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हाईकोर्ट के निर्णय के बाद फीस वसूली शुरू:5000 अभिभावकों ने बच्चों को पढ़ाने से मना कर दिया, अब स्कूलों से नाम भी कटवा रहे हैं

सूरत6 महीने पहले
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  • नाराज संगठन गांव जा चुके अभिभावकों से भी ले रहे नहीं पढ़ाने की राय
  • अभिभावक बोले- इस साल की पढ़ाई तो गई, अब अगले साल दिलाएंगे प्रवेश

राज्य सरकार ने 31 अगस्त तक स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है। इससे शहर के पांडेसरा, डिंडोली, लिंबायत, उधना और भेस्तान जैसे क्षेत्रों के 5000 से ज्यादा अभिभावकों ने अपने बच्चों को पढ़ाने से ही इनकार कर दिया। इन अभिभावकों का कहना है कि वे अब अपने बच्चों का प्रवेश अगले साल कराएंगे।

गुजरात हाईकोर्ट के फीस लेने के निर्णय के बाद ये अभिभावक और परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर इस साल पढ़ाई जारी रखते हैं तो पूरे साल की फीस देनी पड़ेगी। कोरोना महामारी में काम-धंधा ठप पड़ा है। खाने के लाले पड़ रहे हैं तो बच्चों की फीस कैसे भर पाएंगे। उनका यह भी कहना है कि पढ़ाई तो हुई नहीं फिर फीस क्यों भरें। कई लोगों ने ऑनलाइन पढ़ाई भी बंद करवा दी है।

राज्य सरकार और स्कूलों के बीच चल रही फीस की लड़ाई का फैसला स्कूलों के पक्ष में चले जाने पर भी अभिभावक नाराज हैं। पिछले 5 महीने से स्कूल बंद हैं, अभी और कितने दिन बंद रहेंगे इस पर भी असमंजस है। सरकार ने पहले कहा था कि 15 अगस्त को स्कूल खुलेंगे, फिर बाद में कहा कि 31 अगस्त तक बंद रहेंगे।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की 6 महीने की पढ़ाई तो खराब हो चुकी है। ऑनलाइन एजुकेशन से भी बच्चों को कोई फायदा नहीं हुआ। पांच हजार अभिभावकों ने इस वर्ष बच्चों को स्कूल से निकालने का निर्णय लिया है।

अभिभावकों ने स्कूलों को नहीं पढ़ाने का अपना फैसला बताया
अभिभावकों ने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई तो हो नहीं रही है। सरकार भी कह रही है कि ऑनलाइन पढ़ाई वास्तविक शिक्षा नहीं है, इसलिए इसे आगे चलाना ठीक नहीं है। अब स्कूल कब खुलेंगे यह भी नहीं पता, लेकिन फीस मांगी जा रही है। अभिभावक सर्वेश सिंह ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग अभिभावक ग्रुप बनाकर इस वर्ष पढ़ाई नहीं कराने का निर्णय लिया है। अभिभावकों ने अपने बच्चों के स्कूलों को भी इस बारे में बता दिया है।

इस साल अब बच्चों को पढ़ाने का कोई फायदा नहीं मिलेगा
शहर में जो अभिभावक रह रहे हैं उन्हें स्कूलों की तत्कालीन परिस्थिति पता है, इसलिए जो अभिभावक गांव चले गए हैं उन्हें हालात के बारे में बताकर उनकी सहमति ली जा रही है। उनसे कहा जा रहा है कि इस वर्ष बच्चों को पढ़ाने का कोई फायदा नहीं है। पढ़ाने पर पूरे साल की फीस देनी पड़ेगी, लेकिन बच्चे को कोई फायदा नहीं होने वाला है। इन सबके बारे में बताकर गांव जा चुके अभिभावकों से सहमति मांगी जा रही है।

जिन्हें सच में दिक्कत है, उन्हें मदद करेंगे: स्कूल संगठन

गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्कूलों को राहत मिली है। शनिवार से फीस के लिए अभिभावकों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है। इसमें ऑनलाइन एजुकेशन करवाने और बकाया फीस को जमा करने के लिए मांग की जा रही है। निजी स्कूल के संगठन के प्रवक्ता दीपक राजगुरु ने बताया कि अभिभावकों की समस्या के बारे में स्कूलों को पता है। जिन अभिभावकों को सच में दिक्कत है स्कूल उनकी मदद कर सकते हैं।

अभिभावकों को समझा रहे हैं अब स्कूल संगठन

पांडेसरा, लिंबायत, डिंडोली, उधना और भेस्तान सहित कई क्षेत्रों के स्कूल संगठन के मुताबिक अभिभावकों का कहना है कि उन्हें बच्चों को नहीं पढ़ाना है। फीस भी देने के लिए पैसे नहीं हैं। पिछले कई महीने की फीस बाकी है। अगर उन्होंने फीस नहीं भरी तो स्कूल चलाना मुश्किल हो जाएगा, इसलिए अभिभावकों को समझाया जा रहा है।

गांव गए अभिभावक इस वर्ष बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे

अभिभावकों से बात करने पर पता चला कि 5000 से ज्यादा अभिभावक इस वर्ष अपने बच्चों को स्कूल में नहीं पढ़ाएंगे। वे 1 वर्ष की पढ़ाई का नुकसान सहने के लिए तैयार हैं। स्कूल जो फीस मांग रहे हैं, उसे अभिभावक भर पाने में सक्षम नहीं हैं। गांव से आने के बाद फीस भरना अभिभावकों के लिए संभव भी नहीं है।

ऑनलाइन पढ़ाई को राज्य सरकार ही शिक्षा नहीं मान रही

राज्य सरकार ने कह दिया गया है कि ऑनलाइन एजुकेशन वास्तविक शिक्षा नहीं है, इसलिए अब अभिभावक खुद ही ऑनलाइन एजुकेशन का बहिष्कार कर रहे हैं। अभिभावकों के मुताबिक 9 दिनों में स्कूल संचालक फिर से फीस लेने का निर्णय हाईकोर्ट से लेकर आए। अगर राज्य सरकार चाहती तो इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती थी, लेकिन अभिभावकों को गुमराह किया। स्कूलों ने फीस वसूली शुरू कर दी है।

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