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अब जांच आयोग ने कहा:अग्निकांड के लिए धमण वेंटिलेटर जिम्मेदार, अहमदाबाद की श्रेय और राजकोट के उदय शिवानंद अस्पताल अग्निकांड की रिपोर्ट विस में पेश

गांधीनगर2 महीने पहले
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पिछले साल राज्य में कोरोना के इलाज के लिए नामित अहमदाबाद के श्रेय और राजकोट के उदय शिवानंद अस्पताल में लगी आग के मामले में जांच आयोग की रिपोर्ट मंगलवार काे विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट में आयोग ने श्रेय अस्पताल के संचालक भरत विजयदास महंत और उदय शिवानंद अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में आयोग ने कहा कि आग के लिए अस्पतालों की घोर लापरवाही जिम्मेदार है।

आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राजकोट के उदय शिवानंद अस्पताल में वेंटिलेटर के रूप में इस्तेमाल होने वाले धमण में ब्लास्ट होने से आग लग गई और बगल में सो रहे एक मरीज के बाल जलने से आग अस्पताल में फैल गई। जबकि अहमदाबाद के श्रेय अस्पताल में पांच साल की लाइफ वाले पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम यूनिट 18 साल पुरानी थी। यहां तक ​​कि बिजली के उपकरण भी आवश्यक गुणवत्ता के नहीं थे और चिंगारी से आग लग गई।

स्थल निरीक्षण के दौरान, आयोग ने पाया कि श्रेय अस्पताल में मरीजों की दम घुटने से मौत हो गई क्योंकि आग का धुआं बाहर नहीं निकल सकता था क्योंकि खिड़कियां के कांच स्क्रू से फिट किए गए थे। यहां फायर अलार्म, स्मोक सेंसर या स्प्रिंकलर नहीं थे। इसी तरह, उदय शिवानंद अस्पताल में आपातकालीन निकास के लिए गेट के सामने वेंटिलेटर जैसे अन्य उपकरण होने से मरीजों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। यदि राज्य सरकार ने श्रेया अस्पताल के अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया होता तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था।

अहमदाबाद: वेंटिलेटर बनाने वाले पर कार्रवाई नहीं होगी, क्योंकि धमण दान में मिला था
महेता जांच आयोग ने पाया कि राजकोट के अस्पताल में खराब धमण के कारण आग लगी थी। वहीं, अस्पताल ने बताया था कि वेंटिलेटर उसे मुफ्त और दान में मिला था। वेंटिलेटर दान में मिलने के कारण उसे बनाने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। जांच आयोग ने अग्निकांड के लिए हॉस्पिटल के संचालक डॉ. तेजस करमटा को जिम्मेदार ठहराया था।
आयोग ने डॉक्टर को पूछताछ के लिए बुलाया तो उन्होंने कहा कि इस अस्पताल में डॉक्टर हैं और उनकी जिम्मेदारी मरीजों की सेवा करना है। हम मरीजों के शरीर के लिए जिम्मेदार हैं, आग की घटना में जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। आयोग ने कहा था कि डॉक्टर के रूप में तुम्हारी जिम्मेदारी मरीजों की पूरी सुरक्षा है। तुम हाॅस्पिटल के संचालक भी हो। अस्पताल को मुनाफा होने पर मीठा फल तुम्हीं खाते हो। इसलिए मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

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