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आपदा को अवसर में कैसे बदलेंगे मोदी:कोरोना की वजह से पीएम मोदी पहली बार सवालों के घेरे में; इससे पहले हर चुनौती को देते रहे हैं मात

अहमदाबाद4 महीने पहलेलेखक: मयंक व्यास
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नरेंद्र मोदी ने बुधवार को प्रधानमंत्री के रूप में 7 साल पूरे कर लिए। ये 7 साल उनके लिए रोलर-कोस्टर राइड की तरह रहे। लेकिन, इस अरसे में पहली बार मोदी की छवि पर सवाल उठ रहा है। वजह है कोरोना की दूसरी लहर का बद से बदतर हो जाना। इससे पहले भी चुनौतियां आईं और मोदी ने इन्हें मात दी। लेकिन, इस बार आपदा बड़ी हो गई है। जानिए, मोदी ने किस तरह अपने जीवन की बड़ी चुनौतियों को मात दी और इस आपदा को वे कैसे अवसर में बदल सकते हैं...

2002- गुजरात दंगे
मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी को गुजरात में एक साल ही बीता था। 2002 में उनके सामने गुजरात दंगों की चुनौती आ गई। पूरा गुजरात सांप्रदायिक दंगों की चपेट में आ गया। तब प्रधानमंत्री पद पर अटल बिहारी वाजपेयी थे। दंगों के बाद वे गुजरात पहुंचे और सार्वजनिक मंच से मोदी को राजधर्म निभाने का पाठ पढ़ाया। मोदी बैकफुट पर तब भी नहीं गए थे। उन्होंने कि काम किया जा रहा है। दंगों के बाद मोदी की छवि और गुजरात में उनकी वापसी पर सवाल उठे, पर ध्रुवीकरण का मास्टर कार्ड चल गया। हिंदू-मुस्लिम वोट बंट गए और मोदी ने अगला चुनाव दो-तिहाई बहुमत के साथ जीता।

2005- US वीजा क्राइसिस
मोदी 2005 में अमेरिका में रहने वाले गुजरातियों के कार्यक्रम में शिरकत करना चाहते थे। अमेरिकी सरकार गोधरा कांड से वाकिफ थी। मानवाधिकार उल्लंघन का हवाला देकर अमेरिका ने मोदी को वीजा देने से इनकार कर दिया। मोदी ने शिरकत की, लेकिन वर्चुअली। गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने अमेरिका में गुजरातियों की जनसभा को संबोधित किया। 2014 में जब प्रधानमंत्री बने तो अमेरिका की 3 दिनों की यात्रा पर गए। ये ऐतिहासिक यात्रा थी, जहां मोदी के समारोह में भीड़ भी ऐतिहासिक दिखी। उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत भी हुआ।

2007- सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर
ये वो साल था, जब मोदी सरकार फेक एनकाउंटर को लेकर विपक्ष के निशाने पर आई। सोहराबुद्दीन, तुलसीराम, इशरत जहां एनकाउंटर की सीबीआई जांच हुई। तब गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह इस केस में अरेस्ट हुए। गिरफ्तारी के साथ ही मोदी और शाह की इमेज पर सवाल उठे। ये भी माना गया कि मोदी भी चपेट में आएंगे। लेकिन, मोदी ने खुद को इससे दूर बनाए रखा। 2015 में अमित शाह को सीबीआई की अदालत ने बरी कर दिया। तब भाजपा केंद्र की सत्ता में आ चुकी थी और मोदी प्रधानमंत्री थे।

2020- किसान आंदोलन
नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर लाखों किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। कानून वापसी की मांग को लेकर डटे रहे। दिल्ली में 26 जनवरी पर हिंसक घटनाएं भी हुईं। लेकिन, मोदी सरकार ने बातचीत से हल निकालने पर ही जोर दिया। जनता में ये संदेश दिया कि कानून किसानों के हित में ही हैं और अगर किसानों को कुछ आपत्ति है तो बदलाव के लिए सरकार तैयार है, पर कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। इस बीच कोरोना आया और देश में महामारी ने भयंकर रूप ले लिया। किसानों का आंदोलन भी ठंडा पड़ा। पर, वो वापस बॉर्डर पर जोरशोर से आंदोलन के लिए तैयारी कर रहे हैं।

2021- बंगाल की हार और कोरोना की मार
बंगाल समेत 5 राज्यों में विधानसभा हुए। भाजपा का पूरा फोकस बंगाल पर रहा। सभी स्टार प्रचारक पहुंचे और मोदी भी गए। रैलियां हुईं और भीड़ भी जुटी। पर ममता को भाजपा रोक नहीं पाई। मोदी-शाह की जोड़ी को पहली चोट यहीं लग गई। इसके बाद कोरोना की दूसरी लहर तेज हुई। तब रैलियों पर भी सवाल उठा और मोदी के कोरोना मैनेजमेंट पर भी। पीएम रहते हुए सात साल में पहली बार मोदी सवालों के घेरे में आए। साथी भी उल्टे बोल बोलने लगे। यानी सुब्रमण्यम स्वामी, जितेंद्र माझी और अनुपम खेर जैसे लोगों ने भी खिलाफ बयान दिए।

अब कैसे निपटेंगे मोदी?
अब तक की चुनौतियों में मोदी की नब्ज पकड़ने की क्षमता और तीक्ष्ण सियासी समझ तो काम आई ही है, इसके अलावा क्राइसिस मैनेजर के तौर पर अमित शाह का रोल भी इम्पॉर्टेंट रहा है। मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर हैं और शाह गृह मंत्री के पद पर।

  • बंगाल चुनावों का असर अगले साल होने वाले यूपी के चुनाव पर न पड़े, इसके लिए भाजपा और संघ दोनों ने मिलकर प्लान शुरू कर दिया है। यूपी में आने वाले वक्त में सरकार के स्तर पर बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं।
  • यूपी में सरकारी स्तर पर बदलाव के साथ-साथ कोरोना मैनेजमेंट को लेकर भी संगठन और पार्टी दोनों सचेत हैं। मोदी के कार्यकाल के 7 साल पूरे होने पर जश्न नहीं मनाया गया। पार्टी और कार्यकर्ताओं को कहा गया कि फोकस अस्पतालों में दवा, बिस्तर, ऑक्सीजन और मरीजों की मदद पर रखेें।
  • केंद्र ने सभी राज्यों के अधिकारियों को कोरोना के प्रति संभलकर बयान देने और केंद्र के द्वारा दी गई जानकारियों को जनता के बीच ले जाने के निर्देश दिए गए हैं।
  • पार्टी स्तर पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और दूसरे नेता भी चिट्ठियों के जरिए संदेश दे रहे हैं कि विपक्षी दल भ्रम और झूठ फैला रहे हैं। कोरोना के दौरान मोदी सरकार अपना रोल सही तरह से निभा रही है।
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