सूरत का फूल रहा दम:सिविल में 50% बेड खाली, पर ऑक्सीजन की कमी से मरीज भर्ती करना बंद

सूरत6 महीने पहले
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बुधवार को सिविल अस्पताल के गेट बंद कर दिए गए। इससे गेट के सामने एंबुलेंस की लाइन लग गई। मरीज परेशान हुए। - Dainik Bhaskar
बुधवार को सिविल अस्पताल के गेट बंद कर दिए गए। इससे गेट के सामने एंबुलेंस की लाइन लग गई। मरीज परेशान हुए।

शहर के मरीजों का अब भगवान ही मालिक है क्योंकि अब सिविल अस्पताल के गेट मरीजों के लिए बंद हो गए हैं। इससे पहले स्मीमेर ने मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया था। निजी अस्पताल तो दो-तीन दिन पहले से एडमिशन बंद कर चुके हैं। सिविल में 50% बेड खाली हैं, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से अब मरीज नहीं ले रहे हैं।

सिविल के प्रबंधन का कहना है कि सरकार को तीन दिन से ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने के लिए पत्र लिख रहे हैं। मंगलवार को सरकार ने सर्कुलर जारी कर स्पष्ट कह दिया कि रोज 46 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिलेगी।

200 मरीजों को आइसोलेशन सेंटरों पर भेजा

बुधवार को सिविल अस्पताल के गेट बंद कर दिए गए। इससे मरीजों को लेकर पहुंची 108 एंबुलेंस की कतार लग गई। बाद में मरीजों को लेकर एंबुलेंस आईसोलेशन सेंटर चली गईं। शहर के आईसोलेशन सेंटर भी आगामी 4 से 5 दिनों में फुल हो जाएंगे। शहर में 25 से 30 आइसोलेशन सेंटर चल रहे हैं।

यहां ऑक्सीजन के साथ इलाज किया जा रहा है। 108 सर्विस सूरत के मैनेजर फैज पठान ने बताया कि मंगलवार से स्मीमेर और बुधवार से सिविल अस्पताल ने 108 के मरीजों को एडमिट करने से मना कर दिया और गेट बंद कर दिए। अब हम मरीजों को आइसोलेशन सेंटर ले जा रहे हैं। रोज लगभग 200 मरीज आइसोलेशन सेंटर ले जा रहे हैं।

बुधवार को सिविल अस्पताल के गेट बंद कर दिए गए। इससे मरीजों को लेकर पहुंची 108 एंबुलेंस की कतार लग गई। बाद में मरीजों को लेकर एंबुलेंस आईसोलेशन सेंटर चली गईं। शहर के आईसोलेशन सेंटर भी आगामी 4 से 5 दिनों में फुल हो जाएंगे। शहर में 25 से 30 आइसोलेशन सेंटर चल रहे हैं।

यहां ऑक्सीजन के साथ इलाज किया जा रहा है। 108 सर्विस सूरत के मैनेजर फैज पठान ने बताया कि मंगलवार से स्मीमेर और बुधवार से सिविल अस्पताल ने 108 के मरीजों को एडमिट करने से मना कर दिया और गेट बंद कर दिए। अब हम मरीजों को आइसोलेशन सेंटर ले जा रहे हैं। रोज लगभग 200 मरीज अाइसोलेशन सेंटर ले जा रहे हैं।

अभी 55-56 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत

सिविल में पहले रोज 60-65 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत होती थी। यह 1700 से 1800 मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त थी। सरकार द्वारा 10% की कटौती करने के बाद अब रोज मात्र 46 मीट्रिक टन ही ऑक्सीजन मिल पा रही है।

सिविल अस्पताल में 2250 बेड की क्षमता है। इस समय 1000 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इनमें 360 मरीज आईसीयू में और अन्य ऑक्सीजन पर हैं। करीब 150 मरीज संदिग्ध हालत में हैं। जितने मरीज अभी भर्ती हैं उनके लिए 55-56 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है।

हमने सरकार को जानकारी दी थी फिर भी कटाैती कर दी

पिछले तीन दिन से ऑक्सीजन की समस्या है। हमने सरकार को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन उन्होंने मंगलवार को लिखित में कह दिया कि अभी रोज 46 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिलेगी। सिविल में जो भर्ती मरीज हैं उन्हें ही 50 से 55 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। नए आने वाले मरीजों के लिए अल्टरनेट व्यवस्था की गई है। उन्हें आइसोलेशन सेंटर और निजी अस्पताल भेजा जा रहा है।
-मिलिंद तोरावडे, कोरोना नोडल ऑफिसर, सिविल

ऑक्सीजन देने वाली कंपनी ने महाराष्ट्र में शुरू कर दी सप्लाई

सिविल अस्पताल में भर्ती ज्यादातर मरीज 15 लीटर से 30 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन वाले हैं, इसलिए खपत तेजी से हो रही है। आमतौर पर आधा लीटर से 4 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट वाले मरीज स्टेबल होते हैं। नोडल ऑफिसर आईएस मिलिंद तोरावडे ने बताया कि लिंडे कंपनी साउथ गुजरत के सूरत, तापी, वलसाड, व्यारा, नवसारी आदि जिलों के निजी अस्पतालों को 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने का ऑर्डर लिया था।

अभी महाराष्ट्र के मरीज भी सूरत आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को वहीं इलाज मिले इसलिए कंपनी ने 50 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई महाराष्ट्र में शुरू कर दी। इससे यहां 50 मीट्रिक टन की कटौती हो गई। यह कंपनी महाराष्ट्र की ही है।

सरकारी अस्पतालों में मत भेजो: थेन्नारसन

कोविड 19 के एक्शन कमेटी के अधिकारी एम थेन्नारस ने बुधवार को मनपा कमिश्नर और अन्य कई अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में कहा कि निजी अस्पताल के मरीजों को सरकारी अस्पताल में न भेजें। उनका इलाज निजी अस्पतालों में ही मनपा के कोटे से करवाया जाए।

निजी अस्पतालों में जगह नहीं: चोरडिया

निजी अस्पताल एसोसिएशन के सदस्य और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के एक्शन कमेटी के सदस्य निर्मल चोरडिया ने कहा कि निजी अस्पतालों में तो पहले ही जगह नहीं है। ऑक्सीजन कहीं से मिल नहीं रहा है, इसलिए हम बाहर के मरीजों को लेना पहले ही बंद कर चुके हैं।

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