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सूरत में बढ़ता संक्रमण:कोविड हॉस्पिटल में एक दिन में 62 मौतें लेकिन कोरोना के खाते में सिर्फ 12

सूरत2 दिन पहले
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  • मरीजों को समय पर नहीं मिल रहा इलाज
  • मरीज को घर से वार्ड तक पहुंचने में लग रहे 10 घंटे, यही समय साबित हो रहा जानलेवा

सिविल अस्पताल में मरीजों की हालत बदतर होती जा रही है। रोज दोगुना मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों की बड़ी संख्या में मौत हो रही है। सिविल अस्पताल में पिछले 24 घंटे में 62 मरीजों की मौत हुई। इनमें से 12 माैतें ही कोरोना के खाते में दर्ज हैं। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि घर से वार्ड तक पहुंचने में जो लंबा समय लग रहा है वह मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

ऐसी पांच बाधाएं हैं, जिनमें समय खर्च हो रहा है। इन कारणों में मरीजों की लापरवाही, एंबुलेंस का इंतजार, समय पर स्ट्रेचर न मिल पाना, ओपीडी में दो घंटे का इंतजार, कोरोना टेस्ट कराने के लिए दो घंटे का इंतजार और उसके बाद वार्ड तक जाने के लिए लिफ्ट में वेंटिंग होना शामिल हैं। इतनी जटिल प्रक्रियाअों में मरीज के साथ परिजनों भी बेहाल हो रहे हैं। पहले बुजुर्ग और कोमाॅर्बिड मरीजों की ही मौत होती थी, अब कम उम्र के साथ स्टेबल मरीज भी अस्पताल में दम तोड़ रहे हैं।

सुबह 8 बजे पानी मांगा, दोपहर 2 बजे मिला

कोविड अस्पताल में भर्ती एक मरीज गुरुवार सुबह 8 बजे से पानी मांग रहा था, लेकिन उसे दोपहर में 2 बजे पानी मिला। अश्विनी कुमार रोड पर मोदी मोहल्ले में रहने वाले जीतूभाई सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। बुधवार को रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। शाम 7 बजे कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। जीतूभाई ने बताया कि बुधवार रात में उन्हें खाना भी नहीं दिया गया। 6 घंटे तक पानी न मिलने से मरीज परेशान हो गए थे।

माैत से जंग में जीवन के लिए इंतजार पर इंतजार...

1. अस्पताल जाने में देरी करना

डॉक्टरों की मानें तो जो मरीज आ रहे हैं वे सभी ऑक्सीजन वाले हैं। इससे पहले वे घर पर ही ठीक होने का इंतजार कर रहे थे। हर तीन मिनट में एक गंभीर मरीज आ रहे हैं। सभी ऑक्सीजन सपोर्ट पर आते हैं। यानी घर पर ही इधर-उधर की दवाई लेकर पड़े रहते हैं। अचानक ऑक्सीजन की कमी होने पर उनकी हालत नाजुक हो जाती है।

2. एक घंटे बाद मिलता है स्ट्रेचर

अस्पताल के बाहर मरीज एंबुलेंस में ही एक से डेढ़ घंटे पड़े रहते हैं, क्योंकि जब तक ऑक्सीजन सपोर्ट वाला स्ट्रेचर नहीं आता तब तक वे अंदर नहीं जा सकते। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण अाॅक्सीजन सपोर्ट वाला स्ट्रेचर भी एक घंटे से पहले नहीं मिलता। ऐसे में गंभीर हालत में मरीजों को एंबुलेंस में ही इंतजार करना पड़ता है।

3. टेस्ट कराने में लगते हैं दो घंटे

कोविड अस्पताल की ओपीडी से कोरोना जांच कराने के लिए भी दो घंटे तक मरीज को इंतजार करना पड़ता है। कई मरीजों का रैपिड तो कुछ का आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए सैंपल लिया जाता है। रैपिड की रिपोर्ट 10 मिनट में मिल जाती है, जबकि आरटीपीसीआर की एक या दो दिन बाद मिलती है। तब तक मरीज की हालत और नाजुक हो जाती है।

4. एक घंटे एंबुलेंस का इंतजार

शरीर में ऑक्सीजन लेवल 94% से कम होने पर मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है। जो मरीज आ रहे हैं उनका ऑक्सीजन लेवल 40% तक कम मिल रहा है। वहीं परिजनों का कहना है कि अस्पताल लाने के लिए हम एंबुलेंस को फोन करते हैं लेकिन उसे आने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। जबकि एक-एक मिनट महत्वपूर्ण है।

5. दो घंटे बाद देखते हैं डाॅक्टर

मरीजों को अस्पताल की ओपीडी में दो घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस बीच उसे ऑक्सीजन सपोर्ट वाले स्ट्रेचर पर रहना होता है। करीब दो घंटे बाद डॉक्टर उसे देखने पहुंचते हैं। तब तक उसकी हालत और नाजुक हो जा चुकी होती है। डॉक्टर प्राथमिक जांच के बाद मरीज को कोरोना जांच के लिए या फिर वार्ड में रेफर कर देते हैं।

6. दो घंटे वार्ड की लिफ्ट का इंतजार

कोरोना की जांच के बाद मरीज को वार्ड में भेजा जाता है। कोरोना वार्ड तक जाने के लिए दो ही लिफ्ट हंै, जो अक्सर फुल रहती हैं। लिफ्ट के लिए मरीजों की संख्या अधिक होने से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। दोनों लिफ्ट के बाहर करीब 30 से 50 मरीजों की लंबी लाइन रहती है। इन दो घंटे में मरीजों की और हालत बेहद नाजुक हो जाती है।

30-40 मरीज पर एक डाॅक्टर, यहां भी इंतजार

नाजुक हालत में मरीज को आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है। जिस आईसीयू में महज 10 मरीज होने चाहिए वहां 30 से 40 भर्ती किए जा रहे हैं। मरीजों को देखने के लिए एक कोर टीम का डॉक्टर और एक नॉन क्लिनिकल डॉक्टर और दो नर्स ही होती हैं।

नाम न छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने बताया कि अगर आईसीयू में 10 मरीज रहते हैं तो उनमें से रोज एक दो मर ही जाते हैं। अब 30 या 40 मरीज हैं तो स्थिति समझ सकते हैं। ऑक्सीजन सप्लाई में कमी, समय से दवा न मिलना, जैसे कारण जानलेवा बन रहे हैं।

एंबुलेंस में बैठे मरीज स्ट्रेचर के इंतजार में
एंबुलेंस में बैठे मरीज स्ट्रेचर के इंतजार में
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