पाबंदियों का असर:चॉल खाली, गलियां सूनी, 22 दिनों में गांव चले गए 5 लाख लोग

सूरत6 महीने पहले
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पांडेसरा के बमरोली गांव में श्रमिकों से खाली हो चुकी चॉलों पर ताले लगे। - Dainik Bhaskar
पांडेसरा के बमरोली गांव में श्रमिकों से खाली हो चुकी चॉलों पर ताले लगे।
  • पांडेसरा के घरों पर अब लटकने लगे ताले

बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए शहर में 28 अप्रैल से नई पाबंदियां लगा दी गई हैं। इससे गांव जाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। गांव जाने वालों में दुकानों पर काम करने वाले, छोटा-मोटा धंधा-कारोबार करने वाले टेक्सटाइल मिलों के श्रमिकों के अलावा अन्य लोग भी शामिल हैं। 7 अप्रैल से अब तक शहर से 5 लाख लोग जा चुके हैं। ट्रेनों में सीट टू सीट यात्रा की सख्ती के कारण लोग बसों से अपने-अपने गांव जा रहे हैं। सूरत से ट्रेवेल्स टूर्स ऑपरेटर रोज 100 से ज्यादा बसें चलाई जा रही हैं।

ट्रेनों से रोजाना 15 हजार से ज्यादा लोग जा रहे हैं जबकि बसों से भी इतनी ही संख्या में जाने लगे है। शहर के कई इलाके तो पिछले दो दिनों में खाली हो गए। ये ऐसे इलाके हैं जहां बड़ी संख्या में श्रमिक वर्ग के लोग रह रहे हैं। अब घरों में ताले लगे हैं और गलियों में सन्नाटा छाया हुआ है।
अब तक 400 से ज्यादा ट्रेनों की ट्रिप चलाई गई
7 अप्रैल से अब तक शहर के लगभग पांच लाख श्रमिक अपने अपने गांव जा चुके हैं। इनमें यूपी-बिहार के अलावा ओडिशा और झारखंड के भी श्रमिक हैं। रेलवे ने अब तक 400 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों की ट्रिप चलाई है। पिछले 23 दिनों में लगभग तीन हजार से ज्यादा बसें यूपी -बिहार के लिए गईं।

कपड़ा मिलों से काफी कारीगर गांव चले गए, और भी जा रहे

  • उधना में पहर क्रिएशन टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग के संचालक अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि पिछले तीन दिनों में मिल में काम करने वाले हमारे 29 कारीगर चले गए।
  • सुभाष क्रिएशन टेक्सटाइल मैनुफैक्चरिंग के संचालक रोहित ने बताया कि हमारे यहां से 17 कारीगर जा चुके हैं। इससे अब काम धीमा पड़ गया है। अब वे स्थिति ठीक होने पर ही लाैटेंगे।
  • गोल्डन गर्ल टेक्सटाइल के संचालक उपेंद्र क्याथम ने बताया कि केवल तीन दिनों के भीतर मिल के 34 कारीगर चले गए हैं। काम बंद होने की कगार पर है क्योंकि कारीगर नहीं मिल रहे हैं।
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