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सिविल का इलाज कौन करे:जहां इलेक्ट्रिक बोर्ड ही नहीं वहां भी लगा दिए 8 वेंटिलेटर व 40 ऑक्सीमीटर

सूरत18 दिन पहले
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एनएमसी की टीम के औचक निरीक्षण की संभावना से सिविल अस्पताल के ट्राेमा सेंटर के कैजुअलिटी वार्ड में सिर्फ दिखाने के लिए व्यवस्था चकाचक कर दी गई है। - Dainik Bhaskar
एनएमसी की टीम के औचक निरीक्षण की संभावना से सिविल अस्पताल के ट्राेमा सेंटर के कैजुअलिटी वार्ड में सिर्फ दिखाने के लिए व्यवस्था चकाचक कर दी गई है।
  • एनएमसी की टीम को दिखाने को उपकरण तो लगाए, पर उनका इलाज में इस्तेमाल नहीं कर रहे
  • एनएमसी की टीम के आने के पहले अन्य वार्डों में भी ऐसी ही तैयारी की योजना

आम दिनों में अस्त-व्यस्त दिखने वाला सिविल अस्पताल का ट्राेमा सेंटर का कैजुअल्टी वार्ड इन दिनों चकाचक नजर आ रहा। यहां सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं, लेकिन इसका फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा है। यह दिखावा नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के औचक निरीक्षण को देखते हुए किया गया है।

एनएमसी की टीम सिविल का निरीक्षण करने आने वाली है। दिखावे के चक्कर में सिविल प्रबंधन ने वहां भी वेंटिलेटर लगा दिए हैं, जहां इलेक्ट्रिक बोर्ड ही नहीं हैं। पहले कैजुअलिटी वार्ड में एक ही वेंटिलेटर होता था, लेकिन अब 8 लगा दिए गए हैं। इसी तरह सभी 40 बेडों पर डिजिटल ऑक्सीमीटर लग गए हैं, जबकि पहले एक भी नहीं था।

यहां पहले कभी इंफ्यूजन पंप नहीं लगा, लेकिन अब 7 लगा दिए गए हैं। इसके अलावा एक डिजिटल x-ray मशीन भी रखी गई है। पर्याप्त दवाइयों का भी इंतजाम कर दिया गया है। सभी बेड़ों के बीच मरीज अपने सामान रख सकें ऐसा एक बॉक्स लगा दिया गया है। तितर-बितर हुए बेडों को व्यवस्थित कर दिया गया है। पिछले कुछ दिनों से कैजुअल्टी में लगातार संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं। अन्य वार्डों में भी इसी तरह के दिखावे की तैयारी की जा रही है।

सिविल के ट्राेमा सेंटर की स्थिति

  • पहले 01 वेंटिलेटर 00 डिजिटल ऑक्सीमीटर 00 इंफ्यूजन पंप 01 पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे (बंद)
  • अब - 08 वेंटिलेटर 40 डिजिटल ऑक्सीमीटर 07 इंफ्यूजन पंप 01 पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे (बंद)पहले

निरीक्षण में यह होगा- अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर, संसाधन, शिक्षक और मरीजों की स्थिति देखेगी टीम

सूत्रों के अनुसार एनएमसी की टीम कभी भी सिविल अस्पताल का दौरा कर सकती है। उसी को दिखाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ये तैयारियां कर रहा है। एनएमसी की टीम के सदस्यों को भी यह पता नहीं होता है कि उन्हें कब कौन से शहर में किस मेडिकल कॉलेज में निरीक्षण के लिए जाना है।

जाने के 1 दिन पहले ही संबंधित शहर का नाम और टिकट भेज दिया जाता है। यह टीम दौरे में देखेगी की अस्पताल के पास संसाधन से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक और मरीजों की क्या स्थिति है। इसी के आधार पर वह एमबीबीएस और एमडीएमएस की सीटों को कंटिन्यू रखेगी।

पहले जैसा ही इलाज- एक ही वेंटिलेटर चल रहा है, इंफ्यूजन पंप रखे, पर इस्तेमाल आईबी स्टैंड का ही हो रहा

ट्राेमा के कैजुअलिटी वार्ड में बढ़ाई गई सुविधाएं सिर्फ दिखावे के लिए हैं, इनका फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा है। गंभीर मरीजों का इलाज अभी भी डॉक्टर वैसे ही कर रहे हैं, जैसे पहले करते आए हैं। पीएम केयर्स फंड से मिले एग्वा कंपनी के पांच सहित 8 वेंटिलेटर एक्स्ट्रा रख दिए गए हैं। इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

पहले से रखे एक वेंटिलेटर का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। मरीजों को ऑटोमेटिक ग्लूकोज और इंजेक्शन की बोतल चढ़ाने वाली 7 इन्फ्यूजन पंप मशीनें रखी दी हैं, लेकिन अभी भी आईबी स्टैंड से ही बोतल और इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। कई मरीजों के परिजन हाथ में बोतल लेकर खड़े रहते हैं।

एक्स-रे मशीन व ओटी बंद रहते हैं

ट्रॉमा सेंटर में रोज 200 से 300 से अधिक गंभीर मरीज पहुंचते हैं। संसाधनों के अभाव में डॉक्टर बेसिक इलाज ही दे पाते हैं। नियमानुसार ट्रामा सेंटर में सभी इंस्ट्रूमेंट और संसाधन उपलब्ध होने चाहिए। ऑपरेशन थिएटर, सीटी स्कैन मशीन, एक्स-रे, सोनोग्राफी मशीन और प्रोफेसर भी मौजूद रहना चाहिए, लेकिन रेजिडेंट डॉक्टर रहते हैं। हालांकि सोनोग्राफी, एक्स-रे मशीन व ओटी हैं पर ये बंद रहते हैं।

इससे पहले भी ऐसा दिखावा करते रहे हैं

यह पहला मौका नहीं है जब सिविल अस्पताल प्रबंधन ऐसे दाैरे के पहले इस तरह का दिखावा कर रहा हो। इससे पहले भी जब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की टीम आती थी तब भी आनन-फानन में नए वार्ड तैयार कर देती थी।

जिन मरीजों को जरूरत नहीं होती थी उन्हें भी भर्ती कर लिया जाता था। बाद में एमसीआई का निरीक्षण खत्म होते ही मरीजों को डिस्चार्ज कर देते थे। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का कोई भी अधिकारी बोलने से बच रहा है।

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