सुखद:66 दिन की दूसरी लहर में पहली बार नए मरीजों से डिस्चार्ज ज्यादा

सूरत6 महीने पहले
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लाइफ लाइन चैरिटेबल ट्रस्ट ने ठीक कर ऐसे भेजा घर। - Dainik Bhaskar
लाइफ लाइन चैरिटेबल ट्रस्ट ने ठीक कर ऐसे भेजा घर।

23 फरवरी को मनपा चुनाव का रिजल्ट आया था। तभी से कोरोना की दूसरी लहर चली थी और केस बढ़ने शुरू हो गए थे। दूसरी लहर में पहली बार गुरुवार को कोरोना के नए मरीजों ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या रही। यह शहर के लिए सुखद खबर है। महानगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शहर में गुरुवार को 2192 नए मरीज सामने आए है। इसकी अपेक्षा 2243 मरीज डिस्चार्ज किए गए। नए मरीजों में शहर के 1836 और ग्रामीण के 356 हैं। अब तक 113082 पॉजिटिव आ चुके हैं।

वहीं दूसरी ओर डिस्चार्ज होने वालों में शहर के 1890 और ग्रामीण के 353 हैं। अब तक 88994 मरीज ठीक हो चुके हैं। 23 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हुई। इससे मौत का आंकड़ा 1740 तक पहुंच गया है। 22348 एक्टिव मरीजों का इलाज चल रहा है।

रांदेर: सुगर से पीड़ित विपिनभाई 22 दिन में ठीक

रांदेर, ताड़वाडी के 65 वर्षीय विपिनभाई पीपवाला ने स्मीमेर में 22 दिन के इलाज के बाद कोरोना को हरा दिया। वह मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल के मरीज हैं। विपिनभाई ने बताया कि 5 अप्रैल को कोरोना के लक्षण मिलने के बाद टेस्ट पॉजिटिव आया था। उसी दिन उन्हें स्मीमेर में भर्ती कराया गया।

उन्हें 9 अप्रैल तक बाइपेप पर रखा गया। इस दौरान ऑक्सीजन लेवल 94 तक था। 9 अप्रैल से 15 लीटर ऑक्सीजन पर रखा गया, पर 11 अप्रैल को तबीयत खराब होने पर फिर से बाइपेप पर रखा। 20 अप्रैल को 5 लीटर पर ऑक्सीजन और 23 अप्रैल को नॉर्मल एयर रूम में गए। उसके बाद विपिनभाई ठीक हो गए।

पांडेसरा: धर्मेश ने 34 दिन संघर्ष कर कोरोना को हराया

​​​​​​​पांडेसरा के भेस्तान आवास में रहने वाले 35 साल के धर्मेश यादव ने सिविल अस्पताल में 34 दिन संघर्ष करके कोरोना को हराया। कोरोना के लक्षण होने के बावजूद टेस्ट कराने में लापरवाही की वजह से उनकी हालत गंभीर हो गई थी। धर्मेश ने बताया कि सिविल में भर्ती होते समय फेफड़ों में 80 प्रतिशत इन्फेक्शन था।

डॉक्टरों ने समय पर इलाज करके मेरी जान बचाई। मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं। सिविल के डॉ. संदीप काकलोतर ने बताया कि धर्मेंद्र को गंभीर हालत में सिविल में लाया गया था। उसका ऑक्सीजन लेवल घटकर 60 पर आ गया था। 15 दिन बाइपेप पर रहा। उसके बाद ऑक्सीजन पर रखा गया था।

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