महामारी से बड़ा रोजी का संकट / कोरोना से पहले भूख से न मरें इसलिए पैदल ही चल पड़े 962 किमी दूर बीकानेर

Do not die of hunger before Corona, so walk on foot to Bikaner, 962 km away
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Do not die of hunger before Corona, so walk on foot to Bikaner, 962 km away

  • महामारी: बड़ी संख्या में लोग साइकिल, पैदल और टेम्पो से अपने गांव निकल गए
  • व्यापार ठप होने से पिछले दो दिनों में पांच हजार श्रमिक पैदल ही राजस्थान जा चुके हैं

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 10:36 AM IST

सूरत.  कोरोना से रोजी-रोजी पर आए संकट के बीच बड़ी तादाद में लोग पैदल, साइकिल और टेम्पो से राजस्थान अपने-अपने गांव निकल गए।  पिछले दो दिनों में पांच हजार श्रमिक पैदल ही राजस्थान जा चुके हैं। दिहाड़ी मजदूर 20 किमी पैदल चलकर कडोदरा हाइवे तक ट्रक आदि मिला तो ठीक नहीं पैदल ही चले जा रहे हैं। इस दौरान श्रमिकों ने अपनी अपनी समस्या भी बताई। शहर में कपड़ा मार्केट में हाथ गाड़ी मजदूरों पर बड़ा संकट आ गया है। कपड़ा मार्केट बंद हो जाने से व्यापार ठप है। ये मजदूर एक-एक पैसे के लिए परेशान हैं। कई ने रिंग रोड ब्रिज के नीचे ठिकाना बना लिया है।

सूरत से पैदल चल 390 किमी रतलाम पहुंचे दंपती
23 मार्च को सूरत से पैदल चले दंपती गुरुवार को मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के गांव सैलाना पहुंचे। वहां से वे अपने गांव चंदनगढ़ चले गए। दंपती ने बताया कि वे सूरत में मजदूरी करते हैं। दंपती दो किलो चने लेकर रेल पटरी के सहारे चले। रास्ते में खाने को कुछ नहीं मिला।

हमारे पास पैसे नहीं बचे, पैदल 3 दिन में पहुंच जाएंगे: राजूराम

कपड़ा मार्केट में मजदूरी करने वाले राजस्थान के आबू रोड निवासी राजूराम कहते हैं कि 31 मार्च तक बंदी थी तो हमने सोचा किसी तरह दिन काट लेंगे, लेकिन 14 अप्रैल तक बंदी से हमारे पास पैसे नहीं बचे। सेठ ने भी हाथ खड़े कर दिए। परिवार गांव में है। यहां कोरोना से मरूं या भूख से। 3 दिन में पैदल गांव पहुंच जाऊंगा।

काम कर बाहर खाना खाते थे, यहां रहे तो भूख से मर जाएंगे: मेघराज
कपड़ा मार्केट में दिहाड़ी करने वाले राजस्थान के बीकानेर निवासी मेघराम शर्मा ने बताया कि रोज 500 रुपए मिल जाते थे। बाहर खाना खाते थे। अब सब बंद है। 14 अप्रैल तक तो भूख से मौत हो जाएगी, इसलिए अब गांव जा रहा हूं। अगर साधन नहीं मिला तो पैदल चले जाएंगे। गांव में बच्चा बीमार है। 

सेठ ने कहा बंदी तक नहीं रख सकते, गांव चले जाओ: जीवराज
मिल में मजदूरी करने वाले राजस्थान के बाड़मेर निवासी जीवराज सिंह ने बताया कि सेठ ने 23 मार्च को 1000 रुपए दिए और कहा कि बंदी तक हमारे यहां जगह नहीं है, गांव चले जाओ। यहां कहां रहोगे। हम अपने गांव जा रहे हैं। मेरे साथ इस तरह से कुल 28 मजदूर हैं, जो पैदल अपने गांव जा रहे हैं।

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