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कोरोना के बाद भी नहीं राहत:कोरोना से ठीक हुए मरीजो में बैक्टीरियल-फंगस इंफेक्शन, रोज 400 टेस्ट में 200 में ये बीमारियां मिल रहीं; हीमोग्लोबिन की भी काफी कमी

सूरतएक महीने पहले
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समस्या: मरीजों को सर्दी-खांसी, बुखार, बलगम व सांस लेने में हो रही दिक्कत। - Dainik Bhaskar
समस्या: मरीजों को सर्दी-खांसी, बुखार, बलगम व सांस लेने में हो रही दिक्कत।

कोरोना काल में बीमार हुए लोगों में अब सेकेंडरी बैक्टीरियल व फंगल इंफेक्शन की समस्या देखी जा रही है। सिविल अस्पताल में रोज 400 ब्लड टेस्ट कराए जा रहे हैं, इनमें से 150 से 200 में ये बीमारियां मिल रही हैं। इन मरीजों में हीमोग्लोबिन की भी काफी कमी देखी जा रही है। पुरुषों में 14 व महिलाओं में 11 प्वाॅइंट हीमोग्लोबिन होना चाहिए, लेकिन बीमारी की वजह से पुरुषों में 9 से 11 और महिलाओं में 7 से 9 प्वाॅइंट हीमोग्लोबिन मिल रहा है।

डॉक्टरों का कहना है कि जिन्हें करोना हो चुका है उनके फेफड़े काफी कमजोर हो गए हैं। साथ ही इम्यूनिटी भी कमजोर होने से सेकेंडरी इंफेक्शन होने की अाशंका बढ़ जाती है। अभी सिविल की ओपीडी में लगभग 2500 मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा मरीज मेडिसिन ओपीडी के हैं। इनमें से रोज लगभग 400 मरीजों को सर्दी, खांसी, बलगम, बुखार, सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी आदि की समस्या हो होती है। ऐसे मरीजों का ही ब्लड टेस्ट डाॅक्टर करा रहे हैं।

एक मरीज को सैंपल देने में 2 से 3 घंटे लग रहे हैं।
एक मरीज को सैंपल देने में 2 से 3 घंटे लग रहे हैं।

कोरोना काल से पहले सिविल अस्पताल में जुलाई में रोज 4500 हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे। इनमें से 400 से 450 मरीजों का ब्लड टेस्ट करवाया जाता था। वैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन के कम वायरल इंफेक्शन के मरीज ज्यादा मिलते थे। उस समय सर्दी, बुखार, खांसी, मलेरिया, डेंगू, डायरिया आदि की शिकायत के साथ मरीज अस्पताल पहुंचते थे।

मरीजों को सर्दी-खांसी के साथ सांस की समस्या
जिन्हें कोरोना हुआ था और उनके फेफड़े काफी संक्रमित हुए थे वे बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन से पीड़ित हो रहे हैं। उन्हें सर्दी, खांसी, बुखार, अधिक बलगम और सांस की समस्या हो रही है। दवा देकर हम ब्लड सैंपल की जांच करवा रहे हैं।
-डॉ. अमित गामित, प्रोफेसर मेडिसिन विभाग, सिविल अस्पताल

सिविल की ब्लड कलेक्शन ओपीडी में मरीजों की रोज भीड़ हो रही है। एक मरीज को सैंपल देने में 2 से 3 घंटे लग रहे हैं। डॉक्टर द्वारा ब्लड टेस्ट लिखे जाने के बाद से सैंपल कलेक्शन तक के बीच महज 15 मिनट में काम हो जाता है, लेकिन भीड़ अधिक होने से सभी काउंटर पर समय ज्यादा लग रहा है। कुछ मरीजों ने बताया कि वह सुबह से इलाज के लिए आए हैं। केस पेपर जल्दी मिल गया, डॉक्टर ने भी देख लिया, दवाई भी मिल गई, लेकिन ब्लड सैंपल देने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।

ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग रहे
पिछले 10 दिनों से लगातार इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। 10 दिन पहले तक पैथोलॉजी की ओपीडी 100 से 150 तक थी, लेकिन अब धीरे-धीरे 400 तक पहुंच गई है। इस कारण रिपोर्ट आने में 3 से 4 दिन लग रहे हैं। पहले मरीजों की संख्या कम होने से यह रिपोर्ट अगले दिन या 2 दिन में मिल जाती थी।

- 2500 ओपीडी रोज सिविल अस्पताल की - 400 मरीजों के ब्लड टेस्ट रोज हो रहे हैं - 200 में मिल रहा बैक्टीरियल-फंगल इंफेक्शन - सिविल: भीड़ ऐसी कि सैंपल देने में ही 2 से 3 घंटे लग रहे

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