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हड़ताल:‘कोरोना वॉरियर्स’ काे 2 महीने से नहीं दे रहे थे सैलेरी, हड़ताल पर उतरे ताे 2 घंटे में हुआ पेमेंट

सूरत2 महीने पहले
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सिविल परिसर में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने जमकर हंगामा किया। आश्वासन पर लौटे। - Dainik Bhaskar
सिविल परिसर में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने जमकर हंगामा किया। आश्वासन पर लौटे।
  • लैब-एक्सरे टेक्नीशियन, ऑपरेटर, वार्ड-सफाईकर्मी सहित सिविल के 450 कर्मचारियों ने 9 घंटे काम बंद रखा
  • सिविल: पर्ची काटने की व्यवस्था नहीं की इसलिए पहली बार 6 घंटे ठप रही इमरजेंसी सेवाएं

सिविल अस्पताल के कॉन्ट्रेक्ट बेस तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर उतर गए। इन कोरोना वॉरियर्स को दो माह से तनख्वाह नहीं मिल रही थी। हड़ताल में लैब टेक्निशियन, कम्प्युटर ऑपरेटर, एक्स-रे टेक्निशियन, वार्डकर्मी, सफाईकर्मी सहित 450 कर्मचारी शामिल रहे। यह हड़ताल सुबह 8 बजे से शाम पांच बजे तक चली।

इसकी वजह से सिविल के इतिहास में पहली बार इमरजेंसी सेवा बंद रही। सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे यानी 6 घंटे तक ट्रॉमा सेंटर में एक भी मरीज का इलाज नहीं हुआ। इलाज लेने आए करीब 50 मरीजों को लौटा दिया गया। 108 एम्बुलेंस मरीजों को सिविल लाने के बजाय स्मीमेर अस्पताल ले गई। वहीं ओपीडी में भी सैकड़ों मरीजों को इलाज और दवाई नहीं मिली। एक्स-रे मशीन, लेबोरेटरी भी कुछ समय के लिए बंद रही। वार्ड में इलाज ले रहे मरीजों की देख रेख नर्स, रेजिडेंट डॉक्टरों ने किया।

सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. निमेष वर्मा मरीज को देखने वार्ड में गए थे। जहां सहयोगी स्टाफ नहीं होने उन्हें डाइपर तक बदलना पड़ा। हंगामे के साथ हड़ताल शाम पांच बजे तक चली। लेकिन, हड़ताल का असर यह रहा कि दोपहर एक बजे कर्मियों के नवंबर माह का वेतन ट्रांसफर कर दिया गया।

इसके बाद कर्मचारियों ने दिसंबर माह के वेतन और वेतन बढ़ाए जाने के आश्वासन के लिए फिर से हंगामा करते रहे। लेकिन, अस्पताल प्रशासन की तरफ से अस्पताल अधीक्षक ने दिसम्बर माह का वेतन गुरुवार दोपहर 12 बजे तक दे देने का आश्वासन दिया।

इसके बाद शाम पांच बजे कर्मचारी काम पर लौटे। इससे पहले हड़ताली कर्मियों ने अस्पताल अधीक्षक कार्यालय के बाहर हंगामा किया। नवंबर और दिसंबर माह की पगार नहीं मिलने पर आक्रोश जताया। हालत को देखते हुए मौके पर पुलिस बल को भी बुलाना पड़ा।

मंगलवार को बात नहीं मानी, तो बुधवार को हड़ताल पर उतरे
ट्रॉमा सेंटर, ओपीडी में केस पेपर काउंटर, एमएलसी काउंटर, पोस्टमार्टम रजिस्टर पर इंट्री, एक्स-रे, ब्लड सैंपल कलेक्शन, ऑपरेशन थियेटर, मरीजों की ब्लड रिपोर्ट, सफाई, मरीजों की देख-रेख आदि काम नहीं हुए। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हड़ताल किया जा रहा है।

पहले भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। लेकिन, सिर्फ आश्वासन ही मिला। मंगलवार शाम 4 बजे भी हड़ताल पर थे। तब बात नहीं मानी तो बुधवार सुबह 8 बजे से सभी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए।

वार्डकर्मी नहीं मिले तो ऑपरेशन टालना पड़ा, काउंटर भी बंद रहे कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से करीब 10 से 12 ऑपरेशन को टालना पड़ा। अस्पताल में 60 कर्मचारी परमानेंट हैं। जब कॉन्ट्रेक्ट बेस वाले कर्मचारी हड़ताल पर चले गए तो इन 60 कर्मचारी को काम लगाने की बजाय अस्पताल प्रबंधन हड़ताल को रुकवाने का प्रयास करता रहा। बाद में पता चला कि अस्पताल में इलाज बंद हो गया है तो आनन फानन में सरकारी कर्मचारियों को केस काउंटर, रजिस्टर इंट्री एक्सरे आदि जगहों पर काम पर लगाया और मरीजों का इलाज शुरू हो सका।

^सरकार ने स्क्रू अकाउंट का प्रावधान बनाया है, जिसमें पैसा देने वाला, पैसा लेने वाला और बैंक को शामिल किया है। इस नियम के तहत पैसा देने वाले के सभी शर्तों को पैसा लेने वाले को मानना होगा, इसके बाद ही बैंक पैसा ट्रांसफर करेगा। इसी के चलते पेमेंट में देरी हुई, हालांकि एक करोड़ 40 लाख रुपए पुराने प्रावधान के तहत कर्मचारियों को दे दिए गए, जबकि दिसंबर माह के तनख्वाह की रकम गुरुवार शाम तक दे दी जाएगी।-डॉ. शैलेष पटेल, अधीक्षक, सिविल अस्पताल

सूरत-ए-हाल: सेवाएं प्रभावित हुईं, परेशान दिखे मरीज

केस-1: केस पेपर नहीं निकला तो सर्प दंश के मरीज को दो घंटे तक नहीं मिला इलाज नवसारी निवासी 28 वर्षीय बाबूभाई महतो को मंगलवार को सांप ने दश लिया था जिसके बाद उसे नवसारी सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था। बुधवार को उसकी हालत नाजुक हुई तो सुबह सूरत सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। बाबू गंभीर हालत में एम्बुलेंस से सुबह 11 बजे ट्रॉमा सेंटर के बाहर आ तो गया मगर यहां पता चला कि कर्मचारी हड़ताल पर हैं इसलिए इलाज नहीं होगा। भाई ने डॉक्टरों ने अनुरोध किया तो जवाब मिला कि केस पेपर निकलवा लो तो हम इलाज कर देंगे। दोपहर दो बजे के करीब अस्पताल में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को भेजा गया फिर काम शुरू हो सका। इसके बाद बाबू को इलाज मिला।

केस-2: मात्र पीएम रजिस्टर पर इंट्री नहीं होने से पांच शवों के पोस्टमार्टम घंटों तक अटके रहे पीएम रजिस्टर पर इंट्री नहीं होने मात्र से पांच शवों का पीएम नहीं हुआ। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक पांच शव पीएम रूम में रखे रहे, लेकिन उनकी इंट्री करने वाला कर्मी हड़ताल पर होने से इंट्री नहीं हो पाई, इसलिए दोपहर दो बजे तक पीएम नहीं हुआ। पालनपुर जकातनाका संत तुकाराम विभाग 6 निवासी 51 वर्षीय संजय मोरे मंगलवार को बेहोश हो गया। बुधवार सुबह 7 बजे सिविल अस्पताल लाया तो डॉक्टरों ने ने मृत घोषित कर दिया। शव को पीएम के लिए पीएम रूम में रखवा दिया गया 8 बजे पीएम होना था, लेकिन इसी बीच कर्मी हड़ताल पर चले गए तो रजिस्टर पर इंट्री नहीं हो पाई। पुलिस परिजनों को अपना मोबाइल नंबर देकर चली गई।

केस-3: प्राइवेट अस्पताल ने लीवर फेल्योर मरीज को सिविल रेफर किया, यहां तीन घंटे तक भटकता रहा पर केस पेपर तक नहीं निकला

पांडेसरा कर्मयोगी निवासी 42 वर्षीय गौतम मारु वानखेड़े को बुधवार पेट में तेज दर्द हुआ तो पास के एक अस्पताल में गया, जहां पता चला कि लीवर फेल है। डॉक्टरों ने सिविल रेफर कर दिया। सुबह 10 बजे वह अपनी पत्नी के साथ ट्रॉमा सेंटर आ गया। कैजुअल्टी के डॉक्टरों ने कहा, जब तक केस पेपर नहीं होगा हम कैसे इलाज कर सकेंगे। वह पूरे अस्पताल में इलाज के लिए भटकता रहा, लेकिन कहीं इलाज नहीं मिला।

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