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आरोप / सोला सिविल में वेंटिलेटर में ब्लॉस्ट से पॉजीटिव मरीज की मौत, प्रबंधन का कहना है-ब्लॉस्ट हुआ ही नहीं

सोला सिविल हॉस्पिटल में लापरवाही से महिला की मौत का आरोप परिजनों ने लगाया है। सोला सिविल हॉस्पिटल में लापरवाही से महिला की मौत का आरोप परिजनों ने लगाया है।
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सोला सिविल हॉस्पिटल में लापरवाही से महिला की मौत का आरोप परिजनों ने लगाया है।सोला सिविल हॉस्पिटल में लापरवाही से महिला की मौत का आरोप परिजनों ने लगाया है।

  • गोमतीपुर की महिला को दिल की तकलीफ होने पर भर्ती कराया गया था
  • खांसी हुई, मौत के बाद रिपोर्ट पॉजीटिव आई

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:57 AM IST

अहमदाबाद. सिविल हॉस्पिटल के बाद अब सोला सिविल हॉस्पिटल में लापरवाही का एक मामला सामने आया है। यहां दिल की मरीज एक महिला को भर्ती कराया गया था। उन्हें वेंटिलेटर में रखा गया था। गुरुवार दे रात वेंटिलेँटर ब्लॉस्ट हो गया। उसके बाद महिला को मृत घोषित कर दिया गया।

परिजनों ने लगाया आरोप

महिला के परिजनों ने हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि महिला की मौत डॉक्टर्स की लापरवाही के चलते हुई है। उधर अस्पताल प्रबंधन ने वेंटिलेटर ब्लॉस्ट से पूरी तरह से इंकार किया है। उनका कहना है कि इस तरह की कोई घटना हुई ही नहीं है।

तबीयत बिगड़ने पर वेंटिलेटर में रखा गया था

गोमतीपुर के शमशेर बाग में रहने वाली 55 वर्षीय परवीन बानो महमूद खान पठान के बेटे आमिरखान पठान ने बताया कि सोला सिविल हॉस्पिटल में वेंटिलेटर के ब्लॉस्ट होने पर मेरी मां का इंतकाल हो गया। मेरी मां को दिल की तकलीफ थे। इसलिए उन्हें 20 मई को अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हें तुरंत आईसीयू में रखा गया। यहां पर उन्हें किसी तरह की दवा नहीं दी गई। रात 8 बजे उन्हें हॉस्पिटल के छठे माले पर ले जाया गया। यहीं पर कोरोना पॉजीटिव वार्ड भी है। वहां मेरी मां को खांसी हुई। इससे उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

गुरुवार की रात तबीयत बिगड़ी

गुरुवार की रात उनकी तबीयत ज्यादा ही बिगड़ गई, तब उन्हें बोतल चढ़ाई गई। बोतल खत्म हुई, उसके बाद वेंटिलेटर ब्लॉस्ट हो गया। इसके बाद मां को मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई। इस संबंध में जब सोला सिविल हॉस्पिटल के उच्चाधिकारियों से पूछा गया, तो उन्होंने वेंटिलेटर ब्लॉस्ट होने से इंकार किया।

दूसरा वेंटिलेटर लगाने के पहले ही मौत

मृतक के बेटे ने बताया कि इलेक्ट्रिक मीटर में जिस तरह की खटाक आवाज आती है, उसी आवाज के साथ वेंटिलेटर ब्लॉस्ट हुआ। इस पर मेरा भाई डॉक्टर को बुलाने गया। डॉक्टर 13 मिनट बाद पहुंचे। उन्होंने दूसरा वेंटिलेटर लगाया, तब तक मेरी मां का देहांत हो चुका था। इसके बाद पाइप डालकर हृदय की गति चालू रखने के लिए इंजेक्शन दिया गया। पल्स और ईसीजी करते हुए 3 मिनट लग गए। इस दौरान ग्रीन लाइट आ गई। तब उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पर वेंटिलेटर कैसे ब्लॉस्ट हुआ, तो इस पर डॉक्टर ने कोई जवाब नहीं दिया।

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