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तीसरी लहर की ये कैसी तैयारी?:टूटती सांसें थामने वाले 40 वेंटिलेटर 6 माह से खराब, अधीक्षक बोले- जानकारी नहीं

सूरत15 दिन पहले
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सिविल अस्पताल वेंटिलेटर ठीक करने को दो बार कर चुका शिकायत, पर कंपनियां सुन नहीं रहीं। - Dainik Bhaskar
सिविल अस्पताल वेंटिलेटर ठीक करने को दो बार कर चुका शिकायत, पर कंपनियां सुन नहीं रहीं।
  • पीएम केयर फंड से सिविल अस्पताल को मिले 40 वेंटिलेटर दूसरी लहर के पीक में भी मरीजों के काम नहीं आ सके

सरकार एक तरफ कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी के लिए दूसरी लहर से दोगुना दवाइयां दे रही है, लेकिन सिविल अस्पताल में पीएम केयर्स फंड से मिले 40 खराब वेंटिलेटर ठीक नहीं हो पा रहे हैं। इन्हें बनाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने दूसरी लहर के पीक यानी मार्च, अप्रैल, मई में ही समय-समय पर संबंधित कंपनियों को ऑनलाइन शिकायत की लेकिन अभी तक ये बने नहीं। यही नहीं केंद्र सरकार की टीम भी सिविल अस्पताल आकर इन वेंटिलेटर की रिपोर्ट लेकर जा चुकी है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

40 खराब वेंटिलेटर में 30 एग्वा, 5 डेल और 5 धमण कंपनी के हैं। डेल के एक वेंटिलेटर की कीमत लगभग 8 लाख रुपए है। इसके 5 खराब वेंटिलेटर की कीमत लगभग 40 लाख है। इसी तरह एग्वा के एक वेंटिलेटर की कीमत 1 लाख रुपए है। इसके खराब 30 वेंटिलेटर की कीमत 30 लाख है। धमण के एक वेंटिलेटर की कीमत लगभग 1.25 लाख है। इस तरह इसके खराब 5 वेंटिलेटर की कीमत 6.25 लाख रुपए है।

महाराष्ट्र में कोरोना के केस फिर बढ़ने लगे हैं। इससे तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। पीएम केयर्स फंड से मिले वेंटिलेटरों में से कुछ में प्रेशर रिलीज नहीं होने तो कुछ के हैंग करने की समस्या आने लगी थी। कई में मरीज को लगाने के बाद समस्याएं आने लगती हैं।

पीएम केयर्स फंड से सिविल अस्पताल को अब तक 510 वेंटिलेटर मिले हैं। कोरोना के पीक में सबसे ज्यादा समस्याएं एग्वा कंपनी के वेंटिलेटर में आई थीं। अभी भी ये समस्याएं बरकरार हैं। केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से सिविल अस्पताल को तीन कंपनियों के वेंटिलेटर उपलब्ध कराए थे।

एग्वा के वेंटिलेटर में सबसे ज्यादा समस्याएं, ये हैंग भी करने लगते हैं

डॉक्टरों का कहना है कि सबसे ज्यादा समस्याएं एग्वा के वेंटिलेटर में आती हैं। ये वेंटिलेटर वैसे तो ठीक-ठाक चलते हैं, लेकिन जैसे ही मरीज को लगाए जाते हैं, इनमें ऑक्सीजन प्रेशर की कमी की समस्या आने लगती है। यह नहीं इसके टेबलेट पर मॉनिटरिंग भी ठीक से नहीं होती। बीच-बीच में ये हैंग भी होने लगते हैं।

वेंटिलेटर ऐसे कि इन पर मरीज को रख 5 मिनट भी नहीं हट सकते

पीएम केयर्स फंड से मिले तीन कंपनियों के वेंटिलेटर में से एग्वा कंपनी के वेटिलेटर में सबसे ज्यादा समस्या देखने को मिली है। इस पर मरीज को रखकर 5 मिनट भी इधर-उधर नहीं जा सकते, शंका रहती है कि ये काम ही नहीं करेंगे तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

अब केंद्र के पोर्टल पर करेंगे खराब वेंटिलेटर की शिकायत

अब केंद्र सरकार ने एग्वा और डेल कंपनी के पोर्टल तैयार किए हैं। इसमें मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जिन्हें पीएम केयर्स फंड से ये वेंटिलेटर मिले हैं और खराब हुए हैं उनकी जानकारी इस पोर्टल पर दी जा रही है। इसे ऑनलाइन मॉनिटर किया जाता है। अब सिविल अस्पताल इस पर खराब वेंटिलेटर की जानकारी देगा। सिविल अस्पताल अधीक्षक के आदेश के बाद बायोमेडिकल इंजिनियर और संबंधित विभाग के एचओडी वेंटिलेटर की खामियों का पोर्टल पर जिक्र करेंगे।

स्थिति: एग्वा के 30 और डेल के 5, धमण के 5 वेंटिलेटर खराब पड़े

सिविल अस्पताल में कोरोना से पहले 42 वेंटिलेटर थे इसमें से 8 से 10 वेंटिलेटर खराब रहते थे। उसके बाद कोरोना काल में आए दिन वेंटिलेटर की जरूरत बढ़ने लगी। वेंटिलेटर की जरूरत को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पीएम केयर्स फंड से तीन कंपनियों के वेंटिलटर सिविल अस्पताल को दिए गए।

इनमें डेल कंपनी के करीब 400 वेंटिलेटर, एग्वा कंपनी के करीब 80 वेंटिलेटर और धमण के 30 वेंटिलेटर आए। अभी डेल के करीब 5 वेंटिलेटर खराब हैं। इसकी जानकारी संबंधित कंपनी को उसी समय दे दी गई थी। एग्वा कंपनी के 30 वेंटिलेटर खराब हैं। इसकी भी जानकारी कंपनी को दे दी गई थी, लेकिन इन्हें ठीक नहीं किया गया। केंद्र सरकार की टीम दो महीने पहले इन वेंटिलेटर को देखने आई थी। इनमें क्या समस्या इसकी रिपोर्ट भी टीम बनाकर अपने साथ ले गई, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सभी वेंटिलेटर चालू करके देखेंगे, उसके बाद शिकायत करेेंगे
मुझे तो अभी खराब वेंटिलेटर के बारे में खास जानकारी नहीं है। फिलहाल सभी वेंटिलेटर को चालू करके देखेंगे। इनमें से जितने खराब होंगे उन्हें ठीक करने के लिए शिकायत करेंगे।
-डॉ. गणेश गोवेकर, अधीक्षक, सिविल अस्पताल

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