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कोरोना ने किया बेरोजगार:शिक्षक-ड्राइवर सहित 7000 लोग बेरोजगार, स्कूल कह रहे- मास प्रमोशन ने बढ़ाई मुश्किल; फीस ही नहीं मिल रही तो वेतन कहां से दें

सूरत3 महीने पहले
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सरकार ने मास प्रमोशन का निर्णय लिया तो अभिभावक निश्चिंत हो गए और स्कूल से संपर्क ही तोड़ दिया। - Dainik Bhaskar
सरकार ने मास प्रमोशन का निर्णय लिया तो अभिभावक निश्चिंत हो गए और स्कूल से संपर्क ही तोड़ दिया।
  • स्कूल कह रहे- अभिभावक फीस नहीं दे रहे, वे घर पर भी नहीं मिल रहे, संपर्क भी नहीं हो पा रहा था

कोरोना की वजह से शहर के स्कूल बंद हैं। बहुत से अभिभावक भी बच्चों को लेकर गांव चले गए हैं। ऐसे में शिक्षक, बस ड्राइवर, सफाई कर्मचारी, प्यून सहित 7000 लोग बेरोजगार हो गए हैं। इनमें 4000 शिक्षक हैं। स्कूलों को कहना है कि फीस ही नहीं मिल रही तो वेतन कहां से देंगे।

स्कूल संचालक फीस वसूलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बहुत से अभिभावक बच्चों को लेकर गांव चले गए हैं। अब उनका पता ही नहीं चल रहा है। फिर भी अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। सरकार ने मास प्रमोशन का निर्णय लिया तो अभिभावक निश्चिंत हो गए और स्कूल से संपर्क ही तोड़ दिया। कई अभिभावकों ने फरवरी से ही संपर्क में नहीं हैं।

फीस नहीं मिली, शिक्षकों को निकालना ही विकल्प

स्कूल संचालकों को कहना है कि स्कूल पिछले 1 साल से बंद हैं। इससे हालत काफी खराब हो चुकी है। पहले ही आधे शिक्षकों से काम चलाया जा रहा था। अब स्कूल कब शुरू होंगे किसी को नहीं पता। अब तक वराछा, कतारगाम, वेड रोड, पूना, डिंडोली, लिंबायत, पर्वत पाटिया, सचिन, भेस्तान और पांडेसरा सहित कई क्षेत्रों के स्कूलों से लगभग 4000 शिक्षकों को निकाल दिया गया है। स्कूल संचालक यामिनी उपाध्याय के मुताबिक निकाले गए शिक्षकों का आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है।

घर पर अभिभावक मिल ही नहीं रहे हैं

पांडेसरा में स्कूल चलाने वाली यामिनी उपाध्याय ने बताया कि फीस के लिए और ऑनलाइन एजुकेशन के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उनसे बात नहीं हो पा रही है। उनके घर जा रहे हैं तो वे मिल ही नहीं रहे हैं। हमारे स्कूल में 800 बच्चों में से 200 ने फीस भरी है। 600 से संपर्क ही नहीं हो पा रहा है।

फीस न मिलने से स्कूलों की हालत खराब

  • 4000 शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं। इनमें से अधिकतर छोटे स्कूलों के शिक्षक हैं। स्कूलों की हालत काफी खराब हो गई है। दूसरी तरफ मास प्रमोशन देने के निर्णय के बाद मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इससे स्टाफ को भी निकालना पड़ रहा है। - जगदीश चावड़ा, प्रमुख, राष्ट्रीय स्वनिर्भर स्कूल संचालक महासंघ

2000 ड्राइवर-कंडक्टर, सफाईकर्मी हटाए

  • शहर के स्कूलों में काफी लंबे समय से ट्रांसपोर्टेशन सेवा बंद है। स्कूल कब खुलेंगे कुछ नहीं कह सकते। अब तक 2000 से ज्यादा बस ड्राइवर-कंडक्टर और सफाई कर्मचारियों को काम से हटाया जा चुका है। - दीपक राजगुरु, प्रमुख, निजी स्कूल संचालक मंडल
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