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  • Bhavesh Rabari Is The Only Opposition Candidate In The General Category Of Syndicate, If He Loses, The Congress Card Is Clear.

नर्मद यूनिवर्सिटी में सिंडीकेट का चुनाव आज:सिंडीकेट की जनरल कैटेगरी में भावेश रबारी अकेले विपक्षी उम्मीदवार हैं, हारे तो कांग्रेस का पत्ता साफ

सूरत3 महीने पहले
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  • सुबह 11:00 बजे से मतदान, शाम को घोषित होगा परिणाम

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी में सिंडीकेट के चुनाव की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी कर ली गई। शनिवार को मतदान होगा। जनरल कैटेगरी की पांच सीटों पर 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें से कुलपति पक्ष के 5 उम्मीदवार हैं, जबकि भावेश रबारी ने अकेले कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार की है। अगर भावेश रबारी चुनाव हार जाते हैं तो सिंडीकेट में कांग्रेस का पत्ता साफ हो जाएगा।

इसके अलावा इस बार यूनिवर्सिटी के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट और प्रोफेसर्स के बीच होने वाले चुनाव में भी कांटे की टक्कर होगी। इस चुनाव पर सबकी नजर होगी, क्योंकि एचओडी में हर बार की तरह इस बार भी राकेश देसाई प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं, केसी पोरिया उनके सामने मैदान में उतरे हैं।

सिंडीकेट चुनाव में ही यह तय हो जाएगा कि कुलपति के आने से प्रोफेसर्स और प्रिंसिपल में कोई विरोधाभास नहीं है। भावेश रबारी की हार-जीत से भी बहुत कुछ तय होगा। मतदान शनिवार को सुबह 11:00 बजे से शुरू होगा। दो घंटे तक वोटिंग होने की संभावना है। शाम तक परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। चुनाव को लेकर यूनिवर्सिटी में काफी गहमागहमी चल रही है।

कश्यप खरासिया बोले- कुलपति पक्ष के सभी पांचों उम्मीदवारों काे जिताने की पूरी कोशिश की जा रही

स्थिति: इन पदों के लिए हाेंगे चुनाव, 10 उम्मीदवार मैदान में, जनरल कैटेगरी में होगी कांटे की टक्कर

यूनिवर्सिटी में शनिवार को सिंडीकेट में जनरल कैटेगरी, एसओडी और प्रोफेसर्स के चुनाव होंगे। जनरल कैटेगरी में 5 सीट, एचओडी और प्रोफेसर्स में एक-एक सीटों के लिए मतदान होगा। 10 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र भरा था, स्क्रूटिनी के बाद सभी के नामांकन मंजूर कर लिए गए हैं। 10 उम्मीदवारों में से किसी ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया है। ज्ञाातव्य है कि प्रिंसिपल के सीटों पर सिंडीकेट सदस्य निर्विरोध चुने गए थे।

भावेश रबारी: हम चुनाव हार गए तो यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला कोई नहीं होगा

भावेश रबारी ने कहा कि हमें सिंडीकेट के चुनाव में हराने की जिम्मेदारी भाजपा समर्थिक उम्मीदवारों काे दी गई है। सभी एकजुट हो गए हैं। इतना ही नहीं हमें हराने मतदाताओं को धमकाया भी जा रहा है। हमारे चुनाव हारने से यूनिवर्सिटी में होने वाले भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला कोई नहीं होगा। वहीं, कुलपति पक्ष के उम्मीदवार कश्यम खरासिया ने कहा कि पांचों सदस्यों को जिताने की पूरी कोशिश की जा रही है।

जनरल कैटेगरी: इस बार दो नए उम्मीदवार उतरे हैं मैदान में, एचओडी में राकेश देसाई प्रबल दावेदार

सिंडीकेट की जनरल कैटेगरी में 5 सीटों पर कुल 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें दाे उम्मीदवार नए हैं। निशांत मोदी और कनु भरवाड़ पहली बार सिंडीकेट का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें कितने वोट मिलते हैं, यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा। वहीं, किरण घोघारी, कश्चम खरासिया और वीरेन महिडा फिर से मैदान में उतरे हैं। माना जा रहा है कि इन तीनों की वजह से कुलपति पक्ष के पांचों उम्मीदवार चुनाव जीत जाएंगे। वहीं, एचओडी की बात करें तो राकेश देसाई को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे केसी पोरिया ने पहली बार उम्मीदवारी की है, प्रोफेसर पद के दोनों ही उम्मीदवार नए हैं।

कोशिश नाकाम: एचओडी, प्रोफेसर पद के उम्मीदवारों को नहीं समझा पाए

नर्मद यूनिवर्सिटी में कुलपति डॉ. किशोर चावड़ा की नियुक्ति के बाद माना जा रहा था कि इस बाद सभी प्रिंसिपल और प्रोफेसर उनके ही पक्ष में रहेंगे। केवल जनरल कैटेगरी में ही चुनाव होंगे। चुनाव की घोषणा होने के बाद एचओडी और प्रोफेसर के पद पर खड़े उम्मीदवारों को समझाने की कोशिशें नाकाम रहीं। जानकारों की मानें तो इस बार कुलपति की पकड़ राजनीति में कम पड़ने लगी है।

बदलाव: शिवेंद्र गुप्ता के पक्ष का एक भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है

नर्मद यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति शिवेंद्र गुप्ता के कार्यकाल में नया ग्रुप तैयार हुआ था। इससे लग रहा था कि आने वाले दिनों में पुराने कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी से दूर हो जाएंगे। इस बार सिंडीकेट के चुनाव में नए उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से लग रहा है कि यूनिवर्सिटी की राजनीति नए दौर में पहुंच गई है। पूर्व सिंडीकेट सदस्य डॉ. महेंद्र चौहान ने एकेडमिक काउंसिल में आने के बाद सिंडीकेट में भी शामिल हाे गए थे। पूर्व कुलपति शिवेंद्र गुप्ता के पक्ष का एक भी उम्मीदवार इस बार चुनाव मैदान में नहीं है।

संगठन: रबारी चुनाव हारे तो कुलपति पक्ष और मजबूत होगा

जनरल कैटेगरी में भावेश रबारी चुनाव हार जाते हैं ताे सभी 5 सदस्य कुलपति पक्ष के होंगे। इसे कुलपति की जीत मानी जाएगी। इससे भी साफ हो जाएगा कि संगठन एक बार फिर से मजबूत हो गया है। भावेश रबारी चुनाव जीत जाते हैं तो यह माना जाएगा कि कुलपति से सीनेट के कई मेंबर्स का अनबन है। चुनाव के बाद सुधारने की कोशिश की जाएगी।

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