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  • 40% Reduction In Job Work, Investigation Found Workers Going To Villages Filled In Buses Due To Rumor Of Lockdown, Most Of UP Bihar

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फिर गांव चले लोग:जॉब वर्क में 40% कमी, जांच में पाया- लॉकडाउन की अफवाह से बसों में भर गांव जा रहे श्रमिक, सबसे ज्यादा यूपी-बिहार के

सूरत5 दिन पहले
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  • कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए गांव जाने वाले कह रहे- लॉकडाउन तो लगेगा ही, इस बार दुर्दशा नहीं करानी

सूरत में लॉकडाउन की अफवाहों के बीच उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रमिक वर्ग के लोगों में डर का माहौल है। लोगों का मानना है कि आज नहीं तो कल लॉकडाउन लगने वाला है, इससे घबराए हुए हैं।1 साल पहले श्रमिक वर्ग ने जो हालत देखी है, वह इस बार नहीं झेलना चाहते। इसलिस अभी से पलायन कर रहे हैं। पलायन की अफवाह का फैक्ट चेक करने के लिए जब भास्कर की टीम पहुंची तो पता चला कि अफवाहों का डर सच है और लोग घर जा रहे हैं।

पढ़ा था कि लॉकडाउन लग सकता है: बस चालक

सूरत से बांदा के लिए जाने वाली जीजे 01 सीएक्स 9906 के बस चालक सीताराम ने बताया कि मैंने कहीं पढ़ा था कि 11 से 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लगने वाला है। बस में जितने यात्री जा रहे हैं इसमें ज्यादातर लॉकडाउन के डर से ही जा रहे हैं। वहां से अब सीधे 15 अप्रैल को ही निकलूंगा। उससे पहले सूरत नहीं आ सकता।

लॉकडाउन के डर से छोड़ रहे शहर | पांडेसरा के जय अंबे नगर के पास मिलन प्वाइंट पर दोपहर 3:30 बजे 6 लग्जरी बसें खड़ी थी। इसमें सीट टू सीट यात्री बैठे हुए थे जो बिहार और उत्तर प्रदेश जाना चाहते थे। सब लॉकडाउन के डर से शहर छोड़ रहे थे।

सौराष्ट्रवासी समेत प्रवासी मजदूरों में भय, पलायन से ट्रेवल्स की बसों में भीड़

सौराष्ट्रवासी समेत प्रवासी मजदूरों में लॉकडाउन को लेकर भय का माहौल है। सूरत से रवाना होने वाली ट्रेवल्स की बसों में भारी भीड़ है। लोग धीरे-धीरे शहर छोड़कर गांव की ओर रवाना होने लगे हैं। कोरोना मरीजों से शहर के सभी प्राइवेट अस्पताल फुल हाे गए हैं। सूरत ही नहीं पूरे प्रदेश की हालत खराब है।

हीरा श्रमिकों को हो सकती है परेशानी

हीरा श्रमिकों को लगने लगा है कि मार्केट बंद होगा। ऐसा हुआ तो हीरा श्रमिक आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। स्थिति बिगड़ने से पहले ही हीरा श्रमिक गांव जाने की तैयारी में लग गए हैं।

प्रवासी मजदूरों के घट जाने से कपड़ा मिलों में उत्पादन 40 प्रतिशत घट गया

पिछले साल लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को भारी परेशानी हुई थी। शहर में फिर कोरोना बेकाबू हो गया है। इससे मजदूरों में डर फैल गया है। पांडेसरा, भेस्तान, सायण, सचिन, कामरेज, पलसाणा, कडोदरा जैसे औद्योगिक इलाकों से मजदूर बसों में बैठकर गांव जा रहे हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

कोरोना की वजह से जॉब वर्क में 40% कम हो गया है। मजदूरों को समझा रहे हैं। लॉकडाउन के डर से मजदूर बसों में गांव जा रहे हैं। कपड़ा उद्योग को एक बार फिर करोड़ों रुपए का नुकसान होगा। -जीतू बखारिया, अध्यक्ष, SGPA

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