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शिक्षा में भ्रष्टाचार:साल 2018-2020 के बीच कई प्राथमिक स्कूलाें को मान्यता देने में धांधली, शिक्षा विभाग ने कहा- जांच करो

सूरत3 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • जांच के लिए तीन लोगों की टीम बनाई गई है, रिपोर्ट बनाकर गांधीनगर भेजेंगे

शहर में शिक्षा व्यवस्था को सुचारू और सही ढंग से चलाने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की है। हालांकि इन सबके बीच एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, यह जानकारी सामने आई है कि जून 2018 से जून 2020 के बीच कई प्राथमिक स्कूलों को गलत तरीके से मान्यता दी गई। यही नहीं, वर्ग बढ़वाने को लेकर भी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। यानी वर्ग बढ़वाने को लेकर भी गलत तरीके से सिफारिश की गई है।

मामले का खुलासा होने के बाद जिला शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। शिक्षा विभाग, गांधीनगर ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए जांच के लिए तीन लोगों की टीम बना दी है। इस टीम सूरत और वलसाड के जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी और वलसाड जिला शिक्षा अधिकारी हैं। इधर, सूत्रों से पता चला है कि कई स्कूलों की मान्यता रद्द करने के लिए विभाग ने प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

शिक्षा विभाग को इस बारे में अब तक कई शिकायतें मिल चुकी हैं
प्राथमिक शिक्षा नियामक, गांधीनगर की तरफ से एक पत्र जारी किया गया है। इसमें यह उल्लेख किया गया है कि जून 2018 से लेकर जून 2020 तक स्कूलों को मान्यता देने में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। जानकारी मिली है कि कई प्राथमिक स्कूलों को गलत तरीके से मंजूरी दे दी गई है।
इतना ही नहीं स्कूलों में क्लास की संख्या बढ़ाने के लिए जो तय नियम हैं, उन्हें भी दरकिनार करते हुए क्लास की संख्या बढ़ाने के लिए मंजूरी दे दी गई। इस तरह की कई शिकायतें शिक्षा विभाग, गांधीनगर को मिली है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका सामने आई है।

ऐसे स्कूलों की दोबारा से जांच होगी टीम नए सिरे से तैयार करेगी रिपोर्ट
शिक्षा नियामक, गांधीनगर के मुताबिक एक संयुक्त टीम अब इस पूरे मामले की जांच करेगा। इसके अनुसार, उन स्कूलों की जिन्हें गलत तरीके से मान्यता देने की शिकायतें आई हैं, उनसे जांच करने काे कहा गया है। मान्यता देने से पहले जो रिपोर्ट गांधीनगर भेजी गई थी, उसके अनुसार इन स्कूलों में सभी जरूरी सुविधाएं और संसाधन मौजूद हैं। अब दोबारा से इन स्कूलों की जांच की जाएगी। इसके बाद एक रिपोर्ट बनाकर गांधीनगर भेजा जाएगा। शिक्षा नियामक ने जल्द से जल्द तैयार करके को कहा है।

ऐसे स्कूल को मान्यता जिसकी बिल्डिंग ही नहीं
शिकायतकर्ता ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि सूरत में स्कूलों को मान्यता देने में बड़ी लापरवाही की गई है। इसमें कई नामचीन स्कूल भी शामिल हैं। कतारगाम में तो एक ऐसी स्कूल सामने आई है जिसकी बिल्डिंग तक नहीं बनी है और उसे मान्यता दे दी गई है। लेकिन अब बोर्ड की तरफ से इस स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है। फिर से जांच की जा रही है।

कितने स्कूल जांचे: शिक्षा अधिकारी बोले- नहीं पता
वर्ष 2019 में आरटीआई एक्टिविस्ट दीपक पटेल की तरफ से जिला शिक्षा अधिकारी एचएच राजगुरु से जानकारी मांगी गई थी कि उन्होंने पिछले 5 वर्षों में कितनी स्कूलों को मान्यता दी और कितनों की जांच की। इसकी जानकारी उन्हें उपलब्ध कराई जाए। हालांकि आरटीआई में दी गई जानकारी के मुताबिक उन्होंने किसी भी स्कूल की जांच नहीं की थी, साथ ही उनके पास इस तरह को कोई जानकारी मौजूद नहीं है। इस जवाब से स्पष्ट है कि किसी भी स्कूल की जांच नहीं गई, और बना जांच ही मान्यता दे दी गई। अब पूरे मामले की जांच के आदेश गांधीनगर से आने के बाद यह साफ होने लगा है कि स्कूलों को मान्यता देने में गड़बड़ी की गई है।

गांधीनगर से इस मामले में जांच करने को कहा गया है: प्राथमिक शिक्षा अधिकारी
जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी दीपक दर्जी ने बताया कि अभी मामले की जांच की शुरुआत नहीं की गई है। गांधीनगर की ओर से इन स्कूलों को गलत तरीके से इजाजत देने के मामले में जांच करने को कहा गया है। जिस वक्त स्कूलों को इजाजत दी गई थी, उस वक्त जिला शिक्षा अधिकारी एचएच राजगुरु जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के इंचार्ज पद पर भी कार्यरत थे।
इसके बाद मुझे जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी बनाया गया। ऐसे मामलों की जांच के लिए मुझे जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही वलसाड के जिला शिक्षा अधिकारी तथा वलसाड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को साथ में रखकर यह जांच पूरी की जाएगी।

जिला शिक्षा अधिकारी ने नहीं उठाया फोन
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एचएच राजगुरु से कई बार उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने की काेशिश की गई। हालांकि उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने मैसेज का भी कोई जवाब नहीं दिया।

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