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स्टेशन में गंदगी:रेलवे के ग्रीन स्टेशन पर गंदगी का अंबार; फंड के अभाव में नौ माह से नहीं हो पा रहा क्लीनिंग कॉन्ट्रैक्ट

सूरत22 दिन पहले
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  • साल 2019 में स्वच्छता सर्वेक्षण में एनएसजी कैटेगरी में 7वें नंबर पर था उधना रेलवे स्टेशन

साल 2019 में जारी हुए देश भर के रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता रैंकिंग में ग्रीन स्टेशन के तौर पर जाना जाने वाला उधना स्टेशन पूरे भारतीय रेलवे में 16वें स्थान पर रहा था, जबकि एनएसजी 3 कैटेगरी में सातवें स्थान पर था। लेकिन इस बार जारी होने वाले रैंकिंग में उधना स्टेशन शायद इस रैंक से काफी पीछे पहुंच जाए। क्योंकि पिछले साल अगस्त महीने से अब तक उधना स्टेशन का क्लीनिंग ठेका ही नहीं हुआ है।

9 महीने से फंडिंग की समस्या बनी हुई है। पिछले साल अगस्त महीने में उधना स्टेशन का क्लीनिंग कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद इसका ठेका फिर से नहीं दिया गया है। इससे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया और बाहरी एरिया में स्वच्छता का अभाव है। साथ ही स्टेशन के प्रत्येक एरिया में गंदगी व्याप्त है।

जबकि ट्रैक पर कचरे फेंके गए हैं। उधना स्टेशन पर वर्तमान में केवल दो सफाई कर्मचारी हैं, जिन्हें स्टेशन के अलावा यार्ड एरिया की भी सफाई करनी पड़ती है। स्टेशन पर इसका असर दिखने लगा है। सफाईकर्मियों की कमी से स्टेशन पर जगह-जगह पान और गुटखे खा कर थूके हुए हैं।

क्लीनिंग बजट 60 लाख रुपए का है

उधना स्टेशन परिसर ट्रैक समेत सभी की क्लीनिंग के लिए ईगल नाम की कंपनी को ठेका दिया गया था। यह ठेका 2020 अगस्त महीने में खत्म हो गया। इसका बजट कुल 60 लाख का है। साफ़-सफाई के लिए कुल 18 कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था।

उन्हें पेस्ट कंट्रोल इत्यादि का काम करना होता है। साफ़-सफाई के लिए स्क्रबर ड्रायर, बैटरी ऑपरेटेड स्वीपर, वैक्यूम क्लीनर, फ्लिपर मशीन, स्टीम क्लीनर, जेट क्लीनर अाैर अन्य मशीनों का इस्तेमाल होता है। ट्रैक पर साफ़-सफाई पेस्ट कंट्रोलिंग से की जाती है।

यहां सफाई फिर भी कॉकरोच-चूहे

  • प्लेटफार्म
  • पैसेज
  • सर्कुलेटिंग एरिया सबवे
  • वेटिंग रूम
  • स्टेयर केस
  • प्लेटफार्म एरिया के रेल ट्रैक
  • अप-डाउन ट्रैक वाॅशिंग पेस्ट कंट्रोलिंग
  • यार्ड लाइन पिट लाइन

इसलिए नहीं दिया गया है ठेका

इस मामले में प. रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अगस्त 2020 में ठेका खत्म होने के बाद नए ठेके के लिए कोटेशन निकाला गया था, लेकिन अभी तक नए ठेकेदार को जिस क्राइटेरिया पर ठेका दिया जाना है उस पैमाने पर नहीं मिले हैं। वहीं अन्य सूत्रों ने बताया कि 9 माह से फंडिंग के कारण ठेका अटका हुआ है।

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