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तीन साल में 5250 करोड़ की टैक्स चोरी:बिल्डरों,कपड़ा व्यापारियों, ट्यूशन क्लासेज संचालकों और अन्य कारोबारियों ने 9 महीने में 1570 करोड़ रुपए की GST चोरी की, 70 से ज्यादा बैंक अकाउंट सीज

सूरतएक महीने पहले
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कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल से जुलाई के दौरान व्यापार-उद्योग या तो ठप रहे या मंदगति से चल रहे थे, लेकिन जीएसटी चोरी धड़ल्ले से हो रही थी। डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस सूरत ने वित्त वर्ष 2021-22 के 9 महीने में 1570 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी पकड़ी।

जीएसटी चोरी करने वालों में बिल्डर, कपड़ा व्यापारी, ट्यूशन क्लासेस संचालक, केमिकल, स्क्रैप, टाइल्स, प्लास्टिक, सरिया, ऑटो पार्ट्स व फूड आइटम के कारोबारी शामिल हैं। डिपार्टमेंट के अनुसार पिछले तीन साल में 5250 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी पकड़ी गई और 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इन कारोबार में पकड़ी गई जीएसटी चोरी

  • रियल एस्टेट
  • टेक्सटाइल
  • केमिकल
  • ट्यूशन क्लासेस
  • स्क्रैप
  • टाइल्स
  • फूड आइटम
  • प्लास्टिक विक्रेता
  • सरिया
  • ऑटो पार्ट्स
  • पटाखे

200 से ज्यादा केस किए, 30 को गिरफ्तार किया

डीजीजीआई डिपार्टमेंट ने सूरत सहित दक्षिण गुजरात में तीन साल में 200 से अधिक केसों में ड्यूटी चोरी पकड़ी। इनमें कई केस बोगस बिलिंग से भी जुड़े हैं। डिपार्टमेंट ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे रिकवरी की प्रक्रिया की जा रही है। कई आरोपी फरार हैं। डिपार्टमेंट ने जिन लोगों के यहां टैक्स चोरी पकड़ी उनमें मेडिकल काॅस्मेटिक ट्रीटमेंट और ट्यूशन क्लासेस संचालक भी शामिल हैं।

जीएसटी के नियम के अनुसार इन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, लेकिन ट्यूशन क्लासेस संचालक विद्यार्थियों की संख्या कम बताकर जीएसटी चोरी कर रहे थे। डिपार्टमेंट ने सीसीटीवी कैमरे और हाजिरी रजिस्टर के अनुसार यहां से टैक्स चोरी पकड़ी।

दो साॅफ्टवेयर से जीएसटी चोरी पकड़ने में मिल रही है सफलता

डीजीजीआई डिपार्टमेंट के पास दो साॅफ्टवेयर हैं जो संदेहात्मक व्यापारियों की जानकारी जनरेट करते रहते हैं। दोनों साॅफ्टवेयर व्यापारियों की ओर से रिटर्न फाइल करने के बाद उनमें शंकास्पद डेटा को फाॅलो करते हुए गड़बड़ी ढूंढते हैं। बोगस बिलिंग के मामलों में भी यही साॅफ्टवेयर पूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। माल खरीदने और डिलिवरी तक की जानकारी सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराते हैं, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।​​​​​​​

बहाना: कोरोना से आर्थिक तंगी आ गई

कई मामलों में लोगों से जीएसटी लिया लेकिन डिपार्टमेंट में जमा नहीं करवाया। पूछताछ में आरोपियों ने कहा कि कोरोना से आर्थिक मंदी आ गई थी, जिससे टैक्स जमा नहीं करवा पाए। कई बिल्डर इस तरह की टैक्स चोरी में शामिल थे। ऐसे लोगों के यहां छापा मारकर वसूली की कार्रवाई की गई।

सूरत बोगस बिलिंग-टैक्स चोरी में भी आगे

सूरत में डायमंड, टेक्सटाइल, केमिकल, फूड इंडस्ट्री सहित अन्य कई छोटे-बड़े उद्योग हैं, इसलिए यहां पर जीएसटी चोरी और बोगस बिलिंग दोनों के मामले ज्यादा होते हैं। जीएसटी नहीं भरने वाले भी छोटी-छोटी कंपनियां खोलकर फर्जीवाड़ा कर फरार हो जाते हैं। गुजरात में जीएसटी चोरी में अहमदाबाद के बाद सूरत दूसरे स्थान पर हैं।

तीन साल में 250 बैंक खाते सीज कर रिकवरी कर रहे

डीजीजीआई डिपार्टमेंट ने जांच की कार्रवाई के बाद तीन साल में 250 से अधिक बैंक खातों को सीज कर दिया है। आमतौर पर जिन मामलों में करदाता टैक्स नहीं जमा करता या पलायन की आशंका होती है तो डिपार्टमेंट सीधे ही बैंक अकाउंट सीज करने के साथ प्राॅपर्टी भी अटैच कर लेता है। अभी तक 250 से अधिक बैंक खाते सीज कर करोड़ों रुपए की रिकवरी की गई है। डीजीजीआई डिपार्टमेंट तेजी से रिकवरी कर रहा है।

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