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कोरोना का नया दर्द:फेफड़ों में घाव छाेड़ गया कोरोना, हीलिंग के दौरान आ रही नई लेयर इतनी कमजोर कि छेद होने लगे हैं

सूरत4 महीने पहले
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40% फाइब्रोसिस वाले मरीजों के फेफड़ों की नई लेयर में समस्या। - Dainik Bhaskar
40% फाइब्रोसिस वाले मरीजों के फेफड़ों की नई लेयर में समस्या।
  • डॉक्टर बोले- 40% से अधिक लंग्स इन्वॉल्वमेंट वालों में ऐसे चार मरीज आ चुके

कोरोना से फेफड़े में हुए फाइब्रोसिस सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। अभी तक इसका कोई विशेष इलाज नहीं मिल पाया है। इसी बीच फेफड़े से जुड़ी एक और बड़ी समस्या सामने आ रही है। फाइब्रोसिस के कारण फेफड़ों में न्यूमोथोरैक्स (छेद) हो रहा है। अभी तक ऐसे चार मरीज आ चुके हैं। डॉक्टरों ने ऐसे मरीजों के फेफड़ों का सीटी स्कैन कराया तो पता चला कि फेफड़ों में न्यूमोथोरैक्स की स्थिति बन गई है।

यह फेफड़े में हुए फाइब्रोइसिस के कारण हो रहा है। ये मरीज 3 से 5 माह पहले ठीक हुए थे। सीने में तेज दर्द और सांस की गंभीर समस्या बढ़ने पर वे एक निजी अस्पताल आए थे। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के कारण फेफड़े में हुए फाइब्रोसिस जब फट जाते हैं तो यह स्थिति बन जाती है।

क्योंकि फाइब्रोसिस के कारण फेफड़े की दीवार उतनी मजबूत नहीं रह जाती जितनी वह सामान्य अवस्था में होती है। ऐसे में हीलिंग के दौरान यह समस्या हो जाती है। हालांकि सभी मामलों में ऐसा ही हो यह जरूरी नहीं है। ज्यादातर बुजुर्ग और 40 फीसदी से अधिक लंग्स इन्वॉल्वमेंट वाले मामले में हो सकते हैं।

छाती में दर्द, जकड़न व हृदय गति बढ़ने जैसी समस्याएं आ रही
न्यूमोथोरैक्स वाले मरीज को शुरुआत में धीरे-धीरे दिक्कत होती है फिर अचानक छाती में तेज दर्द, जकड़न, सांस की समस्या, हृदय गति का बढ़ जाना और अपच की शिकायत होती है। डॉ. दीपक विरडिया ने बताया कि कोरोना के कारण हुए मरीज के फेफड़ों में हुए फाइब्रोसिस से न्यूमोथोरैक्स की समस्या आ रही है। फाइब्रोसिस के कारण फेफड़े पर आने वाली नई लेयर पतली और कमजोर होती हैं। हीलिंग के दौरान ये लेयर फट जाती हैं। हमारे पास इस तरह की समस्या लेकर मरीज आ रहे हैं।

कोरोना के मरीजों में यह समस्या देखी जा रही है
फेफड़े के आसपास के क्षेत्र को कवर करने वाली दो लेयरों के बीच कई बार हवा भर जाती है या इसमें इंजरी हो जाती है। इसे ही न्यूमोथोरैक्स कहते हैं। कोरोना के जो मरीज वेंटिलेटर से बाईपेप पर जाते हैं उन्हें अधिक प्रेशर से ऑक्सीजन दिया जाता है। हो सकता है इस वजह से उन्हें यह समस्या हो रही हो। कोरोना के मरीजों में अब यह समस्या देखी जा रही है।
- डाॅ. राॅबिन पटेल, टीबी-चेस्ट विभाग, सिविल

इन कारणों से भी हो सकती है न्यूमोथोरैक्स की समस्या

छाती में चोट के कारण फेफड़े की बीमारी होने पर भी न्यूमोथोरैक्स की समस्या हो सकती है। इसमें क्षतिग्रस्त फेफड़ों के सेल्स के कोलैप्सड होने की अाशंका होती है। सीओपीडी, सिस्टिक फाइब्रोसिस और निमोनिया के कारण भी ऐसा हो सकता है। कई बार इलाज के दौरान गले में डाली गई मैकेनिकल वेंटिलेशन से भी फेफड़े में छेद हो सकता है।

सूरत में अभी भी रोज 150 से ज्यादा नए केस जबकि पड़ोसी जिलों में सिंगल डिजिट में...

...क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग ज्यादा है

सूरत. सूरत में भले ही अभी भी रोज कोरोना के 150 से ज्यादा केस अा रहे हैं, लेकिन पड़ोसी नवसारी, भरूच, वलसाड, डांग, नर्मदा व तापी जिले में इक्का-दुक्का मामले ही आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन जिलों में ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा होने से सोशल डिस्टेंसिंग रहती है। इस कारण कोरोना के केस बहुत ही कम आ रहे हैं।

रविवार को सूरत में 158 नए मामले आए, जबकि इन सभी जिलों को मिलाकर मात्र 17 नए मामले आए। राज्य के जिलों की बात करें तो 22 जिले ऐसे हैं जिनमें कोरोना के केस सिंगल डिजिट में आ रहे हैं, जबकि 12 जिले ऐसे हैं जहां दो अंक में केस देखे जा रहे हैं। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अभी भी तीन अंक में केस आ रहे हैं।

सूरत सूरत में भले ही अभी भी रोज कोरोना के 150 से ज्यादा केस आ रहे हैं, लेकिन पड़ोसी नवसारी, भरूच, वलसाड, डांग, नर्मदा व तापी जिले में इक्का-दुक्का मामले ही आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन जिलों में ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा होने से सोशल डिस्टेंसिंग रहती है। इस कारण कोरोना के केस बहुत ही कम आ रहे हैं।

रविवार को सूरत में 158 नए मामले आए, जबकि इन सभी जिलों को मिलाकर मात्र 17 नए मामले आए। राज्य के जिलों की बात करें तो 22 जिले ऐसे हैं जिनमें कोरोना के केस सिंगल डिजिट में अा रहे हैं, जबकि 12 जिले ऐसे हैं जहां दो अंक में केस देखे जा रहे हैं। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अभी भी तीन अंक में केस आ रहे हैं।

रविवार को जिले में आए केस

जिला नए केस सूरत 158 भरूच 08 वलसाड़ 02 नवसारी 02 डांग 01 नर्मदा 03 तापी 01

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