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सूरती + ओबीसी + डायमंड/टेक्सटाइल + महिला = दर्शना:विधानसभा चुनाव-2022 व लोेकसभा चुनाव 2024 का भाजपा का फार्मूला- ऐसे समझिए मोदी मंत्रिपरिषद में सूरत सांसद की एंट्री का गणित

सूरतएक महीने पहले
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सुखद मुस्कान: फोटोग्राफर से करियर शुरू किया, अब मंत्री - Dainik Bhaskar
सुखद मुस्कान: फोटोग्राफर से करियर शुरू किया, अब मंत्री
  • शौक फोटोग्राफी- बचपन से ही शुरू हुआ फोटोग्राफी का सफर अब तक जारी है
  • रिकॉर्ड विजय- 2014 के लोकसभा चुनाव में देश में सबसे ज्यादा 5.33 लाख वोटों से जीतीं
  • चुनौती भी है- सीआर पाटिल पहले से प्रदेश अध्यक्ष, अब दर्शना के मंत्री बनने से दो पावर सेंटर बने

कहते हैं राजनीति और क्रिकेट में काफी समानता होती है। दोनों में कभी-कभी ऐसे फैसले लिए जाते हैं जो चाैंका देते हैं। सूरत की सांसद दर्शना जरदोष को मोदी कैबिनेट में कपड़ा और रेल मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाना भी इसी तरह का फैसला माना जा रहा है, क्योंकि मंगलवार तक इसकी कोई चर्चा नहीं थी।

काशीराम राणा के बाद यह पहला माैका है जब सूरत के सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। दर्शना को मंत्री बनाने के पीछे 2022 का राज्य विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव माना जा रहा है। इसके पीछे सूरती-ओबीसी-डायमंड-टेक्सटाइल और महिला मतदाताओं को साधने का गणित है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में दर्शना जरदोष को स्थान देकर भाजपा ने सूरत सहित दक्षिण गुजरात के वोटबैंक को मजबूती देने की कोशिश की है। दर्शना मूल सूरती और ओबीसी हैं। महिलाओं, टेक्सटाइल व्यापारियों और डायमंड उद्यमियों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वह डायमंड सेक्टर की समस्याओं का समाधान कराने में आगे रही हैं। नाराज चल रहे कपड़ा कारोबारी भी उनसे अपनी बात कह सकते हैं।

मोदी सरकार में कपड़ा और रेल मंत्रालय में राज्यमंत्री बनीं अपनी सांसद दर्शना जरदोष

प्रदेश की पहली निर्विरोध पार्षद बनी थीं- दर्शना ने 2000 में सक्रिय राजनीति में उतारा। उन्होंने मनपा चुनाव में नामांकन पत्र भर दिया। विरोध उम्मीदवार के हट जाने से वह प्रदेश की पहला निर्विरोध पार्षद बनीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने देश में सबसे ज्यादा 5 लाख 33 हजार वोटों से जीत हासिल की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव भी 5.47 लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की थी।

2014 के बाद द. गुजरात का कोई सांसद मंत्री

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूरत के सांसद काशीराम राणा टेक्सटाइल मंत्री बने थे। उसके बाद केंद्र में कांग्रेस की सरकार आई थी। उसके बाद वर्ष 2014 से भाजपा के शासन में भी सूरत समेत दक्षिण गुजरात के किसी भी सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला था। अब 6 साल बाद दर्शना जरदोष को स्थान मिला है। गुजरात से वाजपेयी की सरकार में जूनागढ़ की सांसद भावना बेन मंत्री बनी थीं, अब दर्शना जरदोष मंत्री बनी हैं।

सांसद कारोबारियों के लिए हमेशा खड़ी रहती हैं

वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक जानकार फैजल बकीली का कहना है कि दर्शना जरदोष 3 टर्म से सांसद हैं। उनका विवादों से नाता नहीं रहा है। इसके अलावा वह डायमंड, जरी और टेक्सटाइल जैसे उद्योग के लिए हमेशा खड़ी रहती हैं।

उन्होंने एयरपोर्ट की मांग की थी। गुजरात के राजकरण में सूरत समेत दक्षिण गुजरात मजबूत हुआ है। मंगुभाई को राज्यपाल, सीआर पाटिल को प्रदेश अध्यक्ष और अब दर्शना जरदोष के मंत्री बनाने से दक्षिण गुजरात का वोट बैंक मजबूत हुआ है।

बचपन से ही हाथ में पकड़ लिया था कैमरा

तीन बार सूरत से सांसद रह चुकीं दर्शना जरदोष ने फोटोग्राफर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की और उनका सफर मंत्री तक पहुंच चुका है। दर्शनाबेन का जन्म जन्म 21 जनवरी, 1961 को हुअा था। वह कांतिभाई नायक व अमिताबेन नायक (अनाविल ब्राह्मण) की पहली संतान हैं।

परिवार में एक छोटा भाई होने के बावजूद कांतिभाई ने कम उम्र से ही दर्शना का पालन-पोषण एक बेटे की तरह किया। उनके पिता फोटोग्राफर थे तो दर्शना ने बचपन में कैमरा पकड़ लिया था। उन्होंने कम उम्र में ही फोटोग्राफी करना शुरू कर दिया था, जो आज भी जारी है। कॉलेज के दिनों में और उसके बाद वह सार्वजनिक समारोहों, शादियों, पार्टियों आदि में एक व्यावसायिक फोटोग्राफर के तौर पर तस्वीरें खींचती थी।

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