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कारोबार पर असर:नोटबंदी के बाद अब जीएसटी की मार; पिछले पांच साल में कपड़े का उत्पादन डेढ़ करोड़ मीटर घट गया, पहले रोजाना साढ़े चार करोड़ मीटर

सूरतएक महीने पहले
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केंद्र सरकार कपड़े पर 12% जीएसटी लगाने पर अड़ी रही तो लूम्स के छोटे-मध्यम कारखाने बंद हो जाएंगे। - Dainik Bhaskar
केंद्र सरकार कपड़े पर 12% जीएसटी लगाने पर अड़ी रही तो लूम्स के छोटे-मध्यम कारखाने बंद हो जाएंगे।

पिछले पांच साल में कपड़ा उद्योग में उत्पादन बढ़ने के बजाय घट गया है। वीवर्स इसके लिए नोटबंदी और जीएसटी को जिम्मेदार बता रहे हैं। कारोबारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार कपड़े पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाने पर अड़ी रही तो लूम्स के छोटे और मध्यम कारखाने बंद हो जाएंगे। उनके कारोबार पर बड़ा संकट आ जाएगा। आने वाले दिनों में लूम्स कारखानों में कपड़े का उत्पादन और घटेगा। जीएसटी की दर नहीं घटी तो भारी नुकसान होगा।

डर: जीएसटी दर 12 प्रतिशत होने के बाद कपड़ा और महंगा हो जाएगा फेडरेशन अॉफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष देवकिशन मंघाणी ने बताया कि कपड़े पर जीएसटी की दर बढ़ने के कारण मंहगाई और बढ़ेगी। लोग पहले ही महंगाई से परेशान हैं, अब कपड़े की कीमत में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने से खरीदी पर असर पड़ेगा। व्यापारियों को जीएसटी के तौर पर और पूंजी लगानी होगी। वहीं, फुटकर में कारोबार कम होने से व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है। व्यापारियों को शादी के सीजन में अच्छा कारोबार होने की उम्मीद थी, पर जीएसटी की बढ़ी दर से पानी फेर दिया है। इससे वीविंग, प्रोसेसिंग, ट्रेडिंग समेत सभी घटक प्रभावित होंगे।

संकट: टेक्सटाइल मार्केट में पिछले 15 दिनों से ग्रे की खरीदी ठप होने से वीवर्स की परेशानी और बढ़ गई फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने बताया कि नोटबंदी के दौरान सूरत का कपड़ा उद्योग प्रभावित हुआ था। सरकार द्वारा रात में नोटबंदी करने से व्यापारियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। पेमेंट की व्यवस्था गड़बड़ाने से बड़े-बड़े कारखानों में भी काम बंद होने की नौबत आ गई थी। इसका सीधा असर आमजनता पर पड़ा था। कई कारखानों में उत्पादन बंद हो गया था। इससे मजदूरों की नौकरी छूट गई थी। इसका सीधा असर आमजनता पर पड़ा था और खरीदी प्रभावित हुई थी।

सूरत के कपड़ा उद्योग में अधिकांश लेन-देन नकद में होता है। नोटबंदी के कारण मार्केट में लेन-देन ठप हो गया था। रिटेल मार्केट में खरीदी कम होने की वजह से वीवर्स ने प्रोडक्शन कम कर दिया था। जीरावाला ने बताया कि नोटबंदी से पहले सूरत में रोजाना साढ़े चार करोड़ मीटर बुना जाता था। नोटबंदी के बाद घटकर साढ़े तीन करोड़ हो गया। इसके बाद बड़ी मुश्किल से कारोबार पटरी पर लौट रहा था, तभी सरकार ने जीएसटी दर बढ़ाने की घोषणा कर दी। पिछले 15 दिनों से ग्रे की खरीदी पूरी तरह से बंद हो गई है। ग्रे का उत्पादन घटकर तीन करोड़ हो गया है।

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