साथ जबड़ा निकालना पड़ेगा। फिलहाल जिन मरीजों को लाइनअप किया गया है उनका अलग-अलग समय पर ऑपरेशन होगा। अब तक लगभग 30 मरीजों के जबड़े निकाले गए हैं। दाेनों अस्पतालों में अब तक 23 मरीजों की आंखें जा चुकी हैं।

अन्य मरीजों का साइनस का ऑपरेशन हुआ है। अब ऐसे मरीजों में फिर समस्या होने लगी है, इसलिए ऑपरेशन होगा। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार यह फंगस अन्य जगहों तक पहुंच जाता है, जिससे मरीज को बाद में फिर से कॉम्पलिकेशन शुरू होते हैं और फिर ऑपरेशन करना पड़ता है।

मिकोर माइकोसिस के 4 नए मामले, दो की मौत

सिविल और स्मीमेर में ब्लैक फंगस के 4 नए मामले मिले हैं। इलाज के दौरान सिविल व स्मीमेर अमें एक-एक मरीजों की मौत हो गई। अब तक सिविल में 29 और स्मीमेर में 18 मरीजों की जान जा चुकी है। शुक्रवार को सिविल में 8 मरीजों की सर्जरी की गई। दो मरीजों की सर्जरी में साइनस के साथ नाक और जबड़े के बीच की हड्डी और दांत को निकाल दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि फंगस का असर दांत तक पहुंच गया था इससे सभी दांत सड़ गए थे। इसलिए हड्डी के साथ दांत को निकाल दिया गया।

बिना इलाज के 3 हफ्ते में मरीज की हो सकती है मौत

डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के दौरान या ठीक होने के बाद भी ब्लैक फंगस के लक्षण आ जाते हैं। कई मरीजों को सर दर्द के साथ दांत में दर्द और ढीलेपन की शिकायत होती है। ऐसे में तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर 3 हफ्ते तक बमरीज बिना इलाज के रहा तो संक्रमण दिमाग तक पहुंच सकता है। मरीज की जान भी जा सकती है।

साइनस का ऑपरेशन करना पूरी तरह से इलाज नहीं है। यह इलाज का प्रथम चरण है या फिर इसे एक लक्षण भी कह सकते है। साइनस के ऑपरेशन के बाद भी ज्यादातर मरीज के कॉर्निया जबड़े और दांत तक संक्रमण फैल जाता है। इसलिए दोबारा ऑपरेशन करना पड़ता है। ब्लैक फंगस संक्रमण ब्रेन तक ना पहुंच जाय इसलिए इंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन दिया जाता है। - डॉ आनंद चौधरी, प्रोफेसर, ईएनटी विभाग, सिविल अस्पताल

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