तक्षशिला अग्निकांड:घटना के 410 दिन बाद 14 आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम, 13 को होगी सुनवाई

सूरतएक वर्ष पहले
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  • अधिकारी, बिल्डर की मिलीभगत से 22 बच्चों की जान गई थी

तक्षशिला अग्निकांड में घटना के 410 दिन बाद सभी 14 आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया गया। आरोपियों ने चार्ज फ्रेम के खिलाफ डिस्चार्ज अर्जी भी दी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दी थी। 13 जुलाई को आरोपियों की मौजूदगी में सुनवाई होगी। ज्ञातव्य है कि 24 मई 2019 को आरोपियों की लापरवाही से लगी भीषण आग में 22 बच्चों की जान चली गई थी। तक्षशिला अग्निकांड में शुरू में 3 लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी का आंकड़ा बढ़कर 14 पर पहुंच गया। इस मामले की आगे की जांच अभी भी चल रही है। 

दुनियाभर में फैली महामारी के कारण आरोपियों पर चार्ज फ्रेम की सुनवाई 13 जुलाई को होगी। शिकायतकर्ता की ओर से वकील ने दलील देते हुए कहा कि आरोपियों ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। तक्षशिला में अवैध ढंग से कंस्ट्रक्शन किया गया था। इसमें मनपा के अधिकारियाें की भी मिलीभगत है।

मनपा के अधिकारियों ने मौके पर जाकर बिल्डिंग की ठीक से जांच नहीं की और पैसे लेकर अवैध निर्माण होने दिया। इसके बाद अवैध ढंग से इसमें क्लासेज भी शुरू कर दिया गया था। तक्षशिला आर्केड में कोई सावधानी नहीं बरती गई थी। लापरवाही से 22 बच्चों की जान चली गई थी। घटना को एक साल पूरा हो गया है। 

चार्ज फ्रेम प्रक्रिया

कोर्ट ने मनपा के फायर अधिकारी संजय आचार्य कीर्ति मोड़, डीजीवीसीएल के अधिकारी दीपक नायक और ट्यूशन संचालक भार्गव भूटानी के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 308 और 114 के तहत चार्ज फ्रेम किया है।  शेष आरोपियों के खिलाफ इन तीनों धाराओं के अलावा 465, 467, 468, 471 के तहत चार्ज फ्रेम किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से धारा 33 और 36 लगाने की भी अर्जी की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दी है।

अग्निकांड से चार्ज फ्रेम होने तक का घटनाक्रम

  •  24 मई 2019 को शाम 4:00 बजे सरथाणा के तक्षशिला आर्केड में आग लगी थी, जिसमें 22 छात्रों की मौत हुई थी और 18 घायल हो गए थे।
  • सरथाना पुलिस ने ट्यूशन क्लास के संचालक, बिल्डर, मनपा अधिकारी और डीजीवीसीएल के अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया था।
  • 22 जुलाई 2019 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई थी, जिसमें आईपीसी की धारा 304, 308, 114 के तहत शिकायत दर्ज की थी।
  • बाद में आईपीसी की धारा 465, 467, 468 और 471 भी बढ़ाई गई।
  • इस मामले में विशेष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने प्रस्तावित अभियोग दायर किया। 
  • इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया।

एक आरोपी की हाईकोर्ट से जमानत मंजूर 

जूनियर इंजीनियर अतुल गोरसावाला को 7 जुलाई को हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर कर दी है। शिकायतकर्ता के वकील पीयूष मंगुकिया ने बताया कि जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देंगे। इसके अलावा 3 आरोपियों की जमानत अर्जी पर 8 जुलाई को सुनवाई होगी। 

किसके खिलाफ कौन से आरोप लगे हैं

1. जिग्नल पाघडाल: पेशे से बिल्डर जिग्नल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ था। जिग्नल तक्षशिला आर्केड में तीसरी और चौथी मंजिल का मालिक है और टेरेस पर अवैध निर्माण किया था। जिग्नल को सेशंस कोर्ट से 8 जुलाई 2019 जमानत मिली थी।    2. सवजी पाघडाल: जिग्नल के पिता हैं और पेशे से बिल्डर हैं। अभी जेल में बंद हैं।   3. हरसुख वेकारिया: जिग्नल के साथ दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल के मालिक हैं। अभी जेल में हैं। 4. रविंद्र कहार: तीसरी मंजिल के पार्टनर हैं और जेल में हैं।  5. भार्गव भूटानी: क्लासेज संचालक, गैरकानूनी तरीके से निर्माण किया। अभी जेल में हैं।   6. दीपक नायक: इन्होंने क्लासेज को अवैध बिजली कनेक्शन दी थी। ट्रांसफार्मर में लगे मीटर की जांच भी नहीं की थी। हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर 2019 को दीपक को जमानत दी थी।  7. वीनू परमार: मनपा अधिकारी हैं और वीनू पराग मुंशी के नीचे काम कर रहे थे। इन्होंने बिल्डिंग के बनते समय इसका दौरा नहीं किया। वीनू परमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज है।

8. पराग मुंशी: मनपा अधिकारी हैं। रेगुलराइजेशन के लिए फाइल पराग मुंशी के पास आई थी। इंपैक्ट फीस लेकर पास कर दी थी। पराग मुंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी दी थी जो खारिज हो गई।  9. कीर्ति मोढ़: फायर अधिकारी हैं। इन्होंने फायर सेफ्टी की जांच तक नहीं की। इन्हें 3 दिसंबर को जमानत मिली थी। लिंबायत जोन में ड्यूटी कर रहे हैं। 10. संजय आचार्य: फायर अधिकारी होने के बाद भी सेफ्टी की चेकिंग नहीं की। इन्हें भी 3 दिसंबर को जमानत मिली थी। इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज है।  11. जयेश सोलंकी: सर्टिफिकेट को रेगुलराइजेशन देने के बाद इंपैक्ट फीस तो ले ली, पर साइट विजिट नहीं की। अभी जेल में बंद हैं।  12. अतुल गोरसावाला: मनपा में जूनियर इंजीनियर हैं। पराग मुंशी के अंडर में काम कर रहे थे।  13. हिमांशु गज्जर: मनपा के डिप्टी इंजीनियर हिमांशु गज्जर ने बिना दौरा किए ही बनाने की मंजूरी दे दी। अभी जेल में हैं।  14. दिनेश वेकरिया: हरसुख वेकरिया के भाई हैं। फाइल इनके ही नाम पर थी इसलिए जेल में हैं।

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