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कोरोना काल का हाल:सिविल आया हर तीसरा शव कोरोना पॉजिटिव फिर भी न सबकी जांच हो रही न गिने जा रहे

सूरत9 महीने पहले
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  • मार्च से अब तक 500 डेड बॉडी सिविल अस्पताल लाई गई, लक्षण वाले 200 में से सिर्फ 10 शवों का ही कोरोना टेस्ट कराया, उसमें से भी तीन पॉजिटिव मिले, फिर भी लापरवाही
  • सिर्फ अंतिम विधि कोरोना प्रोटोकाॅल से की गई

कोरोना काल के दौरान सैकड़ाें ऐसे लोग भी हैं, जो कोरोना संक्रमित होकर अस्पताल पहुंचने से पहले ही मर गए। ये लोग न तो समय रहते अस्पताल आए न ही सही इलाज मिल पाया। कोरोना से मौत के बावजूद भी कोरोना के मृतकों की सूची में इनके नाम भी शामिल नहीं किए जा रहे हैं।

जबकि सबका अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल से ही कराया गया। ऐसे सभी शवों की कोरोना जांच के बाद ही पीएम होना चाहिए, लेकिन 5 प्रतिशत शवों की ही जांच गई। वह भी उनकी जिनमें कोरोना के लक्षण दिख रहे थे।

ये हालात उन शवों के हैं, जो सिविल अस्पताल में लाए गए। दरअसल यहां मार्च से अब तक 500 शव लाए गए। इनमें लक्षण वाले 200 में से सिर्फ 10 शवों का ही कोरोना टेस्ट किया गया। उसमें भी तीन पॉजिटिव मिले। यानी संदिग्ध वालों में भी हर तीसरा व्यक्ति कोरोना से मरना साबित हो गया।

डॉ. मोहन का जिक्र नहीं फिर भी मनपा कह रही- हम गिन रहे

मनपा स्वास्थ्य कमिश्नर डॉ. आशीष नायक ने कहा कि डॉ. मोहन की मौत को कोरोना में गिना गया है। रही बात ब्रॉड डेड का रैपिड टेस्ट का तो वह डॉक्टर अपने अनुसार करवा सकता है। जिन शवों का कोरोना पॉजिटिव पाया गया है उनके परिजन और आस पास सैनिटाइजर, रैपिड टेस्ट, क्वारेंटाइन आदि प्रकिया की गई थी।

कोरोना के मृतकों की सूची में भी नाम नहीं

जिन 3 शवों में कोरोना मिला है उनका बिना पीएम किए हुए अंतिम संस्कार में मौत का कारण कोविड-19 इंफेक्शन लिखा गया है। ऐसा ही 4 दिसंबर की रात 9 भटार श्री निवास स्वस्तिक पार्क क्षेत्र में रहने वाले 75 वर्षीय डॉ. मोहनभाई बाबूभाई गामित (सिविल अस्पताल के पूर्व आरएमओ) की घर पर ही मौत हो गई थी।

उन्हें सिविल में मृत घोषित कर दिया। वह स्मीमेर अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज में सेवा दे रहे थे इसलिए डॉक्टरों ने शव का 5 दिसंबर को रैपिड टेस्ट करवाया जो पॉजिटिव मिला। डेथ सर्टिफिकेट में डॉक्टरों ने कोविड 19 इंफेक्शन लिखा गया। जबकि मनपा ने डॉ. मोहन की मौत को कोरोना में नहीं गिना है।

अहमदाबाद में भी सभी के टेस्ट हो रहे, लेकिन सूरत में नहीं

अगर इन 200 शवों का टेस्ट होता तो शायद 60 कोरोना पॉजिटिव मिल सकते थे। यदि सभी 500 शवों की जांच होती तो यह आंकड़ा इससे भी बड़ा हो सकता था। सिविल अस्पताल में कोरोना लक्षण वाले 10 शवों का रैपिड टेस्ट किया गया था। ऐसे करीब 190 शव और थे, जिनका टेस्ट नहीं किया गया और ओपन पीएम कर दिया गया।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने कई बार इसका विरोध भी किया लेकिन उनकी एक न चली। जबकि आईसीएमआर की गाइड लाइन के मुताबिक अहमदाबाद सहित राज्य में अन्य जगह ऐसे सभी शवों के टेस्ट किए जा रहे हैं।

संदिग्ध लगने पर टेस्ट करते हैं

1. अहमदाबाद, सोला, जेएमईआरएस मेडिकल कॉलेज एंड सिविल अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरांग पटेल ने बताया कि ब्रॉड डेड कोविड टेस्ट करते हैं बशर्ते ब्रॉड डेड की हिस्ट्री कोविड संदिग्ध हो, परिवार में कोरोना का कोई हो, फॉरेन ट्रैवल की हिस्ट्री हो, बॉडी पर कोई इंजरी न हो, मौत का कोई एक्सप्लेन न हो और उम्र कम हो तो ऐसे शवों का टेस्ट करवाते हैं।

2. फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. विनेश शाह ने बताया कि मान लो किसी ने जहर पी लिया और परिवार वाले डॉक्टर के बताते हैं कि मृतक को सर्दी बुखार था और मर गया। उसका रैपिड टेस्ट भी संयोग से पॉजिटिव आ गया तो बिना पीएम के शव को दे दिया जाएगा ऐसे में न्याय नहीं मिल पाएगा।

सभी शवों के टेस्ट की गाइड लाइन नहीं है: सिविल

अभी केंद्र सरकार की ऐसी कोई गाइड लाइन नहीं है इसलिए यहां उन ब्रॉड डेड का टेस्ट करते हैं जिनका हिस्ट्री देने वाला कोई नहीं हो। हिस्ट्री मिलने और अकाल मौत वाले शवों का टेस्ट भी कर सकते हैं। फ़िलहाल यह डॉक्टर और पुलिस जांच के बाद निर्णय ले सकते हैं।
-डॉ. रागिनी वर्मा, अधीक्षक सिविल अस्पताल

फिर कोरोना कमजोर पड़ा, 28 दिन बाद पौने दो सौ के नीचे आए नए केस

दिवाली के बाद आई कोरोना की दूसरी लहर अब कमजोर पड़ती दिख रही है। क्योंकि पिछले कुछ दिन से कोरोना के केस लगातार घट रहे हैं। रविवार को तो 28 दिन बाद फिर पौने दो सौ के नीचे केस आए। अंतिम 15 नवंबर को 169 केस आए थे। अब रविवार को 172 मामले आए हैं, जो राहत की बात है।

15 नवंबर को शहर में 148 और ग्रामीण में 21 मामले आए थे और एक मरीज की मौत हुई थी। वहीं 195 मरीज डिस्चार्ज हुए। जबकि रविवार को शहर में 148 और ग्रामीण में 24 यानी कुल 172 नए मामले सामने आए। इस तरह सूरत में अब तक कोरोना के 46,530 मामले हो चुके हैं।

रविवार को इलाज के दौरान तीन मरीजों की मौत भी हुई। मौत का आंकड़ा 1093 तक पहुंच गया है। जबकि 242 मरीज ठीक हुए, जिसे मिलाकर अब तक 44,210 मरीज ठीक हो चुके हैं। फिलहाल 1227 एक्टिव मरीजों का इलाज चल रहा है।

4 दिसंबर से घट रहे केस

तारीख नए केस 4 दिसं. 249 5 दिसं. 241 6 दिसं. 235 7 दिसं. 222 8 दिसं. 214 9 दिसं. 212 10 दिसं. 196 11 दिसं. 194 12 दिसं. 178 13 दिसं. 172

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