गुजरात चुनाव 2022:भाजपा 16 में से 11 सीटों पर लीड और 5 पर प्रति‌‌‌ष्ठा बचाने के लिए लगा रही जोर

अहमदाबाद13 दिन पहले
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AAP और AIMIM चार सीटों पर कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं। - Dainik Bhaskar
AAP और AIMIM चार सीटों पर कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं।

अहमदाबाद शहर की 16 सीटों में से अधिकांश पर अभी चुनाव माहौल जमा नहीं है। लोगों की अटल चुप्पी अभी भी राजनीतिक दलों को सता रही है। ज्यादातर सोसायटियों में नेताओं को सभा के लिए नो एंट्री मिल रही है। लेकिन अहमदाबाद शहर की 16 सीटों में BJP सिर्फ पांच पर ही चुनाव लड़ रही हो ऐसा देखने को मिल रहा है। इन पांच निर्वाचन क्षेत्रों में दरियापुर, जमालपुर-खाडिया, दानीलिमडा, बापूनगर और अमराईवाड़ी शामिल हैं।

कांग्रेस ने जीती थीं चार सीटें
2017 में इनमें से चार सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जबकि अमराईवाड़ी सीट पर भाजपा ने बहुत कम अंतर से जीत हासिल की थी। दरियापुर और जमालपुर-खाडिया और दानीलिमडा मुस्लिम बहुल सीटें हैं। बापूनगर में हिंदी भाषी वोटर ज्यादा हैं। बाकी बची 11 सीटों पर BJP पिछले कुछ वर्षों से जीतती आ रही है, लेकिन यहां प्रत्याशी जीत के लिए नहीं बल्कि भारी बढ़त के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

BJP के प्रत्याशियों में ही इस बात को लेकर कड़ा मुकाबला चल रहा है कि कौन ज्यादा वोटों से जीतेगा। हर उम्मीदवार की कोशिश है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आएं और उनके इलाकों में सभा या रैली करें। इसका एकमात्र कारण यह है कि प्रत्येक उम्मीदवार भारी बढ़त के साथ जीतने के लिए बेताब है।

इस वजह से इन पांच सीटों पर रस्साकसी

जमालपुर-खाडिया: BJP की नाक का सवाल
2012 में परिसीमन के बाद खाडिया-जमालपुर सीट का विलय कर दिया गया था। 2017 के चुनाव में कांग्रेस नेता इमरान खेड़ावाला ने BJP के भूषण भट्ट को हराया था। इस सीट का इतिहास यह है कि वर्तमान भाजपा प्रत्याशी भूषण भट्ट के पिता अशोक भट्ट खाडिया सीट से 1980 से 2007 तक लगातार 8 बार जीते, लेकिन भूषण भट्ट सिर्फ दो बार जीते। इस बार यहां जीतना BJP के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है।

दरियापुर: कांग्रेस को वोट बंटने का डर है
इस सीट पर पिछले तीन कार्यकाल से कांग्रेस का कब्जा रहा है। 2017 में कांग्रेस के गयासुद्दीन शेख ने BJP के भरत बारोट को हराया था। इस बार BJP से कौशिक जैन को मैदान में हैं, जो 30 साल से संगठन से जुड़े हैं। कौशिक जैन को जिताने के लिए भाजपा जी-तोड़ मेहनत कर रहा है, जबकि कांग्रेस के लिए दिक्कत यह है कि आप और निर्दलीय प्रत्याशी भी मुस्लिम है।

दानीलीमडा: BJP मेहनत नहीं कर रही, कांग्रेस को जीत का भरोसा
इस सीट पर पिछले चार टर्म से कांग्रेस का कब्जा रहा है। 2017 में भी इस सीट पर कांग्रेस के शैलेश परमार ने 30 हजार वोटों की बढ़त के साथ जीत हासिल की थी। इस बार भी यहां से शैलेश परमार को टिकट दिया गया है, जबकि BJP ने नरेश व्यास को मैदान में उतारा है। नरेश व्यास पर पूर्व में कई आरोप लग चुके हैं।

अमराईवाड़ी: उपचुनाव में BJP हार से बची थी
अमराईवाड़ी सीट पर कांग्रेस ने दूसरी बार धर्मेंद्र पटेल को टिकट दिया है। 2017 में यहां BJP के हसमुख पटेल जीते थे, लेकिन 2019 में उपचुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस के धर्मेंद्र पटेल 5047 वोटों से हार गए थे। उनका व्यक्तिगत दबदबा अधिक होने के कारण कांग्रेस ने उन्हें दोहराया है।

बापूनगर: 2017 में कांग्रेस तीन हजार वोटों से जीती
2017 में कांग्रेस के हिम्मतसिंह पटेल ने BJP के खिलाफ महज 3 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। इस बार उन्हें रिपीट किया गया है, लेकिन भाजपा ने यहां हिंदी भाषी आबादी को देखते हुए उत्तर भारतीय कार्ड का इस्तेमाल किया है। मूल रूप से उत्तर भारत के रहने वाले दिनेश सिंह कुशवाह को मैदान में उतारा गया है।